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अन्तर्राष्ट्रीय

फ्रांस में कोरोना ने बरपाया कहर, राष्ट्रपति मैक्रों ने दिया लॉकडाउन का आदेश

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नई दिल्ली। फ्रांस में कोरोना वायरस ने एक बार फिर से कहर बरपाना शुरू कर दिया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इम्मैन्युअल मैक्रों ने बुधवार को देशव्यापी लॉकडाउन लगाने का आदेश दिया और कहा कि स्कूलों को तीन सप्ताह के लिए बंद कर दिया जाए ताकि कोविड-19 संक्रमण की तीसरी लहर को पीछे धकेलने में मदद मिले, नहीं तो तीसरी लहर अस्पतालों पर भी भारी पड़ सकता है।

इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि ‘अगर अभी हमने अभी ठोस कदम नहीं उठाया तो हम कोरोना पर नियंत्रण खो देंगे।’ टेलीविजन के जरिए अपने देश के नागरिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केवल जरूरी सामान की दुकानों को खुलने की इजाजत होगी और लोगों को दफ्तरों की बजाय घर से काम करना होगा।

साथ ही उन्होंने कहा कि इस दौरान सार्वजनिक सभाओं पर पूरी तरह रोक होगी। बिना उचित कारण के अपने घरों से 10 किलोमीटर से अधिक दूर जाने पर भी रोक होगी।

गौरतलब है कि फ्रांस उन देशों में से एक है जो कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां संक्रमण का कुल आंकड़ा 46.46 लाख के पार पहुंच चुका है। वहीं, इस महामारी से मरने वालों की संख्या 95 हजार 502 हो गई है। खबरों के मुताबिक, इस वक्त 5 हजार लोग कोरोना के चलते आईसीयू में भर्ती हैं।

माना जा रहा है कि ब्रिटेन से आया नए वेरिएंट के बाद मामलों में रफ्तार दिखी है। फ्रांस में बीते दिन 29 हजार 575 नए मामले दर्ज हुए हैं। वहीं, 28 मार्च को ये आंकड़ा 41 हजार के पार जा पहुंचा था।

अन्तर्राष्ट्रीय

दुनिया में पहली बार कब बनी थी रोटी, जानकर चकरा जाएगा आपका सिर!

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नई दिल्ली। दुनिया में पहली बार रोटी कब बनी, कहां बनी और कैसे बनी इसे लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं। लेकिन हाल ही में शोधकर्ताओं ने रोटी से जुड़ा नया सच खोज निकाला है।

उत्तर-पूर्वी जॉर्डन में शोधार्थियों को एक ऐसी जगह मिली है जिसे लेकर कहा जा रहा है कि वहां करीब साढ़े चौदह हजार साल पहले फ्लैटब्रेड यानी रोटी पकाई गई थी।

शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि इस जगह पर पत्थर के बने एक चूल्हे में रोटी पकाई गई थी। शोधार्थियों को मौके से वह पत्थर का चूल्हा भी मिला है।

इन अवशेषों से यह पता चलता हैं कि मानव ने कृषि विकास होने से सदियों पहले ही रोटी पकानी शुरू कर दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 4000 साल पहले इंसानों ने खेती करना शुरू किया था लेकिन उससे काफी समय पहले ही पूर्वी भूमध्यसागर में शिकारियों ने रोटियां पकानी शुरू कर दी थीं।

अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि उस समय रोटी बनाने में जंगली अनाजों का इस्तेमाल किया गया होगा। यह रोटी जौ, इंकॉर्न, जई और पानी में उगने वाले एक खास किस्म के पौधे ट्यूबर्स से बनाई गई होगी।

शोध के अनुसार इस रोटी को नॉटफियन संस्कृति के लोगों ने बनाया होगा। ये वे लोग होंगे जो एक जगह ठहरकर जीवन व्यतीत करते होंगे। यह अवशेष ब्लैक डेजर्ट एर्केओलॉजिक साइट पर मिला है।

इस शोध से मिले अवशेषों से यह प्रतीत होता है कि रोटी का इतिहास कृषि विकास से भी काफी पुराना है। शोधार्थी अमाया अरन्ज-ओटेगुई ने बताया, यह संभव है कि रोटी ने पौधों की खेती करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया होगा।

 

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