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अब मायावती ने ब्राह्मणों को लुभाने के लिए चला दांव, कहा- हम भी लगवाएंगे परशुराम की मूर्ति

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लखनऊ। सियासी पार्टियों में इस समय ब्राह्मणो को लुभाने की होड़ लगी हुई है। विकास दुबे और उसके साथियों के एनकाउंटर के बाद ब्राह्मणों का एक धड़ा योगी सरकार से नाराज है। इसी नाराजगी को लुभाने के लिए पहले सपा ने प्रदेश में परशुराम की मूर्ति लगाने का एलान किया तो बसपा कहां पीछे रहने वाली थी। बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि हम समाजवादी पार्टी से ज्यादा परशुराम की मूर्तियां लगवाएंगे।

मायावती ने कहा कि प्रदेश में बसपा की सरकार बनने पर वो ब्राह्मण समाज की आस्था का विशेष ध्यान रखते हुए भगवान परशुराम की मूर्ति लगवाएंगी। इसके अलावा मायावती ने कहा कि कोरोना महामारी के मामले में केंद्र व राज्य सरकारों की कमियों के मद्देनजर बसपा सरकार बनने पर उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज की आस्था और स्वाभिमान के प्रतीक श्री परशुराम और अन्य सभी जातियों व धर्मों में जन्मे महान संतों, गुरुओं और महापुरुषों के नाम पर बड़ी संख्या में आधुनिक अस्पताल और सभी जरूरी सुविधा युक्त कम्यूनिटी सेंटर ठहरने के लिए बनावाए जाएंगे।

उन्होंने आगे कहा कि समाजवादी पार्टी द्वारा श्री परशुराम की ऊंची मूर्ति लगवाने की बात केवल चुनावी स्वार्थ है। ब्राह्मण समाज को बसपा की कथनी और करनी पर पूरा भरोसा है। बसपा सरकार बनने पर ब्राह्मण समाज की इस चाहत के मद्देनजर श्री परशुराम की मूर्ति हर मामले में सपा की तुलना में ज्यादा ही भव्य लगाई जाएगी।

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नेशनल

आईएमए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ केके अग्रवाल का कोरोना से निधन

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नई दिल्ली। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ केके अग्रवाल का सोमवार को कोरोना वायरस की वजह से निधन हो गया। दिल्ली के एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली।

62 वर्षीय केके अग्रवाल पिछले कई दिनों से एम्स में भर्ती थे। उन्हें एक सप्ताह से वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। 2010 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली में की और नागपुर विश्वविद्यालय से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी।

पिछले एक साल से, वह कोविड महामारी पर वीडियो पोस्ट कर रहे थे और बीमारी के विभिन्न पहलुओं और इसके प्रबंधन के बारे में बात कर रहे थे। उनके ट्विटर प्रोफाइल पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा गया, “महामारी के दौरान भी, उन्होंने जनता को शिक्षित करने के लिए निरंतर प्रयास किए। इस दौरान उन्होंने कई वीडियो और शैक्षिक कार्यक्रमों के माध्यम से 10 करोड़ लोगों तक पहुंचने में सक्षम थे और अनगिनत लोगों की जान बचाई। वह चाहते थे कि उनके जीवन का जश्न मनाया जाए और शोक न किया जाए।”

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