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प्रादेशिक

175 बाल गृहों में रह रहे बच्चों को कोरोना से बचाने के लिए कोविड वर्चुअल ग्रुप द्वारा वेबिनार का हुआ आयोजन

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लखनऊ। महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत प्रदेश में संचालित 175 बाल गृहों में रह रहे शून्य से 18 साल के बच्चों को कोरोना से सुरक्षित बनाने को लेकर शनिवार को विभागीय कोविड वर्चुअल ग्रुप के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने गहनता से विचार-विमर्श किया। बच्चों में कोरोना के लक्षणों और बचाव के तरीकों पर विषय विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी। बाल गृहों के कर्मचारियों के क्षमतावर्धन के लिए कोविड वर्चुअल ग्रुप द्वारा आयोजित वेबिनार में सभी ने बाल गृहों की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने की जरूरत पर जोर दिया। सभी का यही कहना था कि बाल गृहों में साफ-सफाई, बच्चों के खानपान और उनकी खास देखभाल की इस वक्त अधिक जरूरत है।

इस अवसर पर निदेशक, महिला कल्याण श्री मनोज कुमार राय ने कहा कि कोविड-19 को देखते हुए बाल गृहों में रह रहे बच्चों को विभिन्न आयु वर्ग में विभाजित कर उनके स्वास्थ्य की देखभाल की जाए। साफ-सफाई के उचित प्रबंध होने चाहिए। यदि किसी भी बच्चे में कोरोना से मिलते-जुलते लक्षण नजर आते हैं तो उनकी तत्काल जांच करायी जाए। बाल गृहों में विशेषज्ञों की राय से जरूरी दवाओं का प्रबंध होना चाहिए। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनाने के लिए उनके खानपान का खास ख्याल रखा जाए।

श्री राय ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 180 बाल गृह संचालित हो रहे हैं, जिनमें शून्य से 18 साल के करीब 7000 बच्चे रह रहे हैं। बच्चों को बेहतर माहौल प्रदान करने के साथ ही उनके स्वास्थ्य की समुचित देखभाल के लिए अधीक्षक, केयर टेकर, काउंसलर और नर्सिंग स्टाफ की तैनात है । कोरोना काल में उनकी सेहत पर अतिरिक्त ध्यान दिए जाने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से वेबिनार का आयोजन किया गया ताकि बाल गृहों के कर्मचारियों का क्षमतावर्धन हो सके और उनको भलीभांति मालूम रहे कि बच्चों को कोविड से सुरक्षित रखने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

वेबिनार में उपस्थित एसजीपीजीआई, लखनऊ की वरिष्ठ कंसलटेंट पेडियाट्रिशन डॉ. पियाली भट्टाचार्य ने कहा कि इस समय बच्चों में कोई भी नए लक्षण नजर आएं तो उनको कोविड के दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है। बच्चों में डायरिया, सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी, आँखे लाल होना या दर्द होना आदि कोरोना के लक्षण हो सकते हैं। इसलिए यदि ऐसे लक्षण नजर आते हैं तो उसे नजरंदाज कतई न करें और तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें और जरूरत पड़े तो कोरोना की जांच कराएँ। उन्होंने कहा कि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, इसलिए उनके खाद्य पदार्थों में हरी साग-सब्जी, मौसमी फल, दूध आदि को जरूर शामिल करें ताकि शरीर में रोग से लड़ने की ताकत पैदा हो सके।
वेबिनार में प्रदेश के समस्त मंडलों के विभागीय अधिकारियों, जिलों के प्रोबेशन अधिकारियों, बाल गृहों के अधीक्षक, केयर टेकर, काउंसलर, नर्सिंग स्टाफ के अलावा मीडिया कर्मी और सेंटर फार एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के प्रतिनिधि शामिल हुए।

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योगी सरकार ने चार वर्षों में दी चार लाख युवाओं को सरकारी नौकरीः डॉ दिनेश शर्मा

