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पूरे परिवार की हत्या कर शख्स कर रहा था कुछ ऐसा, जानकर कांप जाएगी रूह

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रांची। झारखंड की राजधानी रांची में एक दिलदहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक पुलिसकर्मी ने अपने परिवार की हत्या करने के बाद के खुद भी जहर खा लिया। आरोपी का नाम ब्रजेश तिवारी है। वह पुलिस के स्पेशल ब्रांच में ड्राइवर के पद पर तैनात था।

ब्रजेश मूल रूप से पलामू जिले का रहने वाला है। वारदात के बाद जब पुलिस मौके पर पहुंची तो आरोपी को देखकर हैरान रह गई। दरअसल, हत्या के बाद आरोपी अपनी पत्नी की लाश के बगल में बैठा था।

गंभीर हालत में उसे रांची के रिम्स में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक वारदात को अंजाम देते समय आरोपी नशे में धुत था।

वह अपने परिवार के साथ बड़गाईं इलाके के चंद्रगुप्त नगर में किराए के मकान में रहता था। पुलिस ने बताया कि आरोपी नशे में धुत होकर घर लौटे 40 साल के ब्रजेश का 35 साल की पत्नी रिंकी देवी से विवाद हो गया।

कहासुनी इतनी बढ़ गई कि ब्रजेश ने हथौड़ा उठाकर पत्नी पर वार कर दिया। मां को पिटता देख बच्चे बचाने के लिए दौड़ पड़े। बच्चों ने मां को बचाने की कोशिश की, लेकिन ब्रजेश के सर पर मानों खून सवार था।

ब्रजेश ने अपनी 15 साल की बेटी खुशबू और 10 साल के बेटे बादल को भी नहीं बख्शा। ब्रजेश ने अपने दोनों बच्चों पर भी हथौड़े से ताबड़तोड़ वार कर उन्हें भी मार डाला।

वारदात को अंजाम देने के बाद ब्रजेश ने खुद रांची के ही पंडरा इलाके में रहने वाली अपनी बहन को फोन कर तीनों की हत्या करने की जानकारी दी।

बताया जा रहा है कि आरोपी ब्रजेश अपनी बेटी खुशबू के प्रेम प्रसंग से परेशान था। बेटी उसे छोड़कर प्रेमी के साथ रहना चाहती थी। यही बात ब्रजेश को चुभ रही थी।

उसका मानना था कि यदि बेटी प्रेमी से शादी करती है तो वह कहीं समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगा। इसलिए उसने पूरे परिवार को मार डाला।

इस घटना के बाद मकान मालिक बलदेव साहून ने बताया कि दोनों पति-पत्नी के बीच झगड़े की आवाज कभी सुनने को नहीं मिली। उन्होंने बताया कि जब वे ब्रजेश के कमरे में पहुंचे तो वहां शराब की बोतल, चूहा मारने की दवा पड़ी हुई थी। साहू ने बताया कि ब्रजेश का परिवार दो साल से यहां रह रहा था।

 

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यूपी में कुल कोरोना संक्रमित मरीजों का अकेले 25% प्रवासी मजदूर, सरकार की बढ़ी चिंता

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग कोरोनावायरस से संक्रमित होते जा रहे हैं। यूपी में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 6,305 तक पहुंच गई। जानलेवा वायरस की चपेट में आने से अब तक 166 मौतें हो चुकी हैं। राहत की बात यह कि अस्पतालों में इलाज से अब तक 3538 लोग संक्रमण-मुक्त हो चुके हैं।

संक्रामक रोग विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ़ विकासेंदु अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से कोरोना संक्रमित मरीजों का मिलना लगातार जारी है। अभी तक पूरे प्रदेश में 2,29,621 लोगों के नमूने जांच के लिए लैब भेजे जा चुके हैं और इसमें से 2,17,867 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है यानी इनमें कोरोना वायरस नहीं पाया गया। वहीं, दूसरी ओर 1012 नमूनों की जांच रिपोर्ट आना बाकी है।

प्रवासी मजदूर बने चिंता का सबब

उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ दिनों में विभिन्न साधनों से करीब 20 लाख प्रवासी मजदूर वापस आए हैं। सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर पूर्वी उत्तर प्रदेश में आए हैं। इसका परिणाम यह हुआ है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में कोरोना वायरस के मामलों में तेजी से उछाला आया है।
अब तक अन्य राज्यों से आए 1569 प्रवासी मजदूर कोरोना पॉजिटिव पाए जा चुके हैं, जो कि कुल मरीजों का लगभग 25 प्रतिशत है।

चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि प्रवासी श्रमिकों के कारण प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों का प्रतिशत काफी बढ़ा है। कम्युनिटी सर्विलांस के जरिए इन श्रमिकों पर गांव और मोहल्ला निगरानी समितियों की इन पर नजर रखने की जिम्मेदारी है। उन्हें कहा कि लक्षण न पाए जाने पर इन श्रमिकों को 21 दिन के होम क्वारंटीन में भेजा जाता है। होम क्वारंटीन के दौरान ये श्रमिक बाहर निकलते पाए गए तो इन्हें संदिग्ध मरीजों पर सरकारी क्वारंटीन में भेज दिया जाएगा।

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