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अन्तर्राष्ट्रीय

WHO प्रमुख ने की पीएम मोदी की तारीफ, कही ये बात

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नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के चीफ डॉ. ट्रेड्रॉस ए. गेबरेसस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। डब्ल्यूएचओ चीफ ने अपने किए गए ट्वीट में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए उनकी प्रशंसा की है।

उन्होंने ट्वीट कर कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को #VaccinEquity का समर्थन करने के लिए धन्यवाद। इसके साथ ही उन्होंने लिखा है कि #COVAX और #COVID19 वैक्सीन खुराक को दूसरे देशों के साथ शेयर करने से उन देशों को कोरोना से लड़ने में काफी मदद मिल रही है।

उन्होंने कहा कि कोवैक्स के प्रति आपकी प्रतिबद्धता और कोविड-19 वैक्सीन की खुराकें देना 60 से अधिक देशों की सहायता कर रहा है। ये देश अपने स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य लोगों का टीकाकरण का काम शुरू कर पा रहे हैं। उम्मीद है कि अन्य देश आपका अनुसरण करेंगे।

अन्तर्राष्ट्रीय

दुनिया में पहली बार कब बनी थी रोटी, जानकर चकरा जाएगा आपका सिर!

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नई दिल्ली। दुनिया में पहली बार रोटी कब बनी, कहां बनी और कैसे बनी इसे लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं। लेकिन हाल ही में शोधकर्ताओं ने रोटी से जुड़ा नया सच खोज निकाला है।

उत्तर-पूर्वी जॉर्डन में शोधार्थियों को एक ऐसी जगह मिली है जिसे लेकर कहा जा रहा है कि वहां करीब साढ़े चौदह हजार साल पहले फ्लैटब्रेड यानी रोटी पकाई गई थी।

शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि इस जगह पर पत्थर के बने एक चूल्हे में रोटी पकाई गई थी। शोधार्थियों को मौके से वह पत्थर का चूल्हा भी मिला है।

इन अवशेषों से यह पता चलता हैं कि मानव ने कृषि विकास होने से सदियों पहले ही रोटी पकानी शुरू कर दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 4000 साल पहले इंसानों ने खेती करना शुरू किया था लेकिन उससे काफी समय पहले ही पूर्वी भूमध्यसागर में शिकारियों ने रोटियां पकानी शुरू कर दी थीं।

अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि उस समय रोटी बनाने में जंगली अनाजों का इस्तेमाल किया गया होगा। यह रोटी जौ, इंकॉर्न, जई और पानी में उगने वाले एक खास किस्म के पौधे ट्यूबर्स से बनाई गई होगी।

शोध के अनुसार इस रोटी को नॉटफियन संस्कृति के लोगों ने बनाया होगा। ये वे लोग होंगे जो एक जगह ठहरकर जीवन व्यतीत करते होंगे। यह अवशेष ब्लैक डेजर्ट एर्केओलॉजिक साइट पर मिला है।

इस शोध से मिले अवशेषों से यह प्रतीत होता है कि रोटी का इतिहास कृषि विकास से भी काफी पुराना है। शोधार्थी अमाया अरन्ज-ओटेगुई ने बताया, यह संभव है कि रोटी ने पौधों की खेती करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया होगा।

 

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