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दांतों की कैविटी, सड़न, दर्द व पीलेपन जैसी समस्याओं से छुटकारे के लिए पियें नीम का पानी

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नीम का पानी पीने के सेवन से आप छोटी मोटी बीमारियों को सहन कर सकते हैं। साथ ही लंबे समय तक निरोग भी रहे सकते हैं।

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नीम के पानी के फायदे –

नीम का पानी पीने से ओरल हाइजीन दुरुस्त होती है।

नीम का पानी पीने से दांतों और मसूड़ों संबंधित समस्याएं दूर होती हैं।

नीम के पानी में एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं, ये दांतों में मौजूद बैक्टीरिया का सफाया करते हैं।

नीम का पानी पीने से बैक्टीरिया मरने के कारण सांसों और मुंह से बदबू आने की समस्या दूर हो जाती है।

नीम का पानी पीने से दांतों की कैविटी, सड़न, दर्द, दांतों के पीलेपन जैसी समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है।

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ऑफ़बीट

घर के अंदर वायु प्रदूषण से भी हो सकता है फेफड़ों को खतरा

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घर के अंदर का वायु प्रदूषण दीर्घकाल में फेफड़े को नुकसान पहुंचाता है और यह सीओपीडी के जोखिम का एक कारक है। सीओपीडी एक ऐसी बीमारी है, जो समय के साथ विकसित होती है, और इसके पीछे धूम्रपान और केमिकल्स का विशेष योगदान होता है। कुछ लोगों को आनुवंशिक रूप से सीओपीडी हो जाता है। इस स्थिति से पीड़ित पांच प्रतिशत लोगों में अल्फा-1-एंटीट्रिप्सिन नामक एक प्रोटीन की कमी होती है, जो फेफड़ों को खराब कर देता है और यकृत को भी प्रभावित कर सकता है।

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सीओपीडी के कुछ सामान्य संकेतों और लक्षणों में सामान्य खांसी या बलगम वाली खांसी, सांस की तकलीफ, खासकर शारीरिक गतिविधि के समय, सांस लेने के दौरान घरघराहट या सीटी जैसी आवाज आदि शामिल हैं।

क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज के लिए सबसे प्रभावी और निवारक थेरेपी है तम्बाकू के धुएं से बचाव। दवा में ब्रोंकोडाइलेटर्स शामिल हैं, जो एयर पाइप के चारों ओर की मांसपेशियों को आराम देते हैं। ये वायुमार्ग को खोलने के साथ-साथ सांस लेने में आसानी पैदा करते हैं। सर्जरी आमतौर पर अंतिम उपाय होता है।

भारत में लगभग 5.5 करोड़ लोग फेफड़ों की पुरानी अवरोधक बीमारी से पीड़ित हैं, और देश में मृत्यु दर के पांच प्रमुख कारणों में से तीन गैर-संक्रमणीय बीमारियां हैं और सीओपीडी मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण है।क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और एम्फिसेमा समेत फेफड़ों की निरंतर बढ़ने वाली सूजन की बीमारियों का वर्णन करने के लिए एक शब्द है- सीओपीडी, जो एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य खतरा है।

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