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कोरोना का अंत आया करीब, कोविड-19 को इस खतरनाक वायरस से मारेंगे वैज्ञानिक

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस (कोविड-19) से दुनियाभर में अबतक 83 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 14 लाख के पार हो गई है। इस बीच वैज्ञानिकों को कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर आशा की किरण नजर आने लगी है।

वैज्ञानिकों द्वारा किए गए ताजा शोध में पाया गया है कि मर्स वैक्सीन कोरोना संक्रमण को रोकने में बेहद कारगर साबित हो सकती है। चूहे पर किए गए इस वैक्सीन के परीक्षण में वैज्ञानिकों को सफलता मिली है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक एक चूहे को मर्स (मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम) की हैवी डोज दी गई थी उससे कोरोना वायरस से निजात मिलने की आशा नजर आ रही है। बता दें कि मर्स कोरोना वायरस कोविड-19 से काफी मिलता जुलता है, जिसने इस समय पूरी दुनिया में कहर बरपाया हुआ है।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया और यूनिवर्सिटी ऑफ लोवा के शोधकर्ताओं ने दावा किया यह वैक्सीन कोशिकाओं में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करने के लिए एक हानिकारक वायरस का इस्तेमाल करता है। इसके परीक्षण के बाद कोविड-19 समेत अन्य कोरोना वायरस बीमारियों के खिलाफ वैक्सीन तैयार करने उम्मीद जगती है।

जर्नल एमबायो में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, यह वैक्सीन एक पैराइंफ्लूएंजा वायरस (पीआई5) है, जिसमें स्पाइक प्रोटीन होता है, जो मर्स कोशिकाओं को संक्रमित करने के लिए इस्तेमाल करता है। मर्स की घातक डोज देने के बावजूद जब चूहे पर इस वैक्सीन का इस्तेमाल किया गया तो उसे कुछ नहीं हुआ।

यूनिवर्सिटी ऑफ लोवा के शोधकर्ता प्रोफेसर पॉल मैक्क्रे ने कहा, हमारा नया अध्ययन दर्शाता है कि पैराइंफ्लूएंजा वायरस को कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ उपयोगी वैक्सीन साबित हो सकती है। शोधकर्ता अब जानवरों पर पैराइंफ्लूएंजा वायरस आधारित वैक्सीन के ज्यादा इस्तेमाल कर अध्ययन की योजना बना रहे हैं क्योंकि मर्स और कोविड-19 दोनों ही कोरोना वायरस के कारण फैला है।

मर्स ज्यादा घातक है, लेकिन 2012 से यह वायरस फैलने के बाद से अब तक केवल 2,494 मामले सामने आए हैं। वहीं, वुहान में पिछले साल दिसंबर में फैले कोविड-19 वायरस से दुनियाभर में अब तक 70 हजार लोग मारे जा चुके हैं।

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युवक ने लगवाई थी कोरोना की वैक्सीन, फिर उसके साथ जो हुआ…

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कोरोना वायरस पूरी दुनिया में तबाही मचा रहा है। इस वायरस ने अब तक लाखों लोगों की जान ले ली है। कई देश इस वायरस को रोकने के लिए इसकी वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं।

अमेरिका में भी कई कंपनियां वैक्सीन का ट्रायल कर रही हैं। मॉडर्ना कंपनी ने भी एक वैक्सीन तैयार की है जिसका ट्रायल जारी है। लेकिन इस वैक्सीन को लगाने के बाद एक युवक के अंदर इसका बुरा असर दिखा है।

युवक का नाम इआन हेडन है। वह वॉशिंगटन का रहने वाला है। 29 साल के हेडन ने कोरोना वैक्सीन लगवाई थी। जिसके बाद उसके शरीर में बदलाव देखने को मिला है। हेल्थ न्यूज वेबसाइट STAT News से बात करते हुए इआन ने बताया कि वे बेहोश हो गए थे।

हालांकि, खुद पर बुरा असर होने के बावजूद इआन ने कहा कि वे चाहते हैं कि जब वैक्सीन उपलब्ध हो तो लोग लगवाएं। इआन ने कहा कि वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाने के करीब 12 घंटे बाद उन्हें 103 फारेनहाइट बुखार हो गया था।

तबीयत बिगड़ने पर इआन को इमरजेंसी क्लिनिक में इलाज किया गया, लेकिन जब वे वापस घर लौटे तो बेहोश हो गए। हालांकि, 24 घंटे के भीतर उनकी तबीयत में सुधार देखने को मिला।

इआन हेडन ने कहा कि जब उन्हें मॉडर्ना वैक्सीन की पहली डोज लगाई गई तो हाथों में कुछ दर्द हुआ और हाथ कंधे से ऊपर उठाने में भी उन्हें दिक्कत हुई।

दूसरी डोज के बाद जब इआन हेडन की तबीयत बिगड़ी तो उन्हें सुबह 5 बजे इमरजेंसी क्लिनिक जाना पड़ा। कुछ इलाज के बाद डॉक्टरों ने उन्हें हॉस्पिटल जाने को कहा, लेकिन वे घर लौट आए। घर लौटने पर उन्हें उल्टी हुई और वे बेहोश हो गए।

मॉडर्ना कंपनी ने इआन के साथ ही अन्य 45 वॉलेंटियर्स को भी कोरोना वैक्सीन लगाए हैं। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक चार वॉलेंटियर्स को गंभीर दिक्कत हुई है, लेकिन किसी को भी जान का खतरा नहीं है।

हालांकि, वैक्सीन से अन्य लोगों पर जो बुरा असर हुआ है, उसके बारे में अधिक जानकारी सामने नहीं आई है। मॉडर्ना कंपनी का कहना है कि इआन हेडन के साथ ही तीन कैंडिडेट को वैक्सीन की उच्च खुराक दी गई थी।

इआन हेडन ने कहा कि उन्हें बीमार पड़ने के बाद भी वैक्सीन लगवाने पर कोई पछतावा नहीं है। इआन ने कहा कि उन्हें इस बात का भी डर नहीं है कि इससे उनके शरीर पर लंबे वक्त तक बुरा असर पड़ सकता है।

हाल ही में मॉडर्ना कंपनी ने कहा था कि शुरुआत में जिन आठ लोगों को ट्रायल के दौरान वैक्सीन की खुराक दी गई थी उसका नतीजा सकारात्मक आया। अमेरिका की यह पहली वैक्सीन है जिसका टेस्ट लोगों पर किया गया। दवा कंपनी ने यह भी कहा था कि वैक्सीन सुरक्षित मालूम पड़ती है और वायरस के खिलाफ इम्यून रेस्पॉन्स पैदा करती नजर आती है।

 

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