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अन्तर्राष्ट्रीय

कोरोना को मात देने के लिए जल्द आ सकती है एक और वैक्सीन, विशेषज्ञों के पैनल से मिली मंजूरी

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस को मात देने के लिए एक और वैक्सीन जल्द ही आ सकती है। दरअसल, जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी की कोरोना वैक्सीन को अमेरिका में विशेषज्ञों के एक पैनल ने मंजूरी दे दी।

वैक्सीनों और संबंधित जैविक उत्पादों की सलाहकार समिति ने वैक्सीन की सिफारिश करने के लिए शुक्रवार को एक लाइव स्ट्रीम इवेंट के दौरान सर्वसम्मति से मतदान किया।

अब इसके बाद इस वैक्सीन को अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) से अनुमोदन की जरुरत है जिसके बाद इसका वितरण हो सकेगा। एफडीए की मंजूरी के बाद जॉनसन एंड जॉनसन फाइजर और मॉडर्ना के बाद तीसरी दवा कंपनी बन जाएगी, जिसके टीके कोरोना वायरस से निजात दिलाने के लिए अमेरिका में लगाए जाएंगे।

बता दें कि मौजूदा समय में अमेरिका सबसे ज्यादा कोरोना वायरस से प्रभावित है यहां अब तक 5 लाख से ज्यादा लोगों की कोविड-19 से मौत हो चुकी है।

अन्तर्राष्ट्रीय

दुनिया में पहली बार कब बनी थी रोटी, जानकर चकरा जाएगा आपका सिर!

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नई दिल्ली। दुनिया में पहली बार रोटी कब बनी, कहां बनी और कैसे बनी इसे लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं। लेकिन हाल ही में शोधकर्ताओं ने रोटी से जुड़ा नया सच खोज निकाला है।

उत्तर-पूर्वी जॉर्डन में शोधार्थियों को एक ऐसी जगह मिली है जिसे लेकर कहा जा रहा है कि वहां करीब साढ़े चौदह हजार साल पहले फ्लैटब्रेड यानी रोटी पकाई गई थी।

शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि इस जगह पर पत्थर के बने एक चूल्हे में रोटी पकाई गई थी। शोधार्थियों को मौके से वह पत्थर का चूल्हा भी मिला है।

इन अवशेषों से यह पता चलता हैं कि मानव ने कृषि विकास होने से सदियों पहले ही रोटी पकानी शुरू कर दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 4000 साल पहले इंसानों ने खेती करना शुरू किया था लेकिन उससे काफी समय पहले ही पूर्वी भूमध्यसागर में शिकारियों ने रोटियां पकानी शुरू कर दी थीं।

अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि उस समय रोटी बनाने में जंगली अनाजों का इस्तेमाल किया गया होगा। यह रोटी जौ, इंकॉर्न, जई और पानी में उगने वाले एक खास किस्म के पौधे ट्यूबर्स से बनाई गई होगी।

शोध के अनुसार इस रोटी को नॉटफियन संस्कृति के लोगों ने बनाया होगा। ये वे लोग होंगे जो एक जगह ठहरकर जीवन व्यतीत करते होंगे। यह अवशेष ब्लैक डेजर्ट एर्केओलॉजिक साइट पर मिला है।

इस शोध से मिले अवशेषों से यह प्रतीत होता है कि रोटी का इतिहास कृषि विकास से भी काफी पुराना है। शोधार्थी अमाया अरन्ज-ओटेगुई ने बताया, यह संभव है कि रोटी ने पौधों की खेती करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया होगा।

 

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