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मंडप में बैठी दुल्हन की तबियत बिगड़ी, इलाज न मिलने से हुई मौत

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कन्नौज। कन्नौज में शादी वाले दिन ही खुशियां मातम में बदल गईं। यहां समय पर इलाज न मिलने से दुल्हन की मौत हो गई। यहां शादी वाले दिन ही दुल्हन की तबियत अचानक खराब हो गई। इसके बाद परिजन उसे प्राइवेट अस्पताल लेकर गए जहां कोरोना के डर से उसे भर्ती करने से इंकार कर दिया गया। परिजन उसे एक अस्पताल से लेकर दूसरे अस्पताल भागते रहे। इस दौरान उसकी मौत हो गई।

मामला ठठिया थाना इलाके के भगत पुरवा गांव का है। यहां मृतक दुल्हन विनीता का विवाह कानपुर देहात जिले के रसूलाबाद निवासी संजय के साथ होना था। विवाह वाले घर में चारो तरफ खुशियां थी। देर शाम दूल्हा संजय बारात लेकर भगत पुरवा गांव पहुँचा था। शादी की रस्में निभाई जा रही थी तभी दुल्हन विनीता की तबियत खराब हो गयी।

परिवार वाले बीमार विनीता को प्राइवेट अस्पताल ले गए वहां डॉक्टरों ने कोरोना के डर से इलाज करने से मना कर दिया। फिर मेडिकल कॉलेज ले गए जहां हल्का उपचार कर उसको कानपुर रिफर कर दिया गया। कानपुर में भी कोरोना का खौफ देखने को मिला। यहां भी डॉक्टरों ने इलाज से इनकार कर दिया। इलाज न मिलने के अभाव में विनीता ने दम तोड़ दिया।

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कानपुर: परिजनों से 30 लाख रु लेकर फुर्र हो गए किडनैपर, पुलिस मलती रह गई हाथ

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कानपुर। यूपी के कानपुर में पुलिस की बड़ी नाकामी सामने आई है। यहां किडनैपर पीड़ित परिवार के सामने से ही फिरौती के 30 लाख रु लेकर फरार हो गए और पुलिस हाथ मलती रह गई। पीड़ित परिवार ने पुलिस के ही कहने पर अपना घर और बेटी के गहने बेचकर ये रकम इकठ्ठा की थी। पुलिस के कहे अनुसार से ये एक बैग में 30 लाख रु भरकर अपहरणकर्ताओं को देने के लिए लाए थे, लेकिन अपहरकर्ताओं ने इनसे ये रकम भी ले ली और पुलिस के भी चंगुल में नहीं आए।

पीड़ित परिवार ने अब पुलिस की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कानपुर के बर्रा में रहने वाली अपर्णा यादव, पति, बेटी और बेटे संचित यादव के साथ रहती हैं। संजीत एक पैथोलॉजी कर्मचारी था, जिसका रात को घर लौटते वक्त बदमाशों ने अपहरण कर लिया. ये 22 जून की घटना है| इसके बाद किडनैपर्स का फिरौती वसूलने के लिए फोन आया और उन्होंने संजीत को छोड़ने के लिए तीस लाख रुपये मांगे। इसके बाद परिवार ने पुलिस में शिकायत की।

परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें कहा कि वो पैसों का इंतजाम कर लें, हम पैसे देते वक्त अपराधियों को पकड़ लेंगे। इसके बाद परिवार ने अपना घर बेच दिया, बहन की शादी के लिए जो जेवर रखे थे वो भी बेच दिए और 30 लाख रुपये जमा कर पुलिस की मौजूदगी में किडनैपर्स को दिए। लेकिन उन्होंने संजीत को नहीं सौंपा।  परिवार का कहना है कि पैसे देते वक्त पुलिस वहां मौजूद थी लेकिन पैसा भी गया और अपराधी भी भाग गए। मंगलवार को परिवार ने एसएसपी ऑफिस पहुंचकर रोते हुए आपबीती सुनाई।

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