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खेल-कूद

भारतीय क्रिकेटर भुनेश्वर कुमार के पिता का निधन

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नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार के पिता का गुरुवार को निधन हो गया। उन्होंने अपने गंगानगर सी- पॉकेट आवास पर अंतिम सांस ली। भुवनेश्वर कुमार के पिता पुलिस विभाग में थे और उन्होंने वीआरएस ले लिया था। वे मेरठ और मुजफ्फरनगर में तैनात रहे।

वे मूल रूप से बुलंदशहर निवासी थे। 63 साल के किरनपाल सिंह अनुसार लीवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। डॉक्टरों के जवाब देने पर परिवार उन्हें गंगानगर स्थित अपने आवास पर ले आए थे।

पिछले कई महीनों से लीवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे किरनपाल का उपचार दिल्ली के एम्स व नोएडा के एक अस्पताल में चल रहा था। इंग्लैंड के डॉक्टरों के निर्देशन में इलाज जारी रहा। गंभीर हालत में भी किरनपाल ने आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंथ के लिए भुवी को वोट देने की अपील की थी।

खेल-कूद

हॉकी में ओलंपिक पदक जीतकर बीमार पिता इलाज कराना चाहती हैं सोनीपत की निशा

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नई दिल्ली। टोक्यो ओलंपिक के लिए महिला हॅाकी टीम में चयनित होने वाली सोनीपत की निशा अपने दर्जी पिता का इलाज कराकर उन्हें नया घर देना चाहती है। बीमार पिता की हालत के चलते निशा को हॅाकी छोड़ना पड़ा था।

पिता को लकवा मारते ही निशा के घर की हालत खराब होना शुरू हो गई। तब निशा ने खेलना शुरू ही किया था। लेकिन केवल एक कमाऊ सदस्य होने के कारण निशा व उनकी दो बहनों को काम करना पड़ा।

निशा ने हॅाकी छोड़ दी पर उनकी कोच प्रीतम रानी सिवाच ने उनका साथ न छोड़ते हुए निशा को प्रेरित किया। यह कोच की प्रेरणा और निशा की मेहनत ही है कि वह टोक्यो ओलंपिक मे चयनित हो सकी। निशा बेबाकी से कहती हैं कि वह ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन कर अपने पिता का बेहतर इलाज और घर देना चाहती है।

पिता ने कहां, अब देश का नाम रोशन करो

निशा के पिता दर्जी हैं। उनके लकवाग्रस्त होने के बाद उनका काम-धंधा बंद हो गया। निशा कहती है, उनके मामा ने उनकी बहुत मद्द की और उनके साथ उनकी बहनों ने भी बहुत काम किया।

अब उनकी शादी हो चुकी है और निशा की भी रेलवे में नौकरी लग चुकी हैं। लेकिन माता-पिता अब भी सोनीपत में छोटे से मकान में रहते हैं। इसलिए निशा अपने पिता का इलाज कराकर उन्हें एक नया घर देना चाहती हैं।

निशा बताती है कि सबसे पहले अपने ओलंपिक में चयनित होने की खबर उन्होंने अपनी कोच प्रीतम को दी। उसके बाद अपने पिता सोहराब को। पिता के मुंह से यही निकला कि जिसके लिए तुमनें मेंहनत ही उसका फल तुम्हें मिल गया। अब देश का नाम रोशन करो।

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