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अन्तर्राष्ट्रीय

ओबामा ने आव्रजन सुधार योजना का बचाव किया

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लास वेगास| अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने उस आव्रजन सुधार योजना का बचाव किया है, जो 50 लाख अवैध प्रवासियों को देश निकाला किए जाने से बचाता है। आव्रजन सुधार घोषणा को लेकर ओबामा का शुक्रवार को लास वेगास में नारों के साथ जोरदार स्वागत किया गया।  लास वेगास के डेल सोल हाई स्कूल में एक उत्साहित भीड़ को संबोधित करते हुए ओबामा ने कहा, “स्थायी सुधार को साकार करने के लिए हम कांग्रेस सदस्यों के साथ मिलकर काम करने जा रहे हैं।”

राष्ट्रपति ने कहा, “लेकिन जबतक वह समय नहीं आता, मुझे कुछ कानूनी कार्रवाई करनी है, जिससे आव्रजन प्रणाली को निष्पक्ष बनाने में मदद मिलेगी और इस सुबह मैंने कुछ कार्रवाइयां शुरू की है।” आव्रजन संबंधी आदेशों की घोषणा करने के बाद जनता के सामने मुखातिब होने के लिए डेल सोल का चुनाव एक संकेत के तौर पर था, क्योंकि उन्होंने आव्रजन पर तमाम भाषण 2013 में हिस्पैनिक स्कूल में दिए थे।

ओबामा ने कहा, “हम वैसे राष्ट्र नहीं हैं, जो संघर्षशील तथा सपने देखनेवालों को धक्के मारकर बाहर निकाल दें। हम वैसे लोगों का स्वागत करने वाले राष्ट्रों में हैं।” उन्होंने कहा, “हम उन्हें कमाने देना चाहते हैं। हम उन्हें मनुष्य तथा भगवान के बच्चों के रूप में देखते हैं और हम सबके भविष्य को उज्‍जवल बनाने के लिए उनकी प्रतिभा का दोहन करते हैं।” उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अमेरिका की खंडित आव्रजन प्रणाली को दुरुस्त करने और 50 लाख अवैध प्रवासियों को देश निकाला किए जाने से बचाने के लिए एकतरफा कार्रवाई को अंजाम दिया है। इनमें हजारों भारतीय प्रवासी शामिल हैं।

पेव रिसर्च सेंटर की एक नई रपट के अनुसार, अमेरिका में निवास कर रहे लगभग 1.12 करोड़ अवैध प्रवाशियों में मेक्सिको के लोगों की संख्या जहां 59 लाख है, वहीं इस आंकड़े में 450,000 लोगों की भागीदारी के साथ भारत अमेरिका में अवैध प्रवासी स्रोत के मामले में चौथे स्थान पर है। रपट में कहा गया है कि लगभग 81 लाख अवैध प्रवासी अमेरिकी श्रम शक्ति में 5.1 प्रतिशत हिस्सेदारी करते हैं। उनमें से कई कम वेतन वाली नौकरियां करते हैं, जिसे अमेरिकी नागरिक नहीं करना चाहते।

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करतारपुर पर पाक सेना ने पलटा इमरान खान का फैसला, चली ये चाल

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नई दिल्ली। करतारपुर कॉरिडोर को लेकर पाकिस्तान का दोहरा चरित्र एक बार फिर सामने आया है। पाकिस्तानी सेना ने पाक पीएम इमरान खान के उस फैसले को बदल दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय श्रद्धालुओं को पवित्र गुरुद्वारा दरबार साहिब आने के लिए महज एक वैध पहचान-पत्र की जरूरत होगी। पाक सेना ने प्रवक्ता आसिफ गफूर ने कहा कि अब सिख तीर्थयात्रियों को करतारपुर कॉरिडोर का प्रयोग करने के लिए भारतीय पासपोर्ट की आवश्यक्ता होगी।

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर की इस टिप्पणी से एक दिन पहले ही भारत ने पाकिस्तान से यह स्पष्ट करने को कहा था कि करतारपुर स्थित गलियारा जाने के लिए सिख श्रद्धालुओं को पासपोर्ट की जरूरत होगी या नहीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मेजर जनरल गफूर ने बुधवार को कहा कि भारतीय सिख श्रद्धालुओं को करतारपुर गलियारे का प्रयोग करने के लिए पासपोर्ट दिखाना जरूरी होगा।

गफूर ने कहा कि सुरक्षा कारणों से, प्रवेश पासपोर्ट आधारित पहचान पर मिली अनुमति के तहत कानूनी तरीके से दिया जाएगा। एक नवंबर को, प्रधानमंत्री खान ने करतापुर गलियारे का निर्माण पूरा होने की ट्विटर पर घोषणा करते हुए कहा था कि उन्होंने दो शर्तों को माफ कर दिया है। इनमें से एक पासपोर्ट से जुड़ी शर्त थी जबकि दूसरी शर्त भारत से करतारपुर तीर्थयात्रा पर आने वाले सिखों द्वारा 10 दिन पहले पंजीकरण कराने से जुड़ी थी।

उन्होंने कहा था कि भारत के सिख श्रद्धालुओं को करतारपुर आने के लिए पासपोर्ट की नहीं बल्कि एक वैध पहचान-पत्र की जरूरत होगी। इसके अलावा उद्घाटन समारोह के लिए आने वाले और 12 नवंबर को सिख गुरु की 550वीं जयंती के मौके पर आने वाले श्रद्धालुओं से 20 डॉलर का सेवा शुल्क भी नहीं वसूला जाएगा।

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