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उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को मिली बम से उड़ाने की धमकी, जांच में जुटी पुलिस

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। यूपी 112 के व्हाटसएप नम्बर पर गुरुवार देर रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर बम से हमला करने की धमकी दी गई।

यह धमकी मैसेज करके दी गई थी। मैसेज में सीएम योगी को एक विशेष समुदाय के लिए खतरा बताते हुए बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। इस मामले को लेकर गोमती नगर पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।

इंस्पेक्टर धीरज कुमार की ओर से दर्ज एफआईआर के मुताबिक यूपी 112 के सोशल मीडिया डेस्क के व्हाटसएप नम्बर गुरुवार रात 12:32 पर धमकी भरा मैसज आया। मैसेज में लिखा था कि मैं योगी आदित्यनाथ को बम से हमला कर जान से मार दूंगा…।

फिर उसने योगी को कुछ लोगों की जान का दुश्मन बताया। पुलिस इस नम्बर की पड़ताल कर रही है। आरोपी के बारे में कई जानकारी पुलिस को मिल गई है। ट्रू कॉलर पर इस नम्बर को चेक करने पर लिखा आता है-हाय गॉय…जस्ट एबुसिंग…। पुलिस कमिश्नर सुजीत पाण्डेय ने बताया कि एफआईआर दर्ज कर पड़ताल की जा रही है।

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श्रमजीवी पत्रकार डॉ. के. विक्रम राव हैं हर एक मीडिया पर्सन के लिए मिसाल

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समाज की सच्ची तस्वीर दिखाना हर एक ईमानदार पत्रकार की ज़िम्मेदारी होती है, ऐसे ही एक श्रमजीवी पत्रकार हैं डॉ. के. विक्रम राव।गद्यकार, सम्पादक, मीडिया शिक्षक और टीवी, रेडियो समीक्षक डॉ. के. विक्रम राव श्रमजीवी पत्रकारों के मासिक दि वर्किंग जर्नलिस्ट के प्रधान सम्पादक हैं।

वे वॉयस ऑफ अमेरिका (हिन्दी समाचार प्रभाग, वाशिंगटन) के दक्षिण एशियाई ब्यूरो में 15 वर्षों तक संवाददाता रहे। वे 1962 से 1998 तक दैनिक टाइम्स ऑफ इण्डिया (मुंबई) में कार्यरत थे।

नौ प्रदेशों में इसके ब्यूरो प्रमुख रहे। सम्प्रति 85 तेलुगु, हिंदी, उर्दू तथा अंग्रेजी पत्रिकाओं में स्तंभकार हैं। वे मुम्बई, हैदराबाद, कोची, दिल्ली, अहमदाबाद, कोलकत्ता आदि के पत्रकारिता संस्थानों में रिपोर्टिंग पर व्याख्याता भी हैं।

वे डॉ. धर्मवीर भारती के “धर्मयुग” और रघुवीर सहाय के “दिनमान” में लिखते रहे। वे दैनिक इकनामिक टाइम्स, और पाक्षिक फिल्मफेयर में भी काम कर चुके हैं। विक्रम राव की समाचार रिपोर्ट की चर्चा विभिन्न विधान मण्डलों तथा संसद के दोनों सदनों में होती रही हैं।

मुरादाबाद, अहमदाबाद और हैदराबाद के साम्प्रदायिक दंगों पर उनकी रिपोर्ट अपनी वास्तविकता और सत्यता के लिए प्रशंसित हुई।बुन्देलखण्ड और उत्तर गुजरात में अकाल स्थिति पर भेजी उनकी रिपोर्टों से सरकारी और स्वयंसेवी संगठनों ने तात्कालिक मदद भेजी जिससे कई प्राण बचाए जा सके।

विक्रम राव की मातृभाषा तेलुगु है। वे मराठी, गुजराती तथा उर्दू भी जानते हैं। उन्होंने मीडिया पर नौ और डॉ. लोहिया पर दो पुस्तकें लिखी हैं। वे भारतीय प्रेस काउंसिल (PCI) के छह वर्षों (1991) तक लगातार सदस्य रहे।

श्रमजीवी पत्रकारों के लिए भारत सरकार द्वारा 2008 में गठित जस्टिस जी.आर. मजीठिया और मणिसाणा वेतन बोर्ड (1996) के वे सदस्य थे। प्रेस सूचना ब्यूरो की केन्द्रीय प्रेस मान्यता समिति के पाँच वर्षों तक वो सदस्य रहे।

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