Connect with us
https://www.aajkikhabar.com/wp-content/uploads/2020/12/Digital-Strip-Ad-1.jpg

आध्यात्म

यहां दीपावली पर नहीं पूजी जाती मां लक्ष्मी…..

Published

on

आज बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक ‘दीपावली’ का त्यौहार है। छोटी-छोटी बस्तियों से लेकर हर गली-कूचे की गलियां दीवाली के प्रकाश से गुलजार है।

आज के दिन हर घरों में खासतौर से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का प्रावधान होता है लेकिन क्या आपको पता है देश की एक ऐसी भी जगह है जहां दीपावली के दिन लोग मां लक्ष्मी की जगह मां काली की पूजा करने को ज्यादा शुभ मानते है।

Related image

जी हां। पश्चिम बंगाल और बंगाली समुदाय इस दिन मां काली की पूजा करते है ये लोग इस पूजा को दीपावली के दिन यानी अमावस्या की अर्धरात्रि में करते है।

यहाँ का ऐसा मानना है कि एक अमावस्या में मां दुर्गा का आगमन होता है. जिसे हम शारदीय नवरात्र के तौर पर जानते हैं इसलिए ठीक 15 दिन बाद दूसरी अमावस्या में मां काली की पूजा करने की प्रथा बंगाल में रहती है।

Image result for maa kaali

हालांकि बाकी जगह जैसे मां लक्ष्मी की पूजा बड़े ही धूम-धाम से की जाती है। इसकी जगह ये लोग सिर्फ मां लक्ष्मी की प्रतिमा अपने घरों में स्थापित कर देते है।

Image result for maa kaali

इस विधि से करते है काली मां की पूजा-

पूजा में माता को विशेष रूप से 108 गुड़हल के फूल, 108 बेलपत्र एवं माला, 108 मिट्टी के दीपक और 108 दुर्वा चढ़ाने की परंपरा है।

Image result for maa kaali

साथ ही मौसमी फल, मिठाई, खिचड़ी, खीर, तली हुई सब्जी तथा अन्य व्यंजनों का भी भोग माता को चढ़ाया जाता है।तड़के 4 बजे तक चलने वाली इस पूजा की विधि में होम-हवन व पुष्पांजलि का समावेश होता है। इस मौके पर अधिकांश महिला व पुरुष सुबह से उपवास रखकर रात्रि में माता को पुष्पांजलि अर्पित करते हैं।

#diwali #maalaxmi #rituals #myths

आध्यात्म

भगवान विष्णु के ये दो अवतार आज भी हैं धरती पर जीवित, जानकर दंग रह जाएंगे आप

Published

on

By

श्रीमद्भागवत के अनुसार भगवान विष्णु ने अब तक 23 अवतार लिए हैं इनमें जिन 10 अवतारों के बारे में हम जानते हैं वो भगवान विष्णु के मुख्य अवतार माने जाते हैं।

भगवान विष्णु के 23 अवतार तो अब तक पृथ्वी पर अवतरित हो चुके हैं, जबकि उनका 24वां अवतार ‘कल्कि अवतार’ के रूप में होना बाकी है। पुराणों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के शंभल नामक स्थान पर विष्णुयशा नामक तपस्वी ब्राह्मण के घर भगवान कल्कि पुत्र रूप में जन्म लेंगे और देवदत्त नामक घोड़े पर सवार होकर संसार से पापियों का विनाश करेंगे और पुन: धर्म की स्थापना करेंगे।

संस्कृत का एक श्लोक है, “अश्वत्थामा बलिव्यासो हनूमांश्च विभीषिण:। कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:।। सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेययाष्टमम्। जीवेद्वर्षशतं सोपिसर्वव्याधि विवर्जित:।।” इसका अर्थ ये है कि अश्वत्थामा, बलि, महर्षि वेदव्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और ऋषि मार्कण्डेय ये आठ लोग संसार में अमर हैं।

हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के दो अवतार धरती पर आज भी जीवित हैं। श्रीमद्भागवत के अनुसार, महर्षि वेदव्यास भगवान विष्णु के 19वें अवतार हैं। वे महाज्ञानी महर्षि पराशर के घर पुत्र के रूप में प्रकट हुए थे। इन्होंने ही मनुष्यों की आयु और शक्ति को देखते हुए वेदों के विभाग किए थे, इसलिए इन्हें वेदव्यास कहा जाता है। पांडव महर्षि वेदव्यास की सलाह पर स्वर्ग की यात्रा की कोशिश की थी।

भगवान विष्णु का दूसरा अवतार जिसे आज भी धरती पर जीवित माना जाता है वो हैं परशुराम। परशुराम विष्णु जी के 18वें अवतार हैं।

इन्हें भगवान विष्णु का 18वां अवतार माना जाता है। अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए परशुराम ने 21 बार धरती से क्षत्रिय को समाप्त कर दिया था।

#lordvishnu #vishnu #god #hindu

Continue Reading

Trending