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अन्तर्राष्ट्रीय

कोरोना वायरस ने ले ली आजम खान की जान, अस्पताल में तोड़ा दम

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में तबाही मचा दी है। कई विकसित देश इसके आगे  बेबस नजर आ रहे हैं। चीन से निकला वायरस अब पूरी दुनिया में फैल चुका है।

भारत के साथ पाकिस्तान मे भी यह वायरस तेजी से फैल रहा है। इस बीच पाकिस्तान से एक बड़ी खबर सामने आई है। कोरोनावायरस की वजह से पाकिस्तान के महान स्क्वैश खिलाड़ी आजम खान का 95 साल की उम्र में निधन हो गया है।

जियो टीवी की रिपोर्ट को मुताबिक, 1959 से 1962 तक लगातार चार बार ब्रिटिश ओपन का खिताब जीतने वाले आजम को पिछले सप्ताह कोरोनावायरस से पीड़ित पाया गया था। उन्होंने शनिवार को यहां इलिंग अस्पताल में अंतिम सांस ली।

60 के दशक में ब्रिटेन में स्थानांतिरत हुए आजम दशकों तक स्क्वैश में राज करने वाले खानवंश का हिस्सा थे। उन्हें इस खेल के सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में गिना जाता है। उन्होंने 1962 में सबसे मुश्किल अमेरिका ओपन भी अपने नाम किया था।

चोट और 1962 में हुई बेटे की मौत के बाद हालांकि उन्होंने खेलना छोड़ दिया था। दो साल बाद वह अपनी चोट से उबरे लेकिन अपने बेटे की मौत के सदमे से नहीं उबर पाए।

उनके बड़े भाई हाशिम खान ब्रिटिश ओपन जीतने वाले पाकिस्तान के पहले खिलाड़ी थे। उन्होंने 1951 में यह खिताब जीता था। पाकिस्तान में अभी तक कोरोनावायरस के 1,600 मामले सामने आ चुके हैं जबकि 16 लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे हैं।

 

अन्तर्राष्ट्रीय

दुनिया में पहली बार कब बनी थी रोटी, जानकर चकरा जाएगा आपका सिर!

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नई दिल्ली। दुनिया में पहली बार रोटी कब बनी, कहां बनी और कैसे बनी इसे लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं। लेकिन हाल ही में शोधकर्ताओं ने रोटी से जुड़ा नया सच खोज निकाला है।

उत्तर-पूर्वी जॉर्डन में शोधार्थियों को एक ऐसी जगह मिली है जिसे लेकर कहा जा रहा है कि वहां करीब साढ़े चौदह हजार साल पहले फ्लैटब्रेड यानी रोटी पकाई गई थी।

शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि इस जगह पर पत्थर के बने एक चूल्हे में रोटी पकाई गई थी। शोधार्थियों को मौके से वह पत्थर का चूल्हा भी मिला है।

इन अवशेषों से यह पता चलता हैं कि मानव ने कृषि विकास होने से सदियों पहले ही रोटी पकानी शुरू कर दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 4000 साल पहले इंसानों ने खेती करना शुरू किया था लेकिन उससे काफी समय पहले ही पूर्वी भूमध्यसागर में शिकारियों ने रोटियां पकानी शुरू कर दी थीं।

अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि उस समय रोटी बनाने में जंगली अनाजों का इस्तेमाल किया गया होगा। यह रोटी जौ, इंकॉर्न, जई और पानी में उगने वाले एक खास किस्म के पौधे ट्यूबर्स से बनाई गई होगी।

शोध के अनुसार इस रोटी को नॉटफियन संस्कृति के लोगों ने बनाया होगा। ये वे लोग होंगे जो एक जगह ठहरकर जीवन व्यतीत करते होंगे। यह अवशेष ब्लैक डेजर्ट एर्केओलॉजिक साइट पर मिला है।

इस शोध से मिले अवशेषों से यह प्रतीत होता है कि रोटी का इतिहास कृषि विकास से भी काफी पुराना है। शोधार्थी अमाया अरन्ज-ओटेगुई ने बताया, यह संभव है कि रोटी ने पौधों की खेती करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया होगा।

 

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