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अन्तर्राष्ट्रीय

कोरोना पॉजिटिव शख्स घर के कितने लोगों को कर सकता है संक्रमित, स्टडी में हुआ खुलासा

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस को लेकर अभी तक पूरी दुनिया में सैड़कों स्टडी हो चुकी है। इन अध्ययनों के आधार पर अब तक कोविड-19 के खिलाफ जंग लड़ने में वैज्ञानिकों और डॉकटरों को काफी मदद मिली है।

अब इस वायरस को लेकर एक ताजा अध्ययन सामने आया है। ताजा स्टडी के मुताबिक कोरोना पॉजिटिव शख्स से परिवार के अन्य सदस्यों में वायरस पहुंचे की संभावना काफी कम होती है।

ताजा अध्य्यन के मुताबिक 10 में से एक संक्रमित व्यक्ति ही अपने घर के अन्य लोगों को पॉजिटिव कर सकता है। ताजा स्टडी यूएस के शोधकर्ताओं ने की है।

शोधकर्ताओं ने बोस्टन में 7 हजार घरों में रह रहे 25 हजार लोगों पर 4 मार्च से 17 के बीच यह स्टडी की है। इस दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि इन घरों में 7,262 लोग कोरोना से पीड़ित थे लेकिन इन्होंने केवल 1,809 लोगों को ही संक्रमित किया।

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दुनिया में पहली बार कब बनी थी रोटी, जानकर चकरा जाएगा आपका सिर!

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नई दिल्ली। दुनिया में पहली बार रोटी कब बनी, कहां बनी और कैसे बनी इसे लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं। लेकिन हाल ही में शोधकर्ताओं ने रोटी से जुड़ा नया सच खोज निकाला है।

उत्तर-पूर्वी जॉर्डन में शोधार्थियों को एक ऐसी जगह मिली है जिसे लेकर कहा जा रहा है कि वहां करीब साढ़े चौदह हजार साल पहले फ्लैटब्रेड यानी रोटी पकाई गई थी।

शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि इस जगह पर पत्थर के बने एक चूल्हे में रोटी पकाई गई थी। शोधार्थियों को मौके से वह पत्थर का चूल्हा भी मिला है।

इन अवशेषों से यह पता चलता हैं कि मानव ने कृषि विकास होने से सदियों पहले ही रोटी पकानी शुरू कर दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 4000 साल पहले इंसानों ने खेती करना शुरू किया था लेकिन उससे काफी समय पहले ही पूर्वी भूमध्यसागर में शिकारियों ने रोटियां पकानी शुरू कर दी थीं।

अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि उस समय रोटी बनाने में जंगली अनाजों का इस्तेमाल किया गया होगा। यह रोटी जौ, इंकॉर्न, जई और पानी में उगने वाले एक खास किस्म के पौधे ट्यूबर्स से बनाई गई होगी।

शोध के अनुसार इस रोटी को नॉटफियन संस्कृति के लोगों ने बनाया होगा। ये वे लोग होंगे जो एक जगह ठहरकर जीवन व्यतीत करते होंगे। यह अवशेष ब्लैक डेजर्ट एर्केओलॉजिक साइट पर मिला है।

इस शोध से मिले अवशेषों से यह प्रतीत होता है कि रोटी का इतिहास कृषि विकास से भी काफी पुराना है। शोधार्थी अमाया अरन्ज-ओटेगुई ने बताया, यह संभव है कि रोटी ने पौधों की खेती करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया होगा।

 

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