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महाराष्ट्र में कोरोना की बढ़ी स्पीड, इतने ज्यादा नए मामले आए सामने

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नई दिल्ली। भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले हर दिन तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल के दिनों देश में कोरोना वायरस की रफ्तार में काफी तेजी देखने को मिली है। देश में अब तक कुल 1 लाख 25 हजार से ज्यादा कोरोना के मामले सामने आ चुके हैं।

इस खतरनाक वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र है। यहां अब तक 44 हजार से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं। इस बीमारी की वजह से मरने वाले लोगों की संख्या में इस राज्य में सबसे ज्यादा है।

ताजा आंकड़ो के मुताबिक राज्य में कोरोना से मरने वालों की संख्या 1577 हो गई है। शनिवार को जारी किए गए आंकड़ो के मुताबिक महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटे में रिकॉर्ड मामले दर्ज किए गए।

यहां एक दिन में 2608 नए मामले सामने आए जबकि 60 लोगों की इससे मौत हो गई। वहीं 821 मरीजों को आज छुट्टी भी दे दी गई। जिसके बाद ठीक होने वाले लोगों का आंकड़ा बढ़कर 13404 हो गया है।

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श्रमजीवी पत्रकार डॉ. के. विक्रम राव हैं हर एक मीडिया पर्सन के लिए मिसाल

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समाज की सच्ची तस्वीर दिखाना हर एक ईमानदार पत्रकार की ज़िम्मेदारी होती है, ऐसे ही एक श्रमजीवी पत्रकार हैं डॉ. के. विक्रम राव।गद्यकार, सम्पादक, मीडिया शिक्षक और टीवी, रेडियो समीक्षक डॉ. के. विक्रम राव श्रमजीवी पत्रकारों के मासिक दि वर्किंग जर्नलिस्ट के प्रधान सम्पादक हैं।

वे वॉयस ऑफ अमेरिका (हिन्दी समाचार प्रभाग, वाशिंगटन) के दक्षिण एशियाई ब्यूरो में 15 वर्षों तक संवाददाता रहे। वे 1962 से 1998 तक दैनिक टाइम्स ऑफ इण्डिया (मुंबई) में कार्यरत थे।

नौ प्रदेशों में इसके ब्यूरो प्रमुख रहे। सम्प्रति 85 तेलुगु, हिंदी, उर्दू तथा अंग्रेजी पत्रिकाओं में स्तंभकार हैं। वे मुम्बई, हैदराबाद, कोची, दिल्ली, अहमदाबाद, कोलकत्ता आदि के पत्रकारिता संस्थानों में रिपोर्टिंग पर व्याख्याता भी हैं।

वे डॉ. धर्मवीर भारती के “धर्मयुग” और रघुवीर सहाय के “दिनमान” में लिखते रहे। वे दैनिक इकनामिक टाइम्स, और पाक्षिक फिल्मफेयर में भी काम कर चुके हैं। विक्रम राव की समाचार रिपोर्ट की चर्चा विभिन्न विधान मण्डलों तथा संसद के दोनों सदनों में होती रही हैं।

मुरादाबाद, अहमदाबाद और हैदराबाद के साम्प्रदायिक दंगों पर उनकी रिपोर्ट अपनी वास्तविकता और सत्यता के लिए प्रशंसित हुई।बुन्देलखण्ड और उत्तर गुजरात में अकाल स्थिति पर भेजी उनकी रिपोर्टों से सरकारी और स्वयंसेवी संगठनों ने तात्कालिक मदद भेजी जिससे कई प्राण बचाए जा सके।

विक्रम राव की मातृभाषा तेलुगु है। वे मराठी, गुजराती तथा उर्दू भी जानते हैं। उन्होंने मीडिया पर नौ और डॉ. लोहिया पर दो पुस्तकें लिखी हैं। वे भारतीय प्रेस काउंसिल (PCI) के छह वर्षों (1991) तक लगातार सदस्य रहे।

श्रमजीवी पत्रकारों के लिए भारत सरकार द्वारा 2008 में गठित जस्टिस जी.आर. मजीठिया और मणिसाणा वेतन बोर्ड (1996) के वे सदस्य थे। प्रेस सूचना ब्यूरो की केन्द्रीय प्रेस मान्यता समिति के पाँच वर्षों तक वो सदस्य रहे।

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