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ0 दिनेश शर्मा ने प्रेस प्रतिनिधियों से बात करते हुए कहा कि योगी सरकार ने जो कहा, उसे करके भी दिखाया है।भाजपा के संकल्प पत्र के बारे में उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार झूठी घोषणाओं में यकीन नही करती है बल्कि जो कहती है वह करके दिखाती है।

उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने अपने संकल्प पत्र में जितने वायदे किए सभी को पूरा किया और यह विपक्ष ही नही बल्कि समस्त जनता के सामने है। उन्होंने कहा कि अपने आप को युवाओं का हितैषी बताने वाली पूर्व की सरकारों में भले ही युवाओं के लिए कुछ नहीं किया गया हो लेकिन योगी सरकार ने चार सालों में चार लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का काम किया है। यहां तक की प्रदेश सरकार ने कोरोना काल में लाखों प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने का काम किया।

डॉ0 दिनेश शर्मा ने कहा कि पिछली सरकारों में प्रदेश भर में चीनी मिलों को बेचने का काम किया गया। इससे किसानों का बड़े पैमाने नुकसान हुआ। वहीं, प्रदेश सरकार ने बंद चीनी मिलों को चालू किया। वैश्विक महामारी कोरोना काल की कठिन चुनौतियों के दौरान भी टीकाकरण, टेस्ट, सभी 119 चीनी मिलों के संचलन, गेहूं की रिकॉर्ड खरीद और भुगतान, एथनॉल उत्पादन में भी यूपी देश में नंबर वन बना हुआ है। योगी सरकार में 50 लाख किसानों को ड्रिप स्पिंकलर सिचाई योजना का लाभ दिया गया।

बुंदेलखंड में किसानों के बिजली बिल के फिक्स चार्ज में 50 से 75 प्रतिशत तक छूट दी गई। प्रदेश की 27 से अधिक मंडियों को आधुनिक किसान मंडी के रूप में डेवलप किया जा रहा है। किसानों को तकनीक से जोड़ने के लिए 69 कृषि विज्ञान केन्द्रों के अलावा 20 अन्य कृषि विज्ञान केन्द्र निर्मित कराने का काम योगी सरकार में संभव हो सका है।

डॉ0 दिनेश शर्मा ने कहा कि अपने को युवाओं की हितैषी कहने वाली पूर्व की सरकारें अपने कार्यकाल में युवाओं को रोजगार उपलब्धि कराने में फिसडडी रही है। वहीं, योगी सरकार ने 4 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का काम किया है जबकि दिसम्बर तक 1 लाख और युवाओं को नौकरी देने की योजना है। कोरोना काल के दौरान विभिन्न राज्यों  से 34 लाख से अधिक प्रवासी मजदूर प्रदेश के अंदर आए थे।

इस दौरान सरकार ने प्रवासी मजूदरों के लिए खाने पीने की व्ययवस्था  के साथ इन्हें रोजगार उपलब्ध कराने का बीड़ा उठाया। सरकार की ओर से प्रवासी मजूदरों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए उनकी स्किल मैपिंग कराई ताकि मजूदरों को उनको हुनर के हिसाब से रोजगार उपलब्ध हो सकें। सरकार अब तक 25 लाख से अधिक मजदूरों की स्किल मैपिंग का काम करा चुकी है। सरकार की ओर से प्रवासी श्रमिक राहत पोर्टल बनाया था। इसमें मजूदरों का डाटा उनकी दक्षता के हिसाब से तैयार किया गया है। इससे उनको रोजगार दिलाने में आसानी होगी।

डॉ0 शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बाद से 66,000 करोड़ रुपये के निवेश के 96 प्रस्ताव मिले हैं। यह योगी सरकार की नीतियों से ही संभव हो सका है। इसमें से 16,000 करोड़ रुपये के प्रस्ताव जमा करने वाले 18 निवेशकों को भूमि आवंटित की जा चुकी है। वहीं, 2017 से पहले यूपी में माफिया राज के चलते निवेशक यहां आना नहीं चाहते थे। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के चलते बड़े-बड़े माफिया या तो जेल में है या यूपी छोड़कर चले गए है। जिसकी वजहह से यूपी में तेजी से निवेश बढ़ रहा है।

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