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खेल-कूद

विराट कोहली ने लगवाया कोरोना का टीका, लोगों से की ये अपील

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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने कोरोना वैक्सीन लगवा ली है। सोमवार को उन्होंने टीके का पहला डोज लिया। इससे पहले टीम इंडिया के बल्लेबाज शिखर धवन और अजिंक्य रहाणे भी कोरोना की वैक्सीन लगवा चुके हैं।

वैक्सीनेशन के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से अपील भी की। उन्होंने कहा कि  जितना जल्दी हो सके, कोरोना वैक्सीन लेने की कोशिश करें और सुरक्षित रहें।’

बीसीसीआई ने कहा है कि, ‘कोविड-19 से उबरने के बाद आप एक समय अवधि के बाद ही टीकाकरण करवा सकते हैं। अगर प्रसिद्ध कृष्णा 18 या 20 मई को नेगेटिव आते हैं तो भी उनको पहले टीके के लिए चार सप्ताह का इंतजार करना होगा।’ बोर्ड ने कहा कि अगर सभी खिलाड़ी भारत में कोविशील्ड टीका लगवाते हैं तो इंग्लैंड में इसके दूसरे डोज को लेने में आसानी होगी, क्योंकि यह ऑक्सफोर्ड का टीका है।

खेल-कूद

हॉकी में ओलंपिक पदक जीतकर बीमार पिता इलाज कराना चाहती हैं सोनीपत की निशा

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नई दिल्ली। टोक्यो ओलंपिक के लिए महिला हॅाकी टीम में चयनित होने वाली सोनीपत की निशा अपने दर्जी पिता का इलाज कराकर उन्हें नया घर देना चाहती है। बीमार पिता की हालत के चलते निशा को हॅाकी छोड़ना पड़ा था।

पिता को लकवा मारते ही निशा के घर की हालत खराब होना शुरू हो गई। तब निशा ने खेलना शुरू ही किया था। लेकिन केवल एक कमाऊ सदस्य होने के कारण निशा व उनकी दो बहनों को काम करना पड़ा।

निशा ने हॅाकी छोड़ दी पर उनकी कोच प्रीतम रानी सिवाच ने उनका साथ न छोड़ते हुए निशा को प्रेरित किया। यह कोच की प्रेरणा और निशा की मेहनत ही है कि वह टोक्यो ओलंपिक मे चयनित हो सकी। निशा बेबाकी से कहती हैं कि वह ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन कर अपने पिता का बेहतर इलाज और घर देना चाहती है।

पिता ने कहां, अब देश का नाम रोशन करो

निशा के पिता दर्जी हैं। उनके लकवाग्रस्त होने के बाद उनका काम-धंधा बंद हो गया। निशा कहती है, उनके मामा ने उनकी बहुत मद्द की और उनके साथ उनकी बहनों ने भी बहुत काम किया।

अब उनकी शादी हो चुकी है और निशा की भी रेलवे में नौकरी लग चुकी हैं। लेकिन माता-पिता अब भी सोनीपत में छोटे से मकान में रहते हैं। इसलिए निशा अपने पिता का इलाज कराकर उन्हें एक नया घर देना चाहती हैं।

निशा बताती है कि सबसे पहले अपने ओलंपिक में चयनित होने की खबर उन्होंने अपनी कोच प्रीतम को दी। उसके बाद अपने पिता सोहराब को। पिता के मुंह से यही निकला कि जिसके लिए तुमनें मेंहनत ही उसका फल तुम्हें मिल गया। अब देश का नाम रोशन करो।

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