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अगर हो जाता ऑपरेशन सनडाउन, तो न होता ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ और न जाती इंदिरा गांधी की जान

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अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में 6 जून 1984 को भारतीय सेना की कार्रवाई को ऑपरेशन ब्लूस्टार नाम दिया गया था। दरअसल, स्वर्ण मंदिर के अंदर छिपे खालिस्तान समर्थक आतंकियों को बाहर निकालने के लिए भारतीय सेना स्वर्ण मंदिर में दाखिल हुई थी। ऑपरेशन के दौरान मरने वालों में जरनैल सिंह भिंडरावाले भी शामिल था, जिसकी अगुवाई में सिखों के लिए अलग खालिस्तान की मांग हो रही थी।

ऑपरेशन ब्लूस्टार के विरोध में इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई, ऐसा न होता अगर इंदिरा गांधी ऑपरेशन सनडाउन को मंजूरी दे देतीं, तो न ऑपरेशन ब्लू स्टार होता और न ही इंदिरा गांधी की जान जाती।

कहा जाता है कि इंदिरा की हत्या उस घटना के प्रतिशोध में की गई, जो उन्होंने सिखों के सबसे पवित्र स्थल स्वर्ण मंदिर में ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के रूप में कराई थी। जरनैल सिंह भिंडरवाले पर कार्रवाई के लिए सेना को स्वर्ण मंदिर में घुसने की अनुमति दी गई थी।

लगभग डेढ़ दिन तक चले देश के इस युद्ध में स्वर्ण मंदिर के पवित्र चबूतरे लोगों के खून से लाल हो गए थे। इस युद्ध में भिंडरवाला तो मारा गया लेकिन इसकी बड़ी कीमत देश और सेना को चुकानी पड़ी। हमले में 83 के करीब सैनिक जिनमें तीन अफसर भी थे और 492 आम नागरिक मारे गए। ऑपरेशन खत्म हुआ तो स्वर्ण मंदिर के हर गलियारे में लाशों के ढेर पड़े थे।

7 जून 1984 की सुबह हर तरफ मौत का मंजर था। इतिहास में स्वर्ण मंदिर में चले ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है और न जाने कितने पन्ने इस मनहूस ऑपरेशन के नाम पर स्याह हो चुके हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऑपरेशन ब्लू स्टार टल सकता था? और ऐसा होता तो शायद इंदिरा गांधी भी आज हमारे बीच हो सकती थीं।

असल में पंजाब में लगातार बढ़ रहे आतंकवाद और भिंडरवाले के देश विरोधी बयानों ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को चिंतित कर दिया था। इसी बीच 5 अक्टूबर, 1983 को सिख उग्रवादियों ने कपूरथला से जालंधर जा रही बस को रोक लिया। इसके बाद बस में सवार हिंदू सवारियों को चुन चुन कर गोलियों मारी गईं। इस घटना से इंदिरा गांधी गुस्से से भर उठीं।

घटना के अगले ही दिन उन्होंने पंजाब में कांग्रेस के मुख्यमंत्री दरबारा सिंह की सरकार को भंग करके वहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद इंदिरा गांधी ने भिंडरवाले और उसके साथियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का मूड़ बना लिया। उन्होंने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं के साथ चर्चा के दौरान इस पर सहमति बनी।

स्वर्ण मंदिर को भिंडरवाला समर्थकों से खाली कराने के लिए सेना की कार्रवाई की जाए। इसके लिए आधी रात में ऑपरेशन चलाया जाए। शुरूआती ना नुकुर के बाद इंदिरा भी इस ऑपरेशन के लिए मान गई, जिसका नाम रखा गया ‘ऑपरेशन सन डाउन’। सरकार की तैयारियां पूरी थी और सेना की भी।

‘ऑपरेशन सनडाउन’ को ऑपरेशन ब्लूस्टार के मुकाबले कम जोखिम भरा और आसान माना गया था। जैसे ही ऑपरेशन को शुरू करने का वक्त आया इंदिरा ने पूछा कि ऑपरेशन में कितने लोगों की जान जा सकती है, जिसके जवाब में बताया गया 30-40।

इंदिरा ने तुरंत इस अभियान के लिए मना कर दिया। वो नहीं चाहती थीं कि सिखों से सबसे पवित्र धर्मस्थल में कोई खून खराबा हो। कहा ये भी जाता है कि  राजीव गांधी भी इस पक्ष में नहीं थे कि स्वर्ण मंदिर पर सेना से हमला करवाया जाए। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था, इसलिए मात्र 30-40 लोगों की मौत की आशंका के चलते ऑपरेशन सन डाउन से इंकार करने वाली इंदिरा गांधी साढ़े पांच सौ से ज्यादा लोगों की मौत की गवाह बनीं।

असल में इंदिरा ने ‘ऑपरेशन ब्लूस्टार’ को भी सेनाध्यक्ष जनरल आरएस वैध के उस आश्वासन के बाद हरी झंडी दी थी, जिसमें उन्होंने सैनिक कार्रवाई में किसी के न मारे जाने की बात कही थी। कहा भी जाता है कि इस मुद्दे पर अधिकारियों ने इंदिरा गांधी को अंधेरे में रखा, जिसकी बहुत बड़ी कीमत देश को चुकानी पड़ी और इंदिरा गांधी के नाम पर भी धब्बा लगा।

ऑपरेशन ब्लू स्टार के पांच महीने बाद 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उन्हीं के सिख अंगरक्षकों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद देशभर में बड़े पैमाने पर सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे।

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बीजेपी सांसद गौतम गंभीर ने राम मंदिर निर्माण के लिए दान किए 1 करोड़ रु

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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी और बीजेपी सांसद गौतम गंभीर ने राम मंदिर निर्माण के लिए दान दिया है। गौतम गंभीर ने गुरुवार को राम मंदिर निर्माण के लिए 1 करोड़ रुपये की राशि दी है। इस मौके पर गौतम गंभीर ने कहा कि अंतत: एक पुराना मुद्दा खत्म हो गया है। इससे एकता और शांति का मार्ग प्रशस्त होगा। मैंने और मेरे परिवार ने एक छोटा से योगदान दिया है।

उन्होंने ये चेक दिल्ली में स्वामी अवधेशानंद को सौंपा। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह केवल एक मंदिर ही नहीं बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रतीक है और इस शुभ काम में अपना सहयोग दे पाना मेरे लिए बहुत ही सौभाग्य की बात है। एक शानदार राम मंदिर सभी भारतीयों का सपना रहा है। लंबे समय से अटके हुए इस मुद्दे का अब ख़त्म किया गया है।

गौरतलब है कि राम मंदिर के ट्रस्ट और विश्व हिन्दू परिषद की ओर से देशभर से चंदा इकट्ठा करने का अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत करीब पांच लाख परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य है जिससे ज्यादा से ज्यादा राशि एकत्रित की जा सके।

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