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अन्तर्राष्ट्रीय

बांग्लादेश की आजादी के लिए मैंने भी दी थी गिरफ्तारीः पीएम मोदी

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नई दिल्ली। बांग्लादेश की आजादी के 50 साल पूरे होने के मौके पर शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बतौर मुख्य अतिथि दो दिवसीय दौरे पर ढ़ाका पहुंचे। कोरोना काल में पीएम मोदी का यह पहला विदेश दौरा है।

बांग्लादेश यात्रा के पहले दिन पीएम मोदी ने शेख मुजीबुर रहमान को मरणोपरांत गांधी शांति पुरस्कार दिया। बांग्लादेश के संस्थापक कहे जाने वाले मुजीबुर रहमान की बेटी और पीएम शेख हसीना को पीएम नरेंद्र मोदी ने भारत की ओर से यह सम्मान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि आज बांग्लादेश की आजादी के 50 साल पूरे हो रहे हैं और इस मौके पर हमें निमंत्रण मिलना गर्व की बात है।

ढाका में आयोजित एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि बांग्लादेश की आजादी के लिए वह भी संघर्ष में शामिल हुए थे।

उन्होंने कहा कि यह मेरे जीवन के पहले आंदोलनों में से एक था। मेरी उम्र 20-22 साल रही होगी जब मैंने और मेरे कई साथियों ने बांग्लादेश के लोगों की आजादी के लिए सत्याग्रह किया था।

अन्तर्राष्ट्रीय

दुनिया में पहली बार कब बनी थी रोटी, जानकर चकरा जाएगा आपका सिर!

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नई दिल्ली। दुनिया में पहली बार रोटी कब बनी, कहां बनी और कैसे बनी इसे लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं। लेकिन हाल ही में शोधकर्ताओं ने रोटी से जुड़ा नया सच खोज निकाला है।

उत्तर-पूर्वी जॉर्डन में शोधार्थियों को एक ऐसी जगह मिली है जिसे लेकर कहा जा रहा है कि वहां करीब साढ़े चौदह हजार साल पहले फ्लैटब्रेड यानी रोटी पकाई गई थी।

शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि इस जगह पर पत्थर के बने एक चूल्हे में रोटी पकाई गई थी। शोधार्थियों को मौके से वह पत्थर का चूल्हा भी मिला है।

इन अवशेषों से यह पता चलता हैं कि मानव ने कृषि विकास होने से सदियों पहले ही रोटी पकानी शुरू कर दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 4000 साल पहले इंसानों ने खेती करना शुरू किया था लेकिन उससे काफी समय पहले ही पूर्वी भूमध्यसागर में शिकारियों ने रोटियां पकानी शुरू कर दी थीं।

अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि उस समय रोटी बनाने में जंगली अनाजों का इस्तेमाल किया गया होगा। यह रोटी जौ, इंकॉर्न, जई और पानी में उगने वाले एक खास किस्म के पौधे ट्यूबर्स से बनाई गई होगी।

शोध के अनुसार इस रोटी को नॉटफियन संस्कृति के लोगों ने बनाया होगा। ये वे लोग होंगे जो एक जगह ठहरकर जीवन व्यतीत करते होंगे। यह अवशेष ब्लैक डेजर्ट एर्केओलॉजिक साइट पर मिला है।

इस शोध से मिले अवशेषों से यह प्रतीत होता है कि रोटी का इतिहास कृषि विकास से भी काफी पुराना है। शोधार्थी अमाया अरन्ज-ओटेगुई ने बताया, यह संभव है कि रोटी ने पौधों की खेती करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया होगा।

 

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