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दिल्ली सरकार डेंगू रोकथाम राशि का सही उपयोग सुनिश्चित करे : न्यायालय

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नई दिल्ली| देश में पांव फैला र‍हे डेंगू से बिमार पड़ रहे लोगो के लिए  दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि डेंगू की रोकथाम के लिए नगर निकायों को दी गई सहायता राशि का उपयोग समुचित तरीके से हो। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंड पीठ ने सरकार से सभी विभागों को सहयोग करने और मलेरिया व डेंगू की रोकथाम कार्यक्रमों को सही ढंग से लागू कराना सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है।

न्यायालय का यह आदेश कांग्रेस नेता अजय माकन की उस जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आया है, जिसमें उन्होंने दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार और नगर निगमों पर डेंगू की रोकथाम के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं करने का आरोप लगाया है। माकन के अधिवक्ता अमन पंवार और मुदित गुप्ता ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि सरकार ने डेंगू व मलेरिया रोकथाम कार्यक्रम के लिए 81.52 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, लेकिन अदालत के हस्तक्षेप के एक दिन बाद यानी 22 सितंबर को इनमें से 50 फीसदी राशि नगम निगमों को जारी की गई।

दिल्ली सरकार ने हालांकि न्यायालय को बताया कि डेंगू का मामला सामने आने के बाद तीन नगर निगमों को 60 करोड़ रुपये दिए गए। सरकारी अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि 17 सितंबर को तीन नगर निगमों को कुल सहायता राशि की 25 फीसदी राशि वाली पहली किस्त आवंटित की गई थी। 50 फीसदी की धनराशि वाली दूसरी किस्त 22 सितंबर को जारी की गई।

 

प्रादेशिक

दिल्ली अग्निकांड पर हुआ ये चौंका देने वाला खुलासा

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के रानी झांसी रोड बाजार में रविवार को आग लगने से 43 लोगों की मौत हो गई जबकि 15 से ज्यादा लोगों की हालत नाजुक है।

इस हादसे के बाद अब इससे जुड़ी हैरान कर देने वाली बात सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस बिल्डिंग में आग लगी वहां बाहर से ताला बंद था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अंदर से लोगों बचाओ-बचाओ चिल्ला रहे थे। बाद में स्थानीय लोगों ने अंदर फंसे कई लोगों को बाहर निकाला और उन्हें अस्पताल पहुंचाया।

बता दें कि इस बिल्डिंग में बैग बनाने का काम होता है था। मृतकों के परिजनों के मुताबिक फैक्ट्री में मौजूद ज्यादातर लोगों की उम्र 20-25 साल के बीच थी। मजदूर वहीं काम करते थे और वहीं खाना-पीने और सोने की व्यवस्था भी थी।

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