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उत्तराखंड

उत्तराखंडः तीरथ सिंह रावत ने की किरण खेर के जल्द स्वस्थ होने की कामना

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देहरादून। बॉलीवुड एक्ट्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सांसद किरण खेर ब्लड कैंसर की बीमारी से जूझ रही हैं। जानकारी के मुताबिक उनका इलाज मुंबई में चल रहा है। इस बात की पुष्टि खुद उनके पति अनुपम खेर ने की है।

किरण की बीमारी की खबर मिलने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। गुरुवार को उन्होंने ट्वीट किया, ‘मैं भगवान बदरी विशाल और बाबा केदार से चंडीगढ़ से भाजपा सांसद श्रीमती किरण खेर जी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और दीर्घायु की कामना करता हूं। मुझे विश्वास है कि आप अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से स्वस्थ होकर शीघ्र लौटेंगी।’

बता दें कि मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत हाल ही में कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। उन्होंने यह जानकारी ट्वीट के जरिए दी थी। उन्होंने ट्विट किया था कि मेरी कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। मैं ठीक हूं और मुझे कोई परेशानी नहीं है। डॉक्टर्स की निगरानी में मैंने स्वयं को आइसोलेट कर लिया है।

आप में से जो भी लोग गत कुछ दिनों में मेरे निकट संपर्क में आयें हैं, कृपया सावधानी बरतें और अपनी जांच करवाएं। तब से सीएम का इलाज चल रहा है। उनके डाक्टर डा. एनएस बिष्ट ने बताया कि सीएम की सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है।

उत्तराखंड

उत्तराखंड की नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के निधन पर सीएम योगी ने जताया दुख

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देहरादून। कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री और उत्तराखंड की नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश का रविवार की सुबह निधन हो गया। वह 80 साल की थीं। जानकारी के अनुसार दिल्ली में हृदय गति रुकने से उनका देहांत हो गया।

सालों के अपने राजनीतिक करियर में इंदिरा हृदयेश ने उत्तराखंड की राजनीति को कई नए मुकाम दिए और प्रदेश में काफी कुछ विकास के काम किए, खासकर कुमाऊं मंडल में उनको मदद का मसीहा माना जाता रहा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखंड विधानसभा की नेता प्रतिपक्ष श्रीमती इंदिरा हृदयेश जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सीएम योगी ने दिवंगत आत्मा की शान्ति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

इंदिरा हरदेश के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो 1974 में उत्तर प्रदेश के विधान परिषद में पहली बार चुनी गईं जिसके बाद 1986, 1992 और 1998 में इंदिरा ह्रदयेश लगातार चार बार अविभाजित उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए चुनी गईं। साल 2000 में अंतरिम उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी बनीं और प्रखरता से उत्तराखंड के मुद्दों को सदन में रखा।

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