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आध्यात्म

अगर हाथों में है ये रेखा तो पत्नी रखेगी आपका बहुत ख्याल

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नई दिल्ली। हाथों की रेखा के इंसान के जीवन में आगे क्या होने वाला है इसकी ओर संकेत करती है। भारत में हस्तरेखा विज्ञान में बहुत से लोगों को रुचि होती है। इसमें विवाह रेखा को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

यह व्यक्ति के वैवाहिक जीवन के बारे मे बताती है। विवाह रेखा का उद्भव और उसके आगे बढ़ने की स्थिति व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में बारे में बहुत कुछ संकेत देती है।

हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार यदि किसी शख्स के बाएं हाथ में दो विवाह रेखा हैं और दाएं में एक तो ऐसे लोगों को गुणवान और अच्छी पत्नी मिलती है। ऐसे लोगों की पत्नी अपने पति से बहुत प्यार करती हैं और उनका पूरा ख्याल रखती हैं।

लेकिन अगर इसके उलट दाएं हाथ में विवाह रेखा की संख्या दो हो और बाएं में एक तो पत्नी अपने पति का ध्यान नहीं रखती। यदि दोनों हाथों में विवाह रेखा की लंबाई समान और समान शुभ लक्षण वाली हो तो ऐसे लोगों का वैवाहिक जीवन बहुत ही सुखी होता है। जिन लोगो के हाथों में यह संयोग होता है उनका अपनी जीवनसाथी से बहुत ही अच्छा तालमेल होता है।

आध्यात्म

कुम्भ ख़त्म होने के बाद कहां चले जाते है नागा साधु, जानकर हैरान रह जाएंगे आप

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प्रयागराज में आयोजित हो रहे कुभं मेला में देशभर में नागा साधु आए है। इन साधुओं के मुंह पर महादेव का नाम, शरीर पर भस्म और हाथों में तीर-तलवार-त्रिशूल साथ रखते है।

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बहुत कम लोग जानते हैं कि कुंभ में आए साधु मेला ख़त्म होने के बाद ये आम साधु संन्यासी की तरह पूजा-पाठ व जाप करते हैं या फिर हिमालय की कंदराओं और घने जंगलों में तप के लिए निकल जाते हैं।

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नागा संन्यासी की माने तो दिगंबर शब्द दिग् व अम्बर के योग से बना है। दिग् यानी धरती और अम्बर यानी आकाश। आशय कि धरती जिसका बिछौना हो और अम्बर जिसका ओढ़ना।

नागा साधुओं का कहना है कि सालभर दिगम्बर अवस्था में रहना समाज में संभव नहीं है। निरंजनी अखाड़े के अध्यक्ष महंत रवींद्रपुरी जो खुद भी पेशवाई के दौरान नागा रूप धारण करते हैं, कहते हैं कि समाज में आमतौर पर दिगम्बर स्वरूप स्वीकार्य नहीं है।

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नागा संन्यासी बनने के लिए वयस्क होना आवश्यक है। वयस्क होने पर उसे गंगा की शपथ दिलाई जाती है कि वह परिवार में नहीं जाएगा और न ही विवाह करेगा। आपको बता दें, समाज से अलग रहेगा, ईश्वर भक्ति करेगा। खुद का भी पिंडदान कराया जाता है।

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