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उत्तराखंड

उत्तराखंडः बीते 24 घंटे में कोरोना ने 5541 नए केस, 168 की मौत

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देहरादून। कोरोना वायरस की दूसरी लहर में उत्तराखंड में लगातार बड़ी संख्या में संक्रमण में मामले सामने आ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक सोमवार कोविड-19 के 5541 नए केस सामने आए। वहीं इस खतरनाक वायरस से 168 लोगों की जान चली गई। ताजा आंकड़े स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, ताजा मामलों को मिलाकर अब तक प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या 2,49,814 हो चुकी है।

विभाग के मुताबिक सर्वाधिक 1857 कोविड मरीज देहरादून जिले में मिले जबकि उधमसिंह नगर में 717, हरिद्वार में 591, नैनीताल में 517 और उत्तरकाशी में 371 नए मरीज सामने आए. इसमें कहा गया है कि ताजा मौतों को मिलाकर प्रदेश में अब तक कुल 3896 कोरोना संक्रमित अपनी जान गंवा चुके हैं। प्रदेश में उपचाराधीन मामलों की संख्या 74,480 है जबकि 1,66,521 मरीज अब तक स्वस्थ हो चुके हैं।

गौरतलब है कि देश में कोरोना की दूसरी लहर कई राज्यों में कहर बरपा रहा है। इस वायरस की चेन को तोड़ने के लिए कई प्रदेशों की सरकारों के लॉकडाउन लगाना पड़ा है। हालांकि लगातार दो दिन से भारत में कम आ रहे मामलों से अब अच्छे संकेत मिलने लगे हैं। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक देश में बीते 2 दिन से लगातार कम संख्या में नए केस आ रहे हैं। वहीं ठीक होने वाले लोगों की संख्या नए मरीजों से ज्यादा हैं।

उत्तराखंड

उत्तराखंड की नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के निधन पर सीएम योगी ने जताया दुख

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देहरादून। कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री और उत्तराखंड की नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश का रविवार की सुबह निधन हो गया। वह 80 साल की थीं। जानकारी के अनुसार दिल्ली में हृदय गति रुकने से उनका देहांत हो गया।

सालों के अपने राजनीतिक करियर में इंदिरा हृदयेश ने उत्तराखंड की राजनीति को कई नए मुकाम दिए और प्रदेश में काफी कुछ विकास के काम किए, खासकर कुमाऊं मंडल में उनको मदद का मसीहा माना जाता रहा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखंड विधानसभा की नेता प्रतिपक्ष श्रीमती इंदिरा हृदयेश जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सीएम योगी ने दिवंगत आत्मा की शान्ति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

इंदिरा हरदेश के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो 1974 में उत्तर प्रदेश के विधान परिषद में पहली बार चुनी गईं जिसके बाद 1986, 1992 और 1998 में इंदिरा ह्रदयेश लगातार चार बार अविभाजित उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए चुनी गईं। साल 2000 में अंतरिम उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी बनीं और प्रखरता से उत्तराखंड के मुद्दों को सदन में रखा।

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