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कोरोना संकट के बीच चीन ने किया मून मिशन का सफल परीक्षण

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया जूझ रही है। वहीं, चीन जहां से यह वायरस निकला अब इससे पार पा चुका है और अपने दूसरे कामों में लग गया है। 5 मई को चीन ने स्पेट प्रोजेक्ट के क्षेत्र में एक और सफलता हासिल कर ली।

चीन ने सोमवार को अपने मून मिशन के लिए तैयार किए गए रॉकेट और प्रोटोटाइप का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। हैनान प्रांत में स्थित वेनचांग लॉन्च पैड से चीन की ओर से यह परीक्षण किया गया।

चीनी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक स्थाई स्पेस स्टेशन को चलाने और चांद पर अपने एस्ट्रोनॉट्स को भेजने के लिए यह बेहद जरूरी मिशन है। लॉन्च पैड से लॉन्ग मार्च 5B रॉकेट ने उड़ान भरी।

करीब 9 मिनट बाद एक मानव रहित प्रोटोटाइप अंतरिक्ष यान को उसकी तय कक्षा में पहुंचा दिया। अब 8 मई को यह स्पेसशिप वापस धरती पर लौ़टेगा। यह एक नए तरीके का स्पेसशिप है। जिसमें पैराशूट की जगह गद्दे दिये गए हैं।

कार्गो रिटर्न कैप्सूल का परीक्षण संस्करण भी रॉकेट से सफलतापूर्वक अलग हो गया. अंतरिक्ष यान एक दिन अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष स्टेशन पर ले जाएगा, जिसे चीन साल 2022 तक पूरा करने की योजना बना रहा है. इसके बाद चंद्रमा पर ले जाएगा।

इस कैप्सूल में छह एस्ट्रोनॉट्स बैठ सकेंगे. चीन मैन्ड स्पेस एजेंसी के वैज्ञानिक जी. किमिंग ने बताया कि टेस्ट मिशन और कैप्सूल को उनकी परीक्षण उड़ानों को पूरा करने के बाद शुक्रवार को लैंडिंग स्थल पर वापस आना है।

 

अन्तर्राष्ट्रीय

अब अमेरिका देगा चीन को झटका, टिक टॉक समेत कई एप करेगा बैन

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वाशिंगटन। भारत के बाद अमेरिका भी टिक टॉक समेत तमाम चीनी ईपीएस पर बैन लगाने की तैयारी में है। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि हम निश्चित रूप से चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं। अमेरिका का ये बयान चाइनीज ऐप पर भारत में हुई कार्रवाई के 6 दिन बाद आया। टिकटॉक जैसे चाइनीज ऐप से अमेरिका भी राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा बता चुका है।

इससे पहले पिछले दिनों भारत सरकार ने टिक टॉक समेत 59 चाइनीज ऐप को बैन कर दिया था। इसके बाद चाइनीज कंपनियों की तरफ से सरकार से अपील की जा रही है कि वे भारतीय यूजर्स का डेटा चाइनीज सरकार के साथ शेयर नहीं कर रही थीं। टिकटॉक के सीईओ केविन मेयर ने भारत सरकार को चिट्ठी लिखकर कहा कि चाइनीज सरकार ने कभी भी यूजर्स के डेटा की मांग नहीं की है।

कंपनी लगातार सफाई दे रही है कि भारतीय यूजर्स का डेटा सिंगापुर के सर्वर में सेव हो रहा है और चीन की सरकार ना तो कभी डेटा की मांग की है और ना ही कंपनी इस रिक्वेस्ट को कभी पूरा करेगी।

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