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खेल-कूद

राजस्थान रॉयल्स के खिलाड़ी चेतन सकारिया के पिता का कोरोना से निधन

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नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में राजस्थान रॉयल्स (RR) की ओर से खेलने वाले के तेज गेंदबाज चेतन सकारिया के पिता कांजीभाई सकारिया का रविवार को निधन हो गया। वह कोरोना से संक्रमित थे। कई दिनों से उनका इलाज चल रहा है। आज अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। इसकी जानकारी राजस्थान रॉयल्स के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से दी गई है।

फ्रेंचाइजी ने लिखा, ‘ बहुत पीड़ा के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि कांजीभाई सकारिया कोरोना से जंग हार गए हैं। हम चेतन सकारिया के संपर्क में हैं और इस कठिन समय में उन्हें और उनके परिवार को हर संभव सहायता प्रदान करेंगे।’

बता दें कि इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 14वें सीजन के दौरान चेतन सकारिया को जब सूचना मिली कि उनके पिता कोरोना से संक्रमित हो गए हैं तो उन्होंने तुरंत अपनी सैलरी पिता के इलाज के लिए भेजी थी। सकारिया ने बताया था कि वह अपने परिवार में अकेले कमाने वाले इंसान हैं और आईपीएल से मिले पैसों की वजह से ही उनके पिता का इलाज संभव हो पाया।

खेल-कूद

हॉकी में ओलंपिक पदक जीतकर बीमार पिता इलाज कराना चाहती हैं सोनीपत की निशा

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नई दिल्ली। टोक्यो ओलंपिक के लिए महिला हॅाकी टीम में चयनित होने वाली सोनीपत की निशा अपने दर्जी पिता का इलाज कराकर उन्हें नया घर देना चाहती है। बीमार पिता की हालत के चलते निशा को हॅाकी छोड़ना पड़ा था।

पिता को लकवा मारते ही निशा के घर की हालत खराब होना शुरू हो गई। तब निशा ने खेलना शुरू ही किया था। लेकिन केवल एक कमाऊ सदस्य होने के कारण निशा व उनकी दो बहनों को काम करना पड़ा।

निशा ने हॅाकी छोड़ दी पर उनकी कोच प्रीतम रानी सिवाच ने उनका साथ न छोड़ते हुए निशा को प्रेरित किया। यह कोच की प्रेरणा और निशा की मेहनत ही है कि वह टोक्यो ओलंपिक मे चयनित हो सकी। निशा बेबाकी से कहती हैं कि वह ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन कर अपने पिता का बेहतर इलाज और घर देना चाहती है।

पिता ने कहां, अब देश का नाम रोशन करो

निशा के पिता दर्जी हैं। उनके लकवाग्रस्त होने के बाद उनका काम-धंधा बंद हो गया। निशा कहती है, उनके मामा ने उनकी बहुत मद्द की और उनके साथ उनकी बहनों ने भी बहुत काम किया।

अब उनकी शादी हो चुकी है और निशा की भी रेलवे में नौकरी लग चुकी हैं। लेकिन माता-पिता अब भी सोनीपत में छोटे से मकान में रहते हैं। इसलिए निशा अपने पिता का इलाज कराकर उन्हें एक नया घर देना चाहती हैं।

निशा बताती है कि सबसे पहले अपने ओलंपिक में चयनित होने की खबर उन्होंने अपनी कोच प्रीतम को दी। उसके बाद अपने पिता सोहराब को। पिता के मुंह से यही निकला कि जिसके लिए तुमनें मेंहनत ही उसका फल तुम्हें मिल गया। अब देश का नाम रोशन करो।

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