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सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर रंजीत सिन्हा की कोरोना से मौत, बीते दिन रिपोर्ट आई थी पॉजिटिव

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नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा का कोरोना वायरस की वजह से निधन हो गया है। शुक्रवार की सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। अधिकारियों के मुताबिक कोविड संक्रमण की वजह से उनकी जान चली गई। वे 68 साल के थे।

अपने करियर में सिन्हा ने सीबीआई डायरेक्टर, आईटीबीपी डीजी जैसे कई अहम पदों की जिम्मेदारी संभाली थी। रंजीत सिंह 1974 बैच के आईपीएस ऑफिसर थे। सीबीआई के महानिदेशक का पद संभालने से पहले वह भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के निदशक के पद पर थे।

22 नवम्बर 2012 को उन्हें दो सालों के लिए सीबीआई के निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था। इससे पहले सिंह रेलवे सुरक्षा बल का नेतृत्व और पटना और दिल्ली सीबीआई में वरिष्ठ पदों पर कार्य कर चुके थे।

रंजीत सिन्हा पर आरोप लगे थे कि उन्होंने सीबीआई डायरेक्टर के पद पर रहते हुए कोयला आवंटन घोटाले की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी।

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सीएम योगी का निर्देश, संक्रमितों की ट्रेसिंग के साथ जांच का दायरा बढ़ाया जाए

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने होम आइसोलेट मरीजों से निरंतर संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने संक्रमितों की ट्रेसिंग के साथ जांच का दायरा बढ़ाने को कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सब लोगों को कोरोना महामारी से सामूहिक रूप से लड़ना होगा। कोई भी ऐसी बात न कहें, जिससे हेल्थ वर्कर्स या फिर कोरोना वॉरियर्स का मनोबल कमजोर हो। उन्होंने कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए अस्पतालों में जीवनरक्षक संसाधन दोगुने करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि अनावश्यक घर से बाहर न निकलें। घर के बाहर निकलें तो मास्क जरूर पहनें, दो गज की दूरी का पालन जरूर करें। हर व्यक्ति जब इन कोविड प्रोटोकॉल का पालन करेगा तो यह कार्य एक-एक अमूल्य जीवन को बचाने में बहुत निर्णायक साबित होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, मेरी सबसे अपील होगी कि आप जागरूकता कार्यक्रम का हिस्सा बनें। दूसरों को जागरूक करके कोविड के खिलाफ देश की इस लड़ाई को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने में योगदान दें। इस महामारी के खिलाफ हमें सामूहिक रूप से लड़ना होगा। कोई भी ऐसी बात न कहें, जो हेल्थ वर्कर्स का मनोबल तोड़े एवं संक्रमण की चपेट में आ चुके लोगों को हतोत्साहित करे। कोविड-19 एक महामारी है, इसे सामान्य फ्लू मानने की भूल नहीं करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि बीमारी में बचाव सर्वोत्तम उपाय है लेकिन अगर बीमारी हो जाती है, तो इसे छिपाने की नहीं बल्कि तत्काल उसके उपचार की आवश्यकता है। मेरी आप सब लोगों से अपील होगी कि लोगों को जागरूक करें कि बीमारी को छिपाने के बजाय तत्काल टेस्ट करवा कर उसका उपचार शुरू करें। फर्स्ट वेव के समय संक्रमण इतना तीव्र नहीं था। जो L1, L2, L3 हॉस्पिटल बनाए गए थे, उसमें L1 हॉस्पिटल में ही अधिकतर लोग ठीक हो गए थे। ऑक्सीजन की आवश्यकता इतनी ज्यादा नहीं थी। लेकिन दूसरी लहर में तेजी से ऑक्सीजन की मांग उठी।

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