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डीडी भारती पर गणतंत्र दिवस पर नए कार्यक्रमों का प्रसारण

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नई दिल्ली| दूरदर्शन का सांस्कृतिक टेलीविजन चैनल और भारत की सांस्कृतिक परंपरा एवं विरासत का प्रतिबिम्ब डीडी भारती इस वर्ष 67वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कई कार्यक्रमों को प्रसारित करेगा। इन सभी कार्यक्रमों में भारत की आजादी के संघर्ष को दर्शाया जाएगा।

इस चैनल पर प्रसारित कार्यक्रम मुख्यत: नृत्य-संगीत, कला-शिल्प, प्रतिभा खोज, प्रश्नोत्तरी, कार्टून, साहस-कर्म, एवं सांस्कृतिक परंपराओं तथा हमारे सांस्कृतिक विरासत इत्यादि पर आधारित होते हैं।

गणतंत्र दिवस पर तीन कार्यक्रमों को प्रसारित किया जाएगा, जो इस प्रकार हैं :

भारत की आजादी में मुख्य भूमिका निभाने वाले स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह की ‘बायोग्राफी’ पर आधारित कार्यक्रम ‘लगेंगे हर बरस मेले’ का प्रसारण 25 जनवरी, 2016 को शाम छह बजे डीडी भारती पर होगा।

साहित्य भारती के तहत ‘फ्रीडम स्ट्रगल एंड इंडियन पोएट्री’ कार्यक्रम का प्रसारण 25, 26 और 27 जनवरी, 2016 को रात आठ बजे होगा। इस कार्यक्रम में भारत की आजादी के संघर्ष पर आधारित कविताओं से दर्शकों को रू-ब-रू कराया जाएगा।

डीडी भारती पर ‘स्वराज की गूंज’ नामक एक अन्य कार्यक्रम का प्रसारण होगा, जिसमें भारत की आजादी के दौरान सिनेमा द्वारा निभाई गई भूमिका को दर्शाया जाएगा। इसका प्रसारण 25 और 26 जनवरी, 2016 को शाम 10.30 बजे होगा।

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देश में कोरोना की वैक्सीन बना रहे हैं 30 ग्रुप, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने दी जानकारी

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नई दिल्ली। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने गुरुवार को कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर अहम जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत में करीब 30 समूह कोरोना वायरस के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं, जिनमें बड़े उद्योग घरानों से लेकर शिक्षाविद् तक हैं।

उन्होंने कहा कि यह बहुत रिस्की प्रॉसेस है। दुनिया में बहुत सारे लोग वैक्सीन की बात कर रहे हैं, लेकिन यह पता नहीं है कि किसकी वैक्सीन प्रभावी होगी। अगर वैक्सीन वेस्ट हो जाती है तो नुकसान भी होता है।

राघवन ने कहा कि इन 30 में से 20 समूह बहुत तेज रफ्तार से काम कर रहे हैं। उन्होंने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘भारत में बड़े उद्योगों से लेकर शिक्षाविदों तक करीब 30 समूह कोविड-19 के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं जिनमें से 20 अच्छी रफ्तार से काम कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा कि वैक्सीन हम नॉर्मल लोगों को देते हैं न कि बीमार को और किसी भी अंतिम स्टेज के मरीज को इसलिए जरूरी है कि वैक्सीन की क्वालिटी और सेफ्टी को पूरी तरह से टेस्ट किया जाए। राघवन ने कहा कि सामान्य तौर पर टीका बनाने में करीब 10 साल लगते हैं, लेकिन दुनिया भर में कोरोना वायरस के लिए एक साल के अंदर टीका बनाने के लक्ष्य के साथ काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि नई दवा बनाना बहुत ही चुनौतीपूर्ण काम होता है और इसी तरह टीका बनाने में बहुत लंबा वक्त लगता है।

उन्होंने कहा कि कई प्रयास विफल हो जाते हैं और इस तरह आपको बहुत कोशिशें करनी होती हैं। राधवन ने कहा कि वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद और एआईसीटीई ने भी दवा बनाने के प्रयास शुरू किए हैं।

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