Connect with us
https://www.aajkikhabar.com/wp-content/uploads/2020/12/Digital-Strip-Ad-1.jpg

मुख्य समाचार

जानिए किन बीमारियों की गिरफ्त में फंस रहे हैं भारतीय

Published

on

पिछले कुछ वर्षों में हमारे देश में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का प्रभाव बढ़ा है। साथ ही डायबिटीज, हृदय रोग, क्षय रोग, मोटापा, तनाव की चपेट में भी लोग बड़ी संख्या में आ रहे हैं। ये बीमारियां बड़ी तादाद में उनकी मौत का कारण बन रही हैं।
ग्रामीण तबके में देश की अधिकतर आबादी उचित खानपान के अभाव में कुपोषण की शिकार है। महिलाओं, बच्चों में कुपोषण का स्तर अधिक देखा गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार प्रति 10 में से सात बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं। वहीं, महिलाओं की 36 प्रतिशत आबादी कुपोषण की शिकार है।

कैंसर

देश में मुंह और गले के कैंसर रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। आलम यह है कि हर वर्ष मुंह और गले के कैंसर से पीड़ित 10 लाख रोगी सामने आ रहे हैं, जिनमें से आधे से अधिक मरीजों की मौत बीमारी की पहचान होने तक हो जाती है। वायस ऑफ टोबैको विक्टिमस (वीओटीवी) ने एशियन पेसिफिक जनरल ऑफ कैंसर प्रिवेंशन द्वारा जारी रिपोर्ट के आधार पर यह खुलासा किया है। करीब 30 साल पहले तक 60 से 70 साल की उम्र में मुंह और गले का कैंसर होता था, लेकिन अब यह उम्र कम होकर 30 से 50 साल तक पहुंच गई है। मुंह के कैंसर के रोगियों की सर्वाधिक संख्या भारत में है।

हर वर्ष मुंह और गले के कैंसर से पीड़ित 10 लाख रोगी सामने आ रहे हैं

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) द्वारा वर्ष 2008 में प्रकाशित अनुमान के मुताबिक, भारत में सिर व गले के कैंसर के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है. इन मामलों में 90 फीसदी कैंसर तंबाकू, शराब व सुपारी के सेवन से होते हैं और इस प्रकार के कैंसर की रोकथाम की जा सकती है।
एशियन पेसिफिक जर्नल ऑफ कैंसर प्रिवेंशन द्वारा 2008 व 2016 में प्रकाशित शोधपत्र के अनुसार, 2001 में पुरुषों में मुंह का कैंसर के मामले 42,725 वहीं 2016 में 65,205 थे, वहीं महिलाओं में 22,080 व 35,088 मामले सामने आए। गले और सांस नली के कैंसर के मामले 2008 व 2016 में पुरुषों में 49,331 और 75,901 जबकि महिलाओं में 9251 तथा 14550 हो गया है।

डायबिटीज

भारत में पिछले पाच वर्षों के दौरान मधुमेह पीड़ितों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

भारत में पिछले पाच वर्षों के दौरान मधुमेह पीड़ितों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। जह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने 21 जुलाई 2017 को लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में दी थी।
उन्होंने बताया था कि अंतराष्ट्रीय मधुमेह संघ (आईडीएफ) के मुताबिक भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या वर्ष 2011, 2013 और 2015 में क्रमश 61.3 मिलियन, 65.1 मिलियन और 69.2 मिलियन थी।

हृदय रोग

आंकड़े बताते हैं कि भारत में हृदय संबंधी बीमारियां अत्यधिक बढ़ती जा रही हैं।

ग्लोबल बोर्ड ऑफ डिजीज (जी.बी.डी.) 2015 के अध्ययन के मुताबिक देश में हृदय रोग के कारण मौत की दर 1,00,000 आबादी में 272 थी। आंकड़े बताते हैं कि भारत में हृदय संबंधी बीमारियां अत्यधिक बढ़ती जा रही हैं।

मोटापा

दुनियाभर में हर साल 20 लाख मोटापे से ग्रस्त लोग अपनी जान खो बैठते है।

दुनिया भर में मोटापा एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। यह न सिर्फ वयस्कों में बल्कि बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहा है। WHO के अनुसार दुनियाभर में 4.2 करोड़ पांच साल के बच्चे मोटापे का शिकार हैं। बच्चों में मोटापे से उन्हें गंभीर रोग जैसे डायबिटीज और दिल संबंधी बीमारियों के होने का ख़तर कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है। दुनियाभर में हर साल 20 लाख मोटापे से ग्रस्त लोग अपनी जान खो बैठते है।
‘पीडियाट्रिक ओबेसिटी’ नामक एक जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक भारत में साल 2025 तक मोटापे से पीड़ित बच्चों की संख्या 1.7 करोड़ पहुंच जाएगी। भारत मोटे बच्चों के मामले में दुनिया के 184 देशों की सूची में दूसरे स्थान पर आ जाएगा जो कि काफी चौका देने वाला है।

