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भारत में लगातार घट रहे कोरोना के मामले, 24 घंटों में आए 31,521 केस

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नई दिल्ली। देश में पिछले कुछ दिनों से कोरोना के मामलों में कमी देखने को मिल रही है। पिछले 24 घंटों की बात करें को देश में कोरोना के 31 हजार 521 मामले आए। वहीं 412 लोग कोरोना से जिंदगी की जंग हार गए। अच्छी बात ये है कि बीते दिन 37,725 मरीज कोरोना से ठीक भी हुए हैं। हालांकि मरने वालों की तादाद अभी भी सरकार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है, क्‍योंकि पिछले 24 घंटे में कोरोना से 412 लोगों की मौतें हुई।

स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत में कोरोना के कुल मामले बढ़कर 97 लाख 67 हजार 371 हो गए हैं। इनमें से अब तक एक लाख 41 हजार 772 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। कुल एक्टिव केस घटकर तीन लाख 72 हजार हो गए. अब तक कुल 92 लाख 53 हजार लोग कोरोना को मात देकर ठीक हो चुके हैं।

लगातार चौथे दिन भारत का सक्रिय केसलोड 4 लाख से नीचे रहा। सक्रिय मामलों की संख्या में कुल केसलोड का 3.81 प्रतिशत शामिल है।
भारत की कोविड-19 टैली ने 7 अगस्त को दो मिलियन, 23 अगस्त को तीन मिलियन और 5 सितंबर को चार मिलियन का आंकड़ा पार किया था। यह 16 सितंबर को पांच मिलियन, 28 सितंबर को छह मिलियन, 11 अक्टूबर को सात मिलियन, 29 अक्‍टूबर को आठ लाख, और 20 नवंबर को नौ लाख का आंकड़ा पार कर गया था।

नेशनल

आईएमए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ केके अग्रवाल का कोरोना से निधन

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नई दिल्ली। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ केके अग्रवाल का सोमवार को कोरोना वायरस की वजह से निधन हो गया। दिल्ली के एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली।

62 वर्षीय केके अग्रवाल पिछले कई दिनों से एम्स में भर्ती थे। उन्हें एक सप्ताह से वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। 2010 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली में की और नागपुर विश्वविद्यालय से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी।

पिछले एक साल से, वह कोविड महामारी पर वीडियो पोस्ट कर रहे थे और बीमारी के विभिन्न पहलुओं और इसके प्रबंधन के बारे में बात कर रहे थे। उनके ट्विटर प्रोफाइल पर पोस्ट किए गए एक बयान में कहा गया, “महामारी के दौरान भी, उन्होंने जनता को शिक्षित करने के लिए निरंतर प्रयास किए। इस दौरान उन्होंने कई वीडियो और शैक्षिक कार्यक्रमों के माध्यम से 10 करोड़ लोगों तक पहुंचने में सक्षम थे और अनगिनत लोगों की जान बचाई। वह चाहते थे कि उनके जीवन का जश्न मनाया जाए और शोक न किया जाए।”

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