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अन्तर्राष्ट्रीय

आ गई कोरोना की एक और वैक्सीन, अमेरिका में मिला इमरजेंसी अप्रूवल

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नई दिल्ली। अमेरिका ने कोरोना के खिलाफ जंग तेज कर दी है। इसी कड़ी में शनिवार को जॉनसन एंड जॉनसन की कोरोना वैक्सीन ‘जैनसेन’ को इमरजेंसी अप्रूवल दे दिया गया।

मंजूरी मिलने के बाद अमेरिका में यह तीसरी वैक्सीन है जिसे कोविड-19 के खिलाफ इस्तेमाल किया जाएगा। इससे पहले मॉडर्ना और फाइजर को भी इमरजेंसी अप्रूवल मिल चुका है।

CNN के मुताबिक, यह अमेरिका की पहली सिंगल डोज वैक्सीन है। व्हाइट हाउस के सीनियर ऑफिसर एंडी स्लाविट ने सोशल मीडिया पर कहा कि तीसरी सेफ और इफेक्टिव वैक्सीन का आना बहुत अच्छी खबर है।

बता दें कि इस वैक्सीन का ट्रायल अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के 44 हजार से ज्यादा लोगों पर किया गया था। FDA के मुताबिक, यह वैक्सीन कोरोना के मॉडरेट और क्रिटिकल मरीजों को दी गई। इस दौरान यह 66.1% इफेक्टिव रही।

 

अन्तर्राष्ट्रीय

दुनिया में पहली बार कब बनी थी रोटी, जानकर चकरा जाएगा आपका सिर!

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नई दिल्ली। दुनिया में पहली बार रोटी कब बनी, कहां बनी और कैसे बनी इसे लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं। लेकिन हाल ही में शोधकर्ताओं ने रोटी से जुड़ा नया सच खोज निकाला है।

उत्तर-पूर्वी जॉर्डन में शोधार्थियों को एक ऐसी जगह मिली है जिसे लेकर कहा जा रहा है कि वहां करीब साढ़े चौदह हजार साल पहले फ्लैटब्रेड यानी रोटी पकाई गई थी।

शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि इस जगह पर पत्थर के बने एक चूल्हे में रोटी पकाई गई थी। शोधार्थियों को मौके से वह पत्थर का चूल्हा भी मिला है।

इन अवशेषों से यह पता चलता हैं कि मानव ने कृषि विकास होने से सदियों पहले ही रोटी पकानी शुरू कर दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 4000 साल पहले इंसानों ने खेती करना शुरू किया था लेकिन उससे काफी समय पहले ही पूर्वी भूमध्यसागर में शिकारियों ने रोटियां पकानी शुरू कर दी थीं।

अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि उस समय रोटी बनाने में जंगली अनाजों का इस्तेमाल किया गया होगा। यह रोटी जौ, इंकॉर्न, जई और पानी में उगने वाले एक खास किस्म के पौधे ट्यूबर्स से बनाई गई होगी।

शोध के अनुसार इस रोटी को नॉटफियन संस्कृति के लोगों ने बनाया होगा। ये वे लोग होंगे जो एक जगह ठहरकर जीवन व्यतीत करते होंगे। यह अवशेष ब्लैक डेजर्ट एर्केओलॉजिक साइट पर मिला है।

इस शोध से मिले अवशेषों से यह प्रतीत होता है कि रोटी का इतिहास कृषि विकास से भी काफी पुराना है। शोधार्थी अमाया अरन्ज-ओटेगुई ने बताया, यह संभव है कि रोटी ने पौधों की खेती करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया होगा।

 

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