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जामिया छात्रों के समर्थन में शिवसेना, संजय राउत ने कही ये बात

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नई दिल्ली। नागरिकता संशोधित कानून के विरोध में दिल्ली के जामियानगर इलाके में हुई लाठीचार्ज पर शिवसेना ने भी छात्रों का समर्थन किया है। साथ ही शिवसेना ने सरकार की कड़े शब्दों में आलोचना भी की है।

शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा है कि सरकार को स्टूडेंट्स की बात सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर नागरिकता कानून में कुछ खामिया हैं तो सबसे बात कर उन्हें दूर कर लिया गया होता तो देश नहीं जलता।

इतना ही नहीं शिवसेना नेता ने सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि अगर किसी और की सरकार होती तो हम सरकार को पीट देते।

वहीं, राउत ने कहा कि देश चलाने वाले हमारे नेताओं का यह कहना कि छात्र पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं यह सही नहीं है। संजय राउत ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी शासित राज्य जल रहे हैं। राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हिंसा पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।

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दिल्लीः शाहीन बाग में तिरंगा फहराकर मनाया गया गणतंत्र दिवस

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नई दिल्ली। आज के दिन पूरा देश गणतंत्र दिवस मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार सुबह भारत के 71वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक बधाई दी। प्रधानमंत्री ने ट्वीट में लिखा, “सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत बधाई। जय हिन्द!”

इस बीच गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के शाहीन बाग में भी तिरंगा फहराया गया है। यह तिरंगा शाहीन बाग में उस जगह फहराया गया है, जहां पिछले करीब डेढ़ महीने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स (NRC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। गणतंत्र दिवस के मौके पर पूरे इलाके को तिरंगे के रंग से सजाया गया। बता दें कि धरने पर बैठे लोग लगातार नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी और एनपीआर का विरोध कर रहे हैं। लोग सीएए कानून को वापस लिए जाने की मांग कर रहे हैं।

एक तरफ जहां शाहीन बाग में लगातार सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा है, तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार इस कानून को लेकर सख्त है। गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया है कि वह इस कानून को वापस नहीं लेंगे, जिसे विरोध करना है करे।

गौरतलब है कि शाहीन बाग में 15 दिसंबर से ही बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं धरने पर बैठी हैं। ये महिलाएं नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी का लगातार विरोध कर रही हैं। इनका कहना है कि ये कानून उनके साथ भेदभाव करता है। वे पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से इस कानून को वापस लेने की मांग कर रही हैं। हालांकि, अमित शाह ने पिछले दिनों कहा था कि सरकार इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी।

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