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विज्ञान मेला शुरू, छात्रों ने सिखाए हवा में खेती करने के गुर

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लखनऊ। आंचलिक विज्ञान नगरी में गुरुवार को नगर स्तरीय विज्ञान मेले की शुरुआत हुई। मेले का उद्घाटन प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी संस्थान के निदेशक प्रोफेसर एएस विद्यार्थी ने पारंपरिक तरीके से दीप प्रज्ज्वलन करके किया। इस तीन दिवसीय मेले में छात्रों ने ऑटोमैटिक स्ट्रीट लाइट, बिजली की बचत के तरीकों, पानी व हवा में खेती करने के उपायों को विभिन्न मॉडलों के माध्यम से समझाया। मेले में भूकंपरोधी भवनों का निर्माण की तकनीक और ट्रेनों को टक्कर से बचाने के उपाय आदि के प्रोजेक्ट खासे दर्शनीय हैं।DSC_6246

इस मेले में 19 व्यक्तिगत और 14 टीमें प्रोजेक्ट प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। मेले में वैश्विक समस्याओं जैसे ऊर्जा, यातायात, खाद्य एवं कृषि, कम पानी में ज्यादा सिंचाई व कम जमीन पर अधिक उपज लेने के तरीकों पर मॉडल पेश किए गए। मुख्य अतिथि प्रो. विद्यार्थी ने छात्रों के मॉडलों में अत्यधिक रुचि दिखाई तथा उन्हें सुधारने के भी सुझाव दिए।

मुख्य अतिथि ने छात्रों को जिज्ञासु, तर्कसंगत बनने को कहा। उन्होंने छात्रों को सुझाव दिया कि वे अपनी आंख, कान, नाक खुले रखें और निरंतर देखते रहें कि उनके आसपास क्या हो रहा है, क्यों हो रहा है और कैसे हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि छात्र अभ्यास करके भी कुछ विषयों में निपुणता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने सभी छात्रों के मॉडलों और विचारों की जमकर सराहना की और उन्हें प्रोत्साहित किया।

DSC_6159इन प्रोजेक्टों के माध्यम से यह स्पष्ट हो गया कि स्कूली बच्चों में भी सभी प्रकार की सामाजिक व विज्ञान/तकनीक पर आधारित समस्याओं के प्रति खासी सजगता है। आंचलिक विज्ञान नगरी के परियोजना समायोजक ने बताया कि यह विज्ञान मेला तीन दिनों तक दर्शकों के लिए खुला रहेगा। 18 दिसंबर यानी शुक्रवार को अधिक से अधिक विद्यार्थी इसका लाभ उठा सकते हैं और प्रातः 10 बजे से दोपहर तीन बजे तक इसे देखने आ सकते हैं।

नेशनल

गर्भ से बाहर निकला बच्चे का हाथ डॉक्टरों ने वापस गर्भ में डाला, मौत बनी अंजाम

योगेश मिश्रा

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गुरुग्राम। एक डॉक्टर को धरती पर ईश्वर के तुल्य माना जाता है क्योंकि डॉक्टर ही किसी की जान बचा सकता है। लेकिन एक घटना ऐसी सामने आई है जिसमें डॉक्टरों की शर्मनाक हरकत की वजह से एक गर्भवती महिला के नवजात बच्चे की जान चली गई। गुरुग्राम के एक सिविल अस्पताल में गर्भवती महिला लेबर पेन से तड़प रही थी। उसके बच्चे का हाथ गर्भ से बाहर आ गया तो डॉक्टरों ने बच्चे का हाथ वापस गर्भ में डाल दिया। इसके बाद नवजात बच्चे की मौत हो गई।

पटौदी में दौलताबाद के निवासी जयदेव अपनी गर्भवती पत्नी सोनिया को गुडग़ांव के सिविल अस्पताल में ले गए। यहां डॉक्टरों ने बताया कि खून की कमी से खतरा होने के कारण यहां डिलीवरी नहीं हो पाएगी। इसलिए महिला को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में रेफर किया जाएगा। सोनिया को सिविल अस्पताल में ही तीन घंटे तक एक व्हीलचेयर पर दूसरे अस्पताल में रेफर करने की बात कहकर बिठाए रखा। महिला असहनीय दर्द से तड़पती रही। इसी दौरान गर्भ से शिशु का एक हाथ बाहर आ गया। जब डॉक्टरों और स्टाफ को इस बारे में बताया गया तो उन्होंने बच्चे के हाथ को गर्भ में अंदर डाल दिया।

जब महिला को सफदरजंग अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस में लिटाया गया तो उसकी डिलीवरी हो गई। डिलीवरी के बाद महिला को वार्ड में शिफ्ट किया। जहां उसके बच्चे की मौत हो गई।

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