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लाइफ स्टाइल

रूखी त्वचा को बनाएं कोमल

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नई दिल्ली | सर्दियों के मौसम से पूर्व हवा में ठंडक के साथ त्वचा में आनेवाले रूखेपन को दूर करने के लिए क्रीमी उत्पादों का प्रयोग और तेल मालिश बेहद फायदेमंद हैं। एक विशेषज्ञ ने यह जानकारी दी। एल्प्स ब्यूटी क्लीनिक की सौंदर्य विशेषज्ञ भारती तनेजा ने सर्दियों से पूर्व त्वचा को मुलायम और खूबसूरत बनाए रखने के लिए कुछ उपाय सुझाए हैं|

क्रीमी उत्पादों का प्रयोग करें–  इस मौसम में जैल आधारित फेस वॉश, क्रीम और मेकअप उत्पादों की जगह क्रीमी उत्पादों का प्रयोग करें। क्रीम आधारित उत्पाद त्वचा पर एक सुरक्षित परत बनाकर सर्द दिनों में त्वचा में नमी को बनाए रखते हैं।

सनस्क्रीन का प्रयोग करें – ज्यादातर लोग केवल गर्मियों के मौसम में ही सनस्क्रीन का प्रयोग करते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सर्दियों से पूर्व के मौसम में भी सूर्य की रोशनी त्वचा के लिए हानिकारक हो सकती है। इसलिए सर्दियों में भी घर से बहार निकलने से 30 मिनट पूर्व अपनी चेहरे और शरीर के खुले हिस्सों में यूवी और पीए प्लस, प्लस, प्लस युक्त ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का प्रयोग करें।

शरीर पर लगाएं तेल- शरद ऋतु की हवा त्वचा की प्राकृतिक नमी को चुरा लेती है। इसकी भरपाई करने के लिए नहाने से पूर्व 10 मिनट तेल की मालिश शरीर के पोषण की जरूरत को पूरा करने में मदद करेगी।

कंडीशनर : बालों की चमक को बनाए रखने के लिए सिलिकोन युक्त कंडीश्नर का प्रयोग करें, जो बालों की नमी को सुरक्षित रखने में मदद करेगा। घर का बना एवोकेडो मास्क भी रूखे और बेजान बालों के लिए बेहतरीन है। इसके लिए एवोकेडो के गूदे में एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल मिलाकर घोल बनाएं। यह पोषक मास्क बालों के लिए जरूरी विटामिनों, खनिजों और मुलायम करने वाले तत्वों से भरपूर है जो सर्दियों के रूखेपन से लड़ने में मदद करेगा।

हाईड्रेट करें – मौसम कोई भी हो, सौंदर्य की देखभाल के लिए भरपूर पानी पीने के नियम को न भूलें। शरीर से विषैले पदार्थो को निकालकर यह त्वचा को जवां और मुलायम बनाए रखने में मददगार है।

 

आध्यात्म

Navratri 2020 : नवरात्र में कुट्टू का आटा देगा भरपूर न्यूट्रीशन

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नवरात्र तन, मन और आत्मा को स्वच्छ करने का मौका होता है। इस दौरान गेहूं का आटा नहीं, कुट्टू का आटा खाया जाता है। कुट्टू का आटा अनाज नहीं, बल्कि फल से बनता है और अनाज का बेहतर विकल्प होने के साथ पौष्टिक तत्वों भरपूर भी होता है।

कुट्टू के आटे के फायदों के बारे में आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल ने बताया कि कुट्टू का आटा प्रोटीन से भरपूर होता है और जिन्हें गेहूं से एलर्जी हो, उनके लिए बेहतरीन विकल्प है। इसमें मैग्नीशियम, विटामिन-बी, आयरन, कैल्शियम, फॉलेट, जिंक, कॉपर, मैग्नीज और फासफोरस भरपूर मात्रा में होता है। इसमें फाइटोन्यूट्रिएंट रूटीन भी होता है जो कोलेस्ट्रोल और ब्लड प्रेशर को कम करता है। सेलियक रोग से पीड़ितों को भी इसे खाने की सलाह दी जाती है।

चूंकि कुट्टू के आटे को चबाना आसान नहीं होता, इसलिए इसे छह घंटे पहले भिगो कर रखा जाता है, फिर इन्हें नर्म बनाने के लिए पकाया जाता है, ताकि आसानी से पच सके। चूंकि इसमे ग्लूटन नहीं होता इसलिए इसे बांधने के लिए आलू का प्रयोग किया जाता है।

यह ध्यान रखें कि इसकी पूरियां बनाने के लिए हाईड्रोजेनरेट तेल या वनस्पति का प्रयोग न करें, क्यूंकि यह इसके मेडिकल तत्वों को खत्म कर देता है। इसे बनी पूरियां ज्यादा कुरकुरी होती हैं। वैसे पूरी और पकोड़े तलने की बजाय इससे बनी रोटी खाएं। कुट्टू के आटे से इडली भी बन सकती है और समक के चावल से डोसा भी बनाया जा सकता है।

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कुट्टू के आटे के फायदे :

  • फाइबर से भरपूर और ग्लिसेमिक इंडेक्स कम होने से यह डायब्टीज वालों के लिए बेहतर विकल्प है। कुट्टू के आटे का ग्लिसेमिक इंडेक्स 47 होता है।
  • कुट्टू के आटे में मौजूद चाईरो-इनोसिटोल की पहचान डायब्टीज रोकने वाले तत्व के रूप में की गई है।
  • कुट्टू के आटे में मिलावट की जा सकती है और इसे विश्वसनीय स्रोत से ही खरीदना चाहिए। पिछले साल का बचा हुआ आटा भी प्रयोग नहीं करना चाहिए, इससे फूड-प्वॉयजनिंग हो सकती है।
  • कुट्टू 75 प्रतिशत जटिल काबोहाइड्रेट है और 25 प्रतिशत हाई क्वालिटी प्रोटीन, वजन कम करने में यह बेहतरीन मदद करता है। इसमें अल्फा लाइनोलेनिक एसिड होता है, जो एचडीएल कोलेस्ट्रोल को बढ़ाता है और एलडीएल को कम करता है।
  • यह अघुलनशील फायबर का अच्छा स्रोत है और गॉलब्लैडर में पत्थरी होने से बचाता है। अमेरिकन जरनल ऑफ गेस्ट्रोएनट्रोलॉजी के मुताबिक, 5 प्रतिशत ज्यादा घुलनशील फायबर लेने से गाल ब्लैडर की पत्थरी होने का खतरा 10 प्रतिशत कम हो जाता है।

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