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अन्तर्राष्ट्रीय

बांग्लादेश में कोरोना का कहर, 7 दिनों के लिए लगा लॉकडाउन

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नई दिल्ली। भारत के अलावा दूसरे कई देशों में भी कोरोना की रफ्तार तेज हो गई है। पड़ोसी देश बांग्लादेश भी इस वायरस से बेहाल हो गया है। जिसके बाद वहां की सरकार ने देश में 7 दिनों का लॉकडाउन लगाने का फैसला किया है।

कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के कारण बांग्लादेश ने सोमवार, 5 अप्रैल से 7 दिनों के लिए दूसरी बार पूर्ण लॉकडाउन लगाया है। केवल आपातकालीन सेवाओं के लिए छूट दी गई है। बता दें कि बांग्लादेश में भी कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

जानकार इसे कोरोना का पीक बता रहे हैं जिसकी वजह से देश में बड़ी संख्या में लोग इस खतरनाक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक बांग्लादेश में कोरोना वायरस संक्रमण के 6,469 नए मामले सामने आए हैं।

यह पिछले साल मार्च में कोरोना शुरू होने के बाद से 2021 में एक दिन की सबसे ज्यादा संख्या है। देश में संक्रमित लोगों की कुल संख्या बढ़कर 6,17,764 हो गई है।

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दुनिया में पहली बार कब बनी थी रोटी, जानकर चकरा जाएगा आपका सिर!

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नई दिल्ली। दुनिया में पहली बार रोटी कब बनी, कहां बनी और कैसे बनी इसे लेकर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं। लेकिन हाल ही में शोधकर्ताओं ने रोटी से जुड़ा नया सच खोज निकाला है।

उत्तर-पूर्वी जॉर्डन में शोधार्थियों को एक ऐसी जगह मिली है जिसे लेकर कहा जा रहा है कि वहां करीब साढ़े चौदह हजार साल पहले फ्लैटब्रेड यानी रोटी पकाई गई थी।

शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि इस जगह पर पत्थर के बने एक चूल्हे में रोटी पकाई गई थी। शोधार्थियों को मौके से वह पत्थर का चूल्हा भी मिला है।

इन अवशेषों से यह पता चलता हैं कि मानव ने कृषि विकास होने से सदियों पहले ही रोटी पकानी शुरू कर दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 4000 साल पहले इंसानों ने खेती करना शुरू किया था लेकिन उससे काफी समय पहले ही पूर्वी भूमध्यसागर में शिकारियों ने रोटियां पकानी शुरू कर दी थीं।

अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि उस समय रोटी बनाने में जंगली अनाजों का इस्तेमाल किया गया होगा। यह रोटी जौ, इंकॉर्न, जई और पानी में उगने वाले एक खास किस्म के पौधे ट्यूबर्स से बनाई गई होगी।

शोध के अनुसार इस रोटी को नॉटफियन संस्कृति के लोगों ने बनाया होगा। ये वे लोग होंगे जो एक जगह ठहरकर जीवन व्यतीत करते होंगे। यह अवशेष ब्लैक डेजर्ट एर्केओलॉजिक साइट पर मिला है।

इस शोध से मिले अवशेषों से यह प्रतीत होता है कि रोटी का इतिहास कृषि विकास से भी काफी पुराना है। शोधार्थी अमाया अरन्ज-ओटेगुई ने बताया, यह संभव है कि रोटी ने पौधों की खेती करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया होगा।

 

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