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खेल-कूद

Ind vs Pak U19: वो तीन फोटोज जिन्होंने जीत लिए करोड़ों दिल

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क्राइस्टचर्च। भारत ने मंगलवार को हेगले ओवल मैदान पर खेले गए सेमीफाइनल मैच में पाकिस्तान को 203 रनों से मात देते हुए आईसीसी अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में जगह बना ली है।

भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए मैन ऑफ द मैच शुभमन गिल के नाबाद 102 रनों के दम पर पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवरों में नौ विकेट के नुकसान पर 272 रन बना लिए हैं। इस स्कोर को पाकिस्तान हासिल नहीं कर पाई और 29.3 ओवरों में 69 रनों पर ढेर हो गई। भारत की तरफ से सबसे ज्यादा चार विकेट ईशान पोरेल ने लिए।

यह पाकिस्तान का इस टूर्नामेंट में सबसे कम स्कोर है। पाकिस्तान के सिर्फ तीन बल्लेबाज ही दहाई का आंकड़ा छू सके। उसके लिए सबसे ज्यादा 18 रन रोहेल नजीर ने बनाए। साद खान ने 15 और मुहम्मद मूसा ने 11 रनों का योगदान दिया।

इस बीच सोशल मीडिया पर इस मैच की कुछ फोटोज वायरल हो रही हैं जिन्हे काफी पसंद किया रहा है। पहली फोटो में पाकिस्तान का एक खिलाड़ी भारतीय बल्लेबाज शुभमन गिल के जूते के फीते बांधते दिख रहा है। जिस वक्त की यह तस्वीर है उस वक्त शुभमन 93 के निजी स्कोर पर थे, बावजूद इसके पाकिस्तान के खिलाड़ी द्वारा दिखाई गई खेल भावना लोगों को पसंद आई।

ऐसा ही एक पल पाकिस्तान की बैटिंग के वक्त भी आया। इसमें भारतीय खिलाड़ी पाकिस्तान के खिलाड़ी के फीते बांध रहा था। उस वक्त जरयाब और रोहिल बैटिंग कर रहे थे। तीसरी जिस फोटो का जिक्र हो रहा है वह भारत की पारी खत्म होने के बाद की है। उसमें पाकिस्तानी खिलाड़ी शुभमन को उनके शतक के लिए बधाई दे रहे हैं।

खेल-कूद

हॉकी में ओलंपिक पदक जीतकर बीमार पिता इलाज कराना चाहती हैं सोनीपत की निशा

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नई दिल्ली। टोक्यो ओलंपिक के लिए महिला हॅाकी टीम में चयनित होने वाली सोनीपत की निशा अपने दर्जी पिता का इलाज कराकर उन्हें नया घर देना चाहती है। बीमार पिता की हालत के चलते निशा को हॅाकी छोड़ना पड़ा था।

पिता को लकवा मारते ही निशा के घर की हालत खराब होना शुरू हो गई। तब निशा ने खेलना शुरू ही किया था। लेकिन केवल एक कमाऊ सदस्य होने के कारण निशा व उनकी दो बहनों को काम करना पड़ा।

निशा ने हॅाकी छोड़ दी पर उनकी कोच प्रीतम रानी सिवाच ने उनका साथ न छोड़ते हुए निशा को प्रेरित किया। यह कोच की प्रेरणा और निशा की मेहनत ही है कि वह टोक्यो ओलंपिक मे चयनित हो सकी। निशा बेबाकी से कहती हैं कि वह ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन कर अपने पिता का बेहतर इलाज और घर देना चाहती है।

पिता ने कहां, अब देश का नाम रोशन करो

निशा के पिता दर्जी हैं। उनके लकवाग्रस्त होने के बाद उनका काम-धंधा बंद हो गया। निशा कहती है, उनके मामा ने उनकी बहुत मद्द की और उनके साथ उनकी बहनों ने भी बहुत काम किया।

अब उनकी शादी हो चुकी है और निशा की भी रेलवे में नौकरी लग चुकी हैं। लेकिन माता-पिता अब भी सोनीपत में छोटे से मकान में रहते हैं। इसलिए निशा अपने पिता का इलाज कराकर उन्हें एक नया घर देना चाहती हैं।

निशा बताती है कि सबसे पहले अपने ओलंपिक में चयनित होने की खबर उन्होंने अपनी कोच प्रीतम को दी। उसके बाद अपने पिता सोहराब को। पिता के मुंह से यही निकला कि जिसके लिए तुमनें मेंहनत ही उसका फल तुम्हें मिल गया। अब देश का नाम रोशन करो।

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