तनाव

भारत में डिप्रेशन एक बड़ी बीमारी के रूप में उभर कर सामने आ रहा है। डिप्रेशन गंभीर रोगों और डिस्‍ऑर्डर के ख़तरों को बढ़ाने का काम करता है। इनमें आत्‍महत्‍या की प्रवृत्ति, डायबिटीज और दिल के रोग प्रमुख हैं, जिनकी वजह से दुनिया की ज्‍यादातर आबादी दम तोड़ देती है।

हर 20 लोगों में से एक व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार है।

मुरादाबाद के स्‍टेट केजीके होम्‍योपैथि‍क मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में मनोरोग विभाग के प्रमुख डॉ. एसएस यादव डिप्रेशन को जानलेवा बताते हैं। इस रोग से शरीर के प्रमुख अंग बुरी तरह प्रभावित होते हैं। डॉ. यादव के मुताबिक अस्‍पताल की ओपीडी में रोजाना चार–पांच मरीजों में डिप्रेशन के लक्षण मिल रहे हैं। उन्‍होंने बताया, “डिप्रेशन के मरीजों को सारी दुनिया बेकार लगती है, कुछ अच्‍छा नहीं लगता। लाइफ से सेटिसफाई नहीं रहते। कुछ में तो सुसाइडल बिहैवियर भी देखने को मिलता है। ज्‍यादा उम्‍मीदें पालने वाले लोगों के अरमान पूरे न होना भी डिप्रेशन की बड़ी वजह है।”
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस द्वारा 12 राज्यों में किए गए सर्वे के मुताबिक भारत में हर 20 लोगों में से एक व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार है। डब्‍ल्‍यूएचओ के अनुसार भारत दुनिया के सर्वाधिक डिप्रेस्‍ड देशों की सूची में शामिल है और लगभग 36 प्रतिशत आबादी ने इसका सामना किया है या कर रही है।

कुपोषण

भूखे लोगों की 23 फीसदी आबादी भारत में रहती है।

भारत में कुपोषण भी लगातार बढ़ता जा रहा है। भूमंडलीय भुखमरी पर यूएन की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि भूखे लोगों की 23 फीसदी आबादी भारत में रहती है। “स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रीशन इन द वर्ल्ड, 2017” की रिपोर्ट में बताया गया है कि कुपोषित लोगों की संख्या 2015 में करीब 78 करोड़ थी तो 2016 में यह बढ़कर साढ़े 81 करोड़ हो गयी है।

प्रादेशिक

प्रदेश में अब तक 12,19,409 कोविड मरीज संक्रमणमुक्त हो चुके हैंः नवनीत सहगल

Published

on

लखनऊ। अपर मुख्य सचिव ‘सूचना’ नवनीत सहगल ने बताया कि प्रदेश में विगत 24 घण्टे में प्रदेश में 26,847 नये मामले आये हैं तथा 34,731 कोविड मरीज संक्रमणमुक्त हुए हैं। प्रदेश में अब तक 12,19,409 कोविड मरीज संक्रमणमुक्त हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में एक्टिव केसों की संख्या 2,45,736 है, जो 01 मई के कुल एक्टिव केस 3,01,833 से 60,000 कम है। विगत 24 घण्टे में प्रदेश में 2,23,155 कोविड-19 के टेस्ट किये गये हैं तथा अब तक 4,27,24,205 कोविड-19 के टेस्ट किये जा चुके हैं। जनपदों से आज लगभग 84,000 सैम्पल आरटीपीसीआर के लिए भेजे गये हैं। उन्होंने बताया कि 1,93,426 कोविड मरीज होम आइसोलेशन में हैं तथा 8,759 कोविड मरीज निजी अस्पताल में अपना इलाज करा रहे हैं। प्रदेश में अब तक सर्विलांस टीम के माध्यम से 3,44,35,246 घरों के 16,60,02,220 जनसंख्या का सर्वेक्षण किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 से 44 वर्ष वाले लोगों के साथ-साथ 45 वर्ष से अधिक आयु वालों का वैक्सीनेशन चल रहा है।

