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अन्तर्राष्ट्रीय

ईरान में बोइंग 737 हुआ क्रैश, 170 लोगों की मौत

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नई दिल्ली। यूक्रेन का एक बोइंग 737 विमान बुधवार को ईरान की राजधानी तेहरान से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार सभी यात्रियों की मौत हो चुकी है।

विमान में कम से कम 170 यात्रि सवार थे। विमान में सवार यात्रियों की संख्या शुरुआत में 180 बताई गई थी, लेकिन ईरानी मीडिया ने यात्रियों की संख्या 169, 170 और 176 बताई।

ईरान के रेड क्रेसेंट के प्रमुख के बयान के हवाले से बीबीसी ने अपनी रपट में लिखा है कि विमान में सवार यात्रियों में से किसी का भी बचना असंभव है।

प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के इमाम खुमैनी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर एक वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी अली खशानी ने कहा कि 160 यात्रियों सहित विमान में सवार क्रू के नौ सदस्यों की हादसे में मौत हो चुकी है।

उन्होंने आगे बताया कि यूक्रेन इंटरनेशनल एयरलाइंस (यूआईए) द्वारा संचालित बोइंग 737, बुधवार को रोबत करीम काउंटी के एक शहर परांड के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

खशानी ने कहा कि दुर्घटना के तुरंत बाद ही विमान में आग लग गई, जिसकी वजह तकनीकी खराबी हो सकती है। इसी बीच ईरान के आपातकालीन सेवा के प्रमुख पीरहुसैन कोलीवंद ने समाचार एजेंसी तस्नीम को बताया कि विमान में सवार 160 यात्रियों सहित क्रू के नौ सदस्य दुर्घटना में मारे जा चुके हैं।

कौलीवंद ने आगे बताया कि विमान में लगी आग बुझा दी गई है, आपातकालीन सेवा के सदस्य अब शवों को एकत्र कर रहे हैं।ईरान के सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन के प्रवक्ता रजा जफरजादेह ने कहा कि विमान में सवार लोगों की संख्या 170 थी।

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कोरोना का अंत आया करीब, कोविड-19 को इस खतरनाक वायरस से मारेंगे वैज्ञानिक

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नई दिल्ली। कोरोना वायरस (कोविड-19) से दुनियाभर में अबतक 83 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 14 लाख के पार हो गई है। इस बीच वैज्ञानिकों को कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर आशा की किरण नजर आने लगी है।

वैज्ञानिकों द्वारा किए गए ताजा शोध में पाया गया है कि मर्स वैक्सीन कोरोना संक्रमण को रोकने में बेहद कारगर साबित हो सकती है। चूहे पर किए गए इस वैक्सीन के परीक्षण में वैज्ञानिकों को सफलता मिली है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक एक चूहे को मर्स (मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम) की हैवी डोज दी गई थी उससे कोरोना वायरस से निजात मिलने की आशा नजर आ रही है। बता दें कि मर्स कोरोना वायरस कोविड-19 से काफी मिलता जुलता है, जिसने इस समय पूरी दुनिया में कहर बरपाया हुआ है।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्जिया और यूनिवर्सिटी ऑफ लोवा के शोधकर्ताओं ने दावा किया यह वैक्सीन कोशिकाओं में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करने के लिए एक हानिकारक वायरस का इस्तेमाल करता है। इसके परीक्षण के बाद कोविड-19 समेत अन्य कोरोना वायरस बीमारियों के खिलाफ वैक्सीन तैयार करने उम्मीद जगती है।

जर्नल एमबायो में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, यह वैक्सीन एक पैराइंफ्लूएंजा वायरस (पीआई5) है, जिसमें स्पाइक प्रोटीन होता है, जो मर्स कोशिकाओं को संक्रमित करने के लिए इस्तेमाल करता है। मर्स की घातक डोज देने के बावजूद जब चूहे पर इस वैक्सीन का इस्तेमाल किया गया तो उसे कुछ नहीं हुआ।

यूनिवर्सिटी ऑफ लोवा के शोधकर्ता प्रोफेसर पॉल मैक्क्रे ने कहा, हमारा नया अध्ययन दर्शाता है कि पैराइंफ्लूएंजा वायरस को कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ उपयोगी वैक्सीन साबित हो सकती है। शोधकर्ता अब जानवरों पर पैराइंफ्लूएंजा वायरस आधारित वैक्सीन के ज्यादा इस्तेमाल कर अध्ययन की योजना बना रहे हैं क्योंकि मर्स और कोविड-19 दोनों ही कोरोना वायरस के कारण फैला है।

मर्स ज्यादा घातक है, लेकिन 2012 से यह वायरस फैलने के बाद से अब तक केवल 2,494 मामले सामने आए हैं। वहीं, वुहान में पिछले साल दिसंबर में फैले कोविड-19 वायरस से दुनियाभर में अब तक 70 हजार लोग मारे जा चुके हैं।

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