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उत्तराखंड

केदारनाथ धाम के खुले कपाट, सीएम तीरथ सिंह रावत ने ट्वीट कर कही ये बात

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देहरादून। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित भगवान केदारनाथ धाम के कपाट सोमवार को विधि विधान और पूजा अर्चना के बाद सुबह 5 बजे खोल दिए गए। कपाट खुलने के मौके पर यहां तीर्थयात्री और स्थानीय लोगों की कमी साफ देखी गई।

मंदिर को 11 क्विंटल फूलों से सजाया गया है। पिछले साल की तरह इस बार भी कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से इस दौरान श्रद्धालु उपस्थित नहीं रह पाए। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने ट्विटर पर जानकारी देते हुए लिखा, ”विश्व प्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग भगवान केदारनाथ धाम के कपाट आज सोमवार को प्रातः 5 बजे विधि-विधान से पूजा-अर्चना और अनुष्ठान के बाद खोल दिए गए। मेष लग्न के शुभ संयोग पर मंदिर का कपाटोद्घाटन किया गया। मैं बाबा केदारनाथ से सभी को निरोगी रखने की प्रार्थना करता हूं।”

अपने दूसरे ट्वीट में तीरथ सिंह रावत ने कहा केदारनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) आदरणीय श्री भीमाशंकर लिंगम् जी की अगुवाई में तीर्थ पुरोहित सीमित संख्या में मंदिर में बाबा केदार की पूजा-अर्चना नियमित रूप से करेंगे। मेरा अनुरोध है कि महामारी के इस दौर में श्रद्धालु घर में रहकर ही पूजा-पाठ और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करें।

उत्तराखंड

उत्तराखंड की नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के निधन पर सीएम योगी ने जताया दुख

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देहरादून। कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री और उत्तराखंड की नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश का रविवार की सुबह निधन हो गया। वह 80 साल की थीं। जानकारी के अनुसार दिल्ली में हृदय गति रुकने से उनका देहांत हो गया।

सालों के अपने राजनीतिक करियर में इंदिरा हृदयेश ने उत्तराखंड की राजनीति को कई नए मुकाम दिए और प्रदेश में काफी कुछ विकास के काम किए, खासकर कुमाऊं मंडल में उनको मदद का मसीहा माना जाता रहा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखंड विधानसभा की नेता प्रतिपक्ष श्रीमती इंदिरा हृदयेश जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सीएम योगी ने दिवंगत आत्मा की शान्ति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

इंदिरा हरदेश के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो 1974 में उत्तर प्रदेश के विधान परिषद में पहली बार चुनी गईं जिसके बाद 1986, 1992 और 1998 में इंदिरा ह्रदयेश लगातार चार बार अविभाजित उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए चुनी गईं। साल 2000 में अंतरिम उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी बनीं और प्रखरता से उत्तराखंड के मुद्दों को सदन में रखा।

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