अब तक 1,08,55,900 लोगों को वैक्सीन की पहली डोज दी गई तथा पहली डोज वाले लोगों में से 27,31,279 लोगों को वैक्सीन की दूसरी डोज दी गई। इस प्रकार कुल 1,35,87,179 वैक्सीन की डोज लगायी जा चुकी है। प्रदेश में 18 से 44 वर्ष वाले लोगों को कल 15,966 तथा अब तक 1,01,923 लोगों का वैक्सीनेशन किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि कोविड प्रोटोकाल का पालन कराने के लिए अब वैक्सीनेशन सभी आयु वर्गों के लिए आॅनलाइन पंजीकरण आवश्यक कर दिया गया है। सोमवार से प्रदेश के सभी 18 नगर निगमों तथा गौतमबुद्धनगर में भी 18-44 वर्ष के लोगों का टीकाकरण प्रारम्भ हो जायेगा।
श्री सहगल ने बताया कि मुख्यमंत्री जी द्वारा मुरादाबाद तथा बरेली जनपदों का भ्रमण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री जी द्वारा मुरादाबाद में इन्ट्रीग्रेटेड कण्ट्रोल कमाण्ड सेन्टर का निरीक्षण किया गया है। मुख्यमंत्री जी द्वारा कोविड के सम्बंध में जनपदों के अधिकारियों के साथ बैठक भी की गयी है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री जी द्वारा प्रदेश में चलाये जा रहे सर्विलांस के कार्य को स्वयं देखने के लिए मुरादाबाद के गांव में भी गये।
श्री सहगल ने बताया कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में प्रदेश में कोविड संक्रमण को नियंत्रित करने हेतु एग्रेसिव टेस्ट, ट्रैक और ट्रीट की नीति के तहत कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने बताया कि सर्विलान्स के माध्यम से घर घर जा कर लोगों से कोविड के लक्षणों की जानकारी ली जा रही है। सर्विलान्स के माध्यम से अब तक 16.60 करोड़ लोगों तक पहुच कर उनका हाल-चाल जाना गया है। उन्होंने बताया कि सर्विलान्स के साथ-साथ 97 हजार राजस्व गावों में लोगों से सम्पर्क करते हुए कोविड लक्षणयुक्त लोगों की पहचान कर उनका कोविड टेस्ट तथा उन्हें मेडिकल किट प्रदान की जा रही है। गांव में निगरानी समिति के द्वारा गांव में रहने वाले लोगों से सम्पर्क कर कोविड लक्षणों की जानकारी ली जा रही है। कोविड लक्षण मिलने वाले लोगों की आरआरटी टीम द्वारा एन्टीजन कोविड टेस्ट किया जा रहा है।

कल 48,63,298 घरों तक स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची। जिनमें 68,900 लोगों में कोविड के लक्षण पाये गये। इन सभी लोगों के कोविड टेस्ट कराने पर 1210 लोग कोविड संक्रमित पाये गये।
श्री सहगल ने बताया कि एग्रेसिव टेस्ट, ट्रैक और ट्रीट की नीति के कारण एक सप्ताह में कुल एक्टिव केसों में 60 हजार की कमी आयी है, जो प्रदेश के लिए उत्साहवर्द्धन है। इसके साथ-साथ प्रदेश के 24 घण्टे के कोविड मामलों में कोविड से ठीक होने वालों की संख्या अधिक चल रही है। उन्होंने बताया कि आरटीपीसीआर के टेस्ट अधिक से अधिक किये जा रहे हैं। आरटीपीसीआर टेस्ट की संख्या और बढ़ाने के लिए 14 नई मशीने भी क्रय की गयी हैं। इसके साथ-साथ जनपदों द्वारा भेजे जाने वाले आरटीपीसीआर के सैम्पलों के लक्ष्य को भी बढ़ाया गया है। उन्होंने बताया कि अधिक से अधिक टेस्ट करते हुए कोविड संक्रमित लोगों को पहचान कर उनका इलाज किया जा रहा है।
श्री सहगल ने बताया कि प्रदेश में औद्योगिक इकाइयां तेजी से चलायी जा रही हैं। लगभग 08 लाख से अधिक पंजीकृत औद्योगिक इकाइयों द्वारा मजदूरों को काम दिया जा रहा है। इन औद्योगिक इकाइयों में कोविड हेल्प डेस्क बनाये गये हंै। इसके अलावा जिन औद्योगिक संस्थानों में 50 से अधिक कर्मचारी कार्य कर रहे ऐसे औद्योगिक संस्थानों में कोविड केयर सेंटर बनाया गया है। जिससे वहां पर कार्य करने वाले कर्मचारियों को समय से इलाज मिल सके।
श्री सहगल ने बताया कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों के लिए कृतसंकल्प है और किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उनकी फसल को खरीदे जाने की प्रक्रिया कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए तेजी से चल रही है। 01 अप्रैल से 15 जून, 2021 तक गेहू खरीद का अभियान जारी रहेगा। गेहू क्रय अभियान में अब तक 1873429.29 मी0 टन गेहूं खरीदा गया है।
श्री सहगल ने लोगों से अपील की है कि मास्क का प्रयोग करे, सैनेटाइजर व साबुन से हाथ धोते रहे तथा भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।

Continue Reading

Trending