Connect with us

प्रादेशिक

पति ने की पत्नी की हत्या, थाने जाकर पुलिस से बोला, ‘बीबी को मार डाला, लाश ले आओ’

Published

on

नई दिल्ली। ‘मैंने बीबी को मार डाला है। लाश घर में ही पड़ी है। चलकर लाश को कब्जे में ले लो। फिर जो कानूनी कार्रवाई करनी हो कर लेना।’ इतना सुनते ही थाने में मौजूद पुलिस वाले समझे कि ‘कोई सनकी सिरफिरा है जो पुलिस को छकाने के लिए थाने पहुंच गया है।’ बाद में पुलिस को जब पता चला कि सूचना में दम है, तो थाने में मौजूद पुलिस वालों को पसीना आ गया।

यह सनसनीखेज घटना दिल्ली के मालवीय नगर थाने की है। पुलिस के मुताबिक, “हत्या के आरोप में गिरफ्तार शख्स का नाम सुमित मोंगिया है। सुमित ने जिस महिला का कत्ल करके लाश घर में ही छोड़ दी थी, और पुलिस को सूचना देने खुद ही थाने जा पहुंचा, आरोपी की वह पत्नी है। कत्ल की गई महिला का नाम दीपिका है।”

दीपिका और सुमित की शादी सन् 2009 में हुई थी। दंपत्ति के दो बच्चे हैं। आरोपी सुमित खिड़की एक्सटेंशन स्थित मकान में चौथी मंजिल पर रहता है। जबकि उसका बाकी परिवार इसी मकान की तीसरी मंजिल पर रहता है। घटना बुधवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे की बताई जा रही है।

मालवीय नगर थाना पुलिस के मुताबिक, “सुमित ने पुलिस को बताया कि पत्नी दीपिका रोज-रोज छोटी-छोटी बातों पर उससे झगड़ती थी। आए दिन की इसी चिकचिक से परेशान होकर उसने इतना घातक कदम उठाया। दीपिका की हत्या गला घोंटकर की गई है।”पुलिस ने दीपिका के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। घटनास्थल को सील कर दिया गया है। घटना की जांच अभी जारी है।

प्रादेशिक

श्रमजीवी पत्रकार डॉ. के. विक्रम राव हैं हर एक मीडिया पर्सन के लिए मिसाल

Published

on

By

समाज की सच्ची तस्वीर दिखाना हर एक ईमानदार पत्रकार की ज़िम्मेदारी होती है, ऐसे ही एक श्रमजीवी पत्रकार हैं डॉ. के. विक्रम राव।गद्यकार, सम्पादक, मीडिया शिक्षक और टीवी, रेडियो समीक्षक डॉ. के. विक्रम राव श्रमजीवी पत्रकारों के मासिक दि वर्किंग जर्नलिस्ट के प्रधान सम्पादक हैं।

वे वॉयस ऑफ अमेरिका (हिन्दी समाचार प्रभाग, वाशिंगटन) के दक्षिण एशियाई ब्यूरो में 15 वर्षों तक संवाददाता रहे। वे 1962 से 1998 तक दैनिक टाइम्स ऑफ इण्डिया (मुंबई) में कार्यरत थे।

नौ प्रदेशों में इसके ब्यूरो प्रमुख रहे। सम्प्रति 85 तेलुगु, हिंदी, उर्दू तथा अंग्रेजी पत्रिकाओं में स्तंभकार हैं। वे मुम्बई, हैदराबाद, कोची, दिल्ली, अहमदाबाद, कोलकत्ता आदि के पत्रकारिता संस्थानों में रिपोर्टिंग पर व्याख्याता भी हैं।

वे डॉ. धर्मवीर भारती के “धर्मयुग” और रघुवीर सहाय के “दिनमान” में लिखते रहे। वे दैनिक इकनामिक टाइम्स, और पाक्षिक फिल्मफेयर में भी काम कर चुके हैं। विक्रम राव की समाचार रिपोर्ट की चर्चा विभिन्न विधान मण्डलों तथा संसद के दोनों सदनों में होती रही हैं।

मुरादाबाद, अहमदाबाद और हैदराबाद के साम्प्रदायिक दंगों पर उनकी रिपोर्ट अपनी वास्तविकता और सत्यता के लिए प्रशंसित हुई।बुन्देलखण्ड और उत्तर गुजरात में अकाल स्थिति पर भेजी उनकी रिपोर्टों से सरकारी और स्वयंसेवी संगठनों ने तात्कालिक मदद भेजी जिससे कई प्राण बचाए जा सके।

विक्रम राव की मातृभाषा तेलुगु है। वे मराठी, गुजराती तथा उर्दू भी जानते हैं। उन्होंने मीडिया पर नौ और डॉ. लोहिया पर दो पुस्तकें लिखी हैं। वे भारतीय प्रेस काउंसिल (PCI) के छह वर्षों (1991) तक लगातार सदस्य रहे।

श्रमजीवी पत्रकारों के लिए भारत सरकार द्वारा 2008 में गठित जस्टिस जी.आर. मजीठिया और मणिसाणा वेतन बोर्ड (1996) के वे सदस्य थे। प्रेस सूचना ब्यूरो की केन्द्रीय प्रेस मान्यता समिति के पाँच वर्षों तक वो सदस्य रहे।

Continue Reading
Advertisement Aaj KI Khabar English

Trending