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किचन में रखी इस देशी चीज से शरीर में नहीं घुस पाएगा कोरोना वायरस, ऐसे करें इस्तेमाल!

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चीन से निकले कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में हड़कंप मचा रखा है।  ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि देश दस्तक दे चुके इस खतरनाक वायरस से कैसे बचा जाए।

आज हम आपको बताएंगे कि आयुर्वेद की मदद से इस जानलेवा वायरस के खुद को बचाया जा सकता है। वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ अभय नारायण तिवारी के मुताबिक सरसो के तेल से इस वायरस को शरीर में प्रवेश करने से रोका जा सकता है।

डॉ तिवारी ने बताया कि सोते समय दो बूंद सरसो का तेल नाक में डालकर सोने से कोरोना वायरस को शरीर में घुसने से रोका जा सकता है। डॉ के मुताबिक सरसो के तेल से नाक में एक लेयर बन जाएगी जिससे कोरोना के खतरनाक वायरस शरीर में घुस नहीं पाएंगे।

#corona #covid19 #home #healthcare

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धन्य हैं “धन” के इस दौर में ”सरस्वती” के नए साधक-संपादक…

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आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की ओर से रायबरेली में मनाए जाने वाले आचार्य स्मृति दिवस 2020 के अवसर पर इस वर्ष का प्रतिष्ठित डॉ राम मनोहर त्रिपाठी लोक सेवा सम्मान 40 वर्ष बाद इंडियन प्रेस प्रयागराज से पुनर प्रकाशित हुई सरस्वती पत्रिका के संपादक प्रोफ़ेसर देवेंद्र कुमार शुक्ला एवं अनुपम परिहार को संयुक्त रुप से समर्पित किया गया।

प्रोफ़ेसर देवेंद्र कुमार शुक्ला

कार्यक्रम में प्रोसेसर सुख अपरिहार्य कारणों से उपस्थित नहीं हो पाए। सरस्वती के सहायक संपादक अनुपम परिहार प्रयागराज से कार्यक्रम में प्रतिभाग करने पहुंचे थे। उन्होंने ही प्रोफेसर देवेंद्र शुक्ल का प्रतिनिधित्व भी किया। समिति के पदाधिकारियों ने सम्मान पत्र व प्रतीक चिन्ह एवं अंगवस्त्र के साथ ही सम्मान राशि प्रदान की।

सरस्वती के सहायक संपादक अनुपम परिहार

प्रोफ़ेसर देवेंद्र शुक्ला की सहमति से  अनुपम परिहार ने सम्मान के साथ दी गई धनराशि इंडियन प्रेस प्रयागराज के प्रबंधक सुप्रतीक घोष को सौंप दी। प्रधान संपादक देवेंद्र शुक्ला और सहायक संपादक अनुपम परिहार ने “सरस्वती” का संपादन अवैतनिक स्वीकार किया है। परिहार इसके पहले भी  प्रयागराज में एक व्याख्यान  में प्रतिभाग  करने पर  मिली धनराशि  इंडियन प्रेस को सौंप चुके हैं।

सरस्वती के संपादन के एवज में प्रधान संपादक एवं सहायक संपादक को “लक्ष्मी” स्वीकार नहीं है। हिंदी भाषी समाज में सरस्वती और आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी एक-दूसरे के पर्याय और पूरक माने गए हैं। आचार्य द्विवेदी ने सरस्वती के संपादन से प्राप्त धनराशि काशी नागरी प्रचारिणी सभा को दान में दे दी थी। हम भी आचार्य द्विवेदी की उसी परंपरा का पालन करने का पूरा प्रयास करेंगे।

 

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