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आध्यात्म

नए साल में इन 4 राशियों का होगा भाग्योदय, कहीं वो आप तो नहीं

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आज के दौर में हर इंसान की ज़िंदगी में कोई न कोई चुनौती होती है। साल 2018 में हम लोगों ने कई चुनौतियों का सामना किया होगा। आने वाले साल में भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन आज हम आपको उन 4 राशियों के बारे में बताने वाले है, जिनका भाग्य सूर्य की तरह तेज़ चमक रहा है, जिससे अपने जीवन में आने वाली हर चुनौतियों को इन राशि के जातक आसानी से पार कर लेंगे।

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बता दें, वो राशियां है – तुला ,मीन,वृषभ,और कुंभ। इन राशियों के लिए नया साल नयी सौगात लेकर आ रहा है। इन राशि के लोगों को सफलता के नए मार्ग हासिल होंगे। अचानक धन लाभ होगा और सफलता के नए-नए अवसर प्राप्त होंगे जिनका आप भरपूर लाभ उठाएंगे। कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। जो बेरोज़गार हैं उन्हें किसी अच्छी कंपनी से जॉब का ऑफर आ सकता है।

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2019 का साल आपके व्यापार और जीवन में अत्यधिक धन लाभ लेकर आने वाला है। प्यार के मामलों में आपको सफलता मिलेगी। नौकरी करने वाले लोगों को प्रमोशन मिलेगा। नए साल में आप अपने दोस्तों के साथ मिलकर किसी नए काम की शुरुआत करेंगे।

 

आध्यात्म

कुम्भ ख़त्म होने के बाद कहां चले जाते है नागा साधु, जानकर हैरान रह जाएंगे आप

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प्रयागराज में आयोजित हो रहे कुभं मेला में देशभर में नागा साधु आए है। इन साधुओं के मुंह पर महादेव का नाम, शरीर पर भस्म और हाथों में तीर-तलवार-त्रिशूल साथ रखते है।

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बहुत कम लोग जानते हैं कि कुंभ में आए साधु मेला ख़त्म होने के बाद ये आम साधु संन्यासी की तरह पूजा-पाठ व जाप करते हैं या फिर हिमालय की कंदराओं और घने जंगलों में तप के लिए निकल जाते हैं।

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नागा संन्यासी की माने तो दिगंबर शब्द दिग् व अम्बर के योग से बना है। दिग् यानी धरती और अम्बर यानी आकाश। आशय कि धरती जिसका बिछौना हो और अम्बर जिसका ओढ़ना।

नागा साधुओं का कहना है कि सालभर दिगम्बर अवस्था में रहना समाज में संभव नहीं है। निरंजनी अखाड़े के अध्यक्ष महंत रवींद्रपुरी जो खुद भी पेशवाई के दौरान नागा रूप धारण करते हैं, कहते हैं कि समाज में आमतौर पर दिगम्बर स्वरूप स्वीकार्य नहीं है।

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नागा संन्यासी बनने के लिए वयस्क होना आवश्यक है। वयस्क होने पर उसे गंगा की शपथ दिलाई जाती है कि वह परिवार में नहीं जाएगा और न ही विवाह करेगा। आपको बता दें, समाज से अलग रहेगा, ईश्वर भक्ति करेगा। खुद का भी पिंडदान कराया जाता है।

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