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बीजेपी सांसद का दावा, संस्कृत बोलने से कम होता है इन दो जानलेवा बीमारियों का खतरा

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के सांसद गणेश सिंह अपने अजीबोगरीब बयान की वजह से सुर्खियों में आ गए हैं। गुरुवार को बीजेपी सांसद ने दावा किया कि अमेरिका के एक शिक्षण संस्थान के शोध के अनुसार रोजाना संस्कृत भाषा बोलने से तंत्रिका तंत्र मजबूत होता है और मधुमेह तथा कोलेस्ट्रॉल कम होता है।

संस्कृत विश्वविद्यालयों के बिल पर एक बहस में भाग लेने के दौरान उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के एक शोध के अनुसार अगर कंप्यूटर प्रोग्रामिंग संस्कृत में की जाए, तो यह अधिक सुगम हो जाएगी।

सिंह ने कहा कि दुनिया की 97 फीसदी से ज्यादा भाषाएं संस्कृत पर आधारित हैं। इनमें कुछ इस्लामिक भाषाएं भी शामिल हैं। बिल पर संस्कृत में बात करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रताप चंद्र सारंगी ने कहा कि भाषा बहुत लचीली है और एक वाक्य को कई तरीकों से बोला जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न अंग्रेजी शब्द जैसे कि भाई और गाय संस्कृत से लिए गए हैं। सारंगी ने कहा कि इस प्राचीन भाषा के प्रचार से किसी अन्य भाषा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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निर्भया के दोषियों को अब इस तारीख को होगी फांसी, कोर्ट ने जारी किया नया डेथ वारंट

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नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप केस के चारों दोषियों की फांसी की नई तारीख आ गई है। कोर्ट ने सभी दोषियों के लिए नया डेथ वारंट जारी कर दिया है।

सूत्रों के मुताबिक चारों को 1 फरवरी की सुबह 6 बजे फांसी पर लटकाया जाएगा। चारों दरिंदों के पास अब केवल 350 घंटे ही शेष हैं। बता दें कि शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दोषी मुकेश की दया याचिका खारिज कर दी थी।

इससे पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने चारों दोषियों को 22 जनवरी सुबह 7 बजे फांसी पर लटकाने की तारीख तय की थी, लेकिन इसके बाद दोषी मुकेश सिंह ने राष्ट्रपति के सक्षम दया याचिका लगा दी थी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा निर्भया के दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका खारिज होने के बाद कोर्ट ने नया डेथ वारंट जारी किया है।

वहीं, इस मामले में नया डेथ वारंट जारी होने के बाद निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि जब तक दोषियों को फांसी पर नहीं लटका दिया जाता है, तब तक मेरी बेटी को न्याय नहीं मिलेगा। मुझको पिछले सात साल से तारीख पर तारीख दी जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारा सिस्टम ऐसा है कि जहां दोषी की सुनी जाती है। हर जगह निर्भया के गुनहगारों का ही मानवाधिकार देखा जा रहा है। हमारा मानवाधिकार कोई नहीं देख रहा है।

 

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