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चकमा देने के लिए बार-बार शक्ल बदल रहा है कोरोना वायरस, वैज्ञानिक भी हुए हैरान

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नई दिल्ली। कोरोनावायरस ने चीन से बाहर आकर अब पूरी दुनिया को अपना शिकार बना लिया है। इस वायरस से अबतक कुल 32 हजार लोगों की जान जा चुकी है, वहीं संक्रमितों की संख्या 6 लाख के पार पहुंच चुकी है। दुनिया के तमाम वैज्ञानिक इसकी वैक्सीन की खोज में लगे हुए हैं लेकिन इस दौरान उन्हें एक बात ने हैरान कर रखा है।

दरअसल, वैज्ञानिकों की परेशानी यह है कि यह वायरस लगातार म्यूटेट हो रहा है। आसान भाषा में इसका मतलब ये है कि वायरस बार-बार अपना रूप बदल रहा है। इस वायरस ने चीन के वुहान से निकलने के बाद से अब तक अपनी स्ट्रेन आठ बार बदली है। यानी रंग-रूप बदल रहा है। इन आठों स्ट्रेन पर दुनिया भर के वैज्ञानिक काम कर रहे हैं।

 

ये सभी आठों स्ट्रेन मिलते-जुलते हैं लेकिन मामूली अंतर के साथ। हालांकि, वैज्ञानिकों का दावा है कि कोई भी स्ट्रेन दूसरे स्ट्रेन से ज्यादा खतरनाक या जानलेवा नहीं दिखाई दे रहा है। सभी स्ट्रेन का दुष्प्रभाव एक जैसा ही है।

डेली मेल वेबसाइट ने यूएसए टुडे के हवाले से बताया है कि यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के प्रोफेसर चार्ल्स चिउ ने बताया कि यह वायरस लगातार अपनी शक्ल और रूप को बदल रहा है। लेकिन अंदर से इसके RNA और DNA में थोड़ा ही बदलाव हो रहा है। अंदर ज्यादा बदलाव नहीं हो रहा है।

वैज्ञानिक इस बात से भी हैरान है कि कोरोना का हर नया चेहरा उतना ही घातक है जितना कि उससे पहले वाला। लेकिन वैज्ञानिकों के सामने ये समझने की चुनौती है कि कौन से चेहरे ने सामुदायिक रूप से लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। उदाहरण के तौर पर कैलिफोर्निया में जो सामुदायिक संक्रमण फैला है, वह पिछले हो हफ्तों में एक स्ट्रेन के कोरोना वायरस से फैला। अमेरिका के ही दूसरे हिस्सों में फैले कोरोना वायरस के स्ट्रेन से कैलिफोर्निया का स्ट्रेन अलग है।

प्रो. चार्ल्स चिउ ने कहा कि सभी आठ चेहरे अलग-अलग जरूर हैं लेकिन सैद्धांतिक रूप से ये एक ही हैं। क्योंकि इनमें जो बदलाव आ रहा है वह बेहद धीमा है। कोरोना वायरस के जो स्ट्रेन बदल रहे हैं उनकी बदलने की गति 8 से 10 गुना कम है. जबकि फ्लू की ज्यादा होती है।

 

अब तक वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के 30 हजार से ज्यादा जीनोम बेस पेयर की स्टडी की है। इसमें से सिर्फ 11 बेस पेयर ही आपस में बदले हुए दिखे। यानी बेस पेयर में ज्यादा बदलाव नहीं है। बस ऊपरी तौर पर वायरस अपनी शक्ल में हल्का सा बदलाव लेकर आ रहा है।

इसका मतलब ये है कि कोरोना वायरस अपनी शक्ल जरूर बदल रहा है। लेकिन उससे इसके लक्षणों में कोई अंतर नहीं आया है। बस एक ही दिक्कत आ रही है कि एक स्ट्रेन को लेकर वैक्सीन पर शोध होता है, तब तक दूसरा स्ट्रेन बन जाता है।

कोरोना की शक्लें बलदने से सबसे बड़ा खतरा ये है कि अगर एक स्ट्रेन किसी व्यक्ति को सिर्फ सामान्य रूप से परेशान कर रहा है, वही स्ट्रेन किसी दूसरे व्यक्ति के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। यानी स्ट्रेन का असर व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करता है।

नेक्स्टस्ट्रेन डॉट ओआरजी नाम की एक वेबसाइट ने इन स्ट्रेन की स्टडी की है जिसे आप वेबसाइट पर जाकर कोरोना के सभी जाकर कोरोना वायरस की अलग-अलग शक्लों का रूप-रंग देख सकते हैं।

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कोरोनाः चीनी कंपनी का दावा, बन चुकी है वैक्सीन, 10 करोड़ डोज होंगे तैयार

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस पूरी दुनिया में कहर बरपा रहा है। इस वायरस से अब तक 61 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि 3 लाख 71 हजार लोगों को इस खतरनाक बीमारी की वजह से जान गंवानी पड़ी है। इस बीच जिस देश से यह वायरस पूरी दुनिया में फैला वहां के वैज्ञानिकों ने इसकी वैक्सीन को लेकर बड़ा दावा किया है।

चीनी वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने कोरोना वायरस की 99 फीसदी कारगर वैक्सीन बना ली है। इस वैक्सीन के करीब 10 करोड़ डोज बनाने की तैयारी चल रही है। वैक्सीन बनाने का यह दावा बीजिंग की बायोटेक कंपनी ‘सिनोवैक’ ने किया है। चीन में करीब एक हजार से ज्यादा वॉलंटियर पर इसका ट्रायल चल रहा है। हालांकि अब इस वैक्सीन का स्टेज 3 ट्रायल ब्रिटेन में करने की तैयारी की जा रही है।

वैक्सीन बनाने वाले शोधकर्ताओं से जब यह पूछा गया कि क्या यह वैक्सीन काम करेगी। इसके जवाब में रिसर्चर्स लुओ बैशन ने कहा कि यह 99 फीसदी तक कारगर साबित होगी। फिलहाल कंपनी वैक्सीन का स्टेज 2 का ट्रायल कर रही है, लेकिन चीन में कोरोना संक्रमण के कम मामले को देखते हुए वॉलंटियर की कमी पड़ गई है।

कंपनी ‘सिनोवैक’ ने कहा है कि हम यूरोप के कई देशों से ट्रायल के लिए बातचीत कर रहे हैं। इसके साथ ही यूके से भी बातचीत की गई है। हालांकि बातचीत अभी शुरुआती चरण में है। कंपनी बीजिंग में एक प्लांट भी लगा रही है। इस प्लांट में करीब 10 करोड़ डोज तैयार किए जाएंगे।

‘सिनोवैक’ का कहना है कि इस वैक्सीन का प्रयोग सबसे पहले हाई रिस्क वाले मरीजों पर होगा। इस दौरान हेल्थ वर्कर्स और बड़ी उम्र वाले लोगों पर इसका इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि अभी स्टेज 2 के ट्रायल में महीनों लगेंगे। इसके साथ ही वैक्सीन की रेग्यूलेटरी अप्रूवल भी चाहिए होगी।

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