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राम मंदिर निर्माण की अनवरत प्रतीक्षा नहीं कर सकते : तोगड़िया

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कानपुर| विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया ने कहा है कि राम मंदिर के लिए हिंदू अनवरत प्रतीक्षा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि संसद द्वारा कानून बनाकर राम मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए। यहां बुधवार रात को पहुंचे विहिप नेता ने कहा कि देश के 100 करोड़ हिंदू सर्वोच्च न्यायालय के इस मामले में होने वाले फैसले की अनवरत प्रतीक्षा नहीं कर सकते।

तोगड़िया ने कहा, “यह ऐसा मुद्दा है जो करोड़ों हिंदुओं के दिल के बहुत करीब है। हम इस बात की प्रतीक्षा नहीं कर सकते कि शीर्ष अदालत कोई समय निकाले और मुद्दे पर सुनवाई करे।”

तोगड़िया यहां हिंदू सम्मेलन में हिस्सा लेने आए हैं।

उन्होंने कहा कि हिंदू बहुसंख्यकों की भावनाएं इस बात को सुनिश्चित करेंगी कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए संसद कानून बनाए।

नरेंद्र मोदी सरकार के कामकाज पर पूछे जाने पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि विहिप का केंद्र सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। उनका संगठन अपने सिद्धांत और एजेंडे के हिसाब से काम कर रहा है।

अन्तर्राष्ट्रीय

इस मुस्लिम देश के पहाड़ पर दिखे ‘भगवान राम’, देखें तस्वीर

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नई दिल्ली। इराक गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दो हजार ईसा पूर्व के भित्तिचित्र मिले हैं। इस भित्तिचित्र को लेकर अयोध्या शोध संस्थान का दावा है कि ये भगवान राम की छवि है।

भगवान राम का ये भित्तिचित्र इराक के होरेन शेखान क्षेत्र में संकरे मार्ग से गुजरने वाले रास्ते पर दरबंद-ई-बेलुला चट्टान में मिला है। इस चित्र में एक राजा को दिखाया गया है, जिसने धनुष पर तीर ताना हुआ है।

उनकी कमर के पट्टे में एक खंजर या छोटी तलवार लगी है। इसी चट्टान में एक और छवि भी है, जिसमें एक शख्स हाथ मुड़े हुए दिख रहा है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक योगेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि ये भगवान हनुमान की छवि है।

वहीं इराक के विद्वानों का कहना है कि ये भित्तिचित्र पहाड़ी जनजाति के प्रमुख टार्डुनी का है। भारतीय राजदूत प्रदीप सिंह राजपुरोहित की अगुआई में ये प्रतिनिधिमंडल इराक गया था। जिसके लिए संस्कृति विभाग के अंतर्गत आने वाले अयोध्या शोध संस्थान ने अनुरोध किया था।

प्रदीप सिंह का दावा है कि इन चित्रों से पता चलता है कि भगवान राम सिर्फ कहानियों में नहीं थे क्योंकि ये निशान उनके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। भारतीय और मेसोपोटामिया संस्कृतियों के बीच संबंध का विस्तृत अध्ययन करने के लिए भी इस प्रतिनिधिमंडल ने चित्रमय प्रमाण भी एकत्रित किए हैं।

वहीं इराक के इतिहासकार अयोध्या शोध संस्थान की  बातों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि वे इस चित्र को भगवान राम से जुड़ा नहीं मानते हैं।

उनका कहना है कि ये साबित करने के लिए गायब लिंक को खोजना जरूरी है। उनका कहना है कि उन्होंने शोध के लिए इराक की सरकार से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद सभी कड़ियों को जोड़ने का काम किया जाएगा।

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