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नवाज शरीफ को पड़ा दिल का दौरा, हालत नाजुक

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नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को दिल का दौरा पड़ा है। जानकारी के अनुसार उनका इलाज लाहौर के सर्विस अस्पताल में चल रहा है।

सूत्रों के हवाले से उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। नवाज शरीफ की तबियत ज्यादा खराब होने की वजह से कल यानी शुक्रवार को अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी।

आपको बता दें कि शुगर मिल मामले में भ्रष्टाचार में दोषी पाए जाने पर उन्हें सात साल की सजा सुनाई गई है। 69 वर्षीय नवाज इस मामले में लंबे समय से जेल में बंद है।

नवाज की तबीयत गंभीर होने के बाद उन्हें बेटे हुसैन नवाज ने मौजूदा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना है कि उनके पिता को जेल में जहर दिया जा रहा है।

लंदन में रह रहे हुसैन ने पिता के खिलाफ साजिश का आरोप लगाया। हुसैन ने ट्वीट किया, ‘जहर के लक्षण हैं।’ अगर मेरे पिता को कुछ होता है, तो आप जानते हो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

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करतारपुर पर पाक सेना ने पलटा इमरान खान का फैसला, चली ये चाल

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नई दिल्ली। करतारपुर कॉरिडोर को लेकर पाकिस्तान का दोहरा चरित्र एक बार फिर सामने आया है। पाकिस्तानी सेना ने पाक पीएम इमरान खान के उस फैसले को बदल दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय श्रद्धालुओं को पवित्र गुरुद्वारा दरबार साहिब आने के लिए महज एक वैध पहचान-पत्र की जरूरत होगी। पाक सेना ने प्रवक्ता आसिफ गफूर ने कहा कि अब सिख तीर्थयात्रियों को करतारपुर कॉरिडोर का प्रयोग करने के लिए भारतीय पासपोर्ट की आवश्यक्ता होगी।

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर की इस टिप्पणी से एक दिन पहले ही भारत ने पाकिस्तान से यह स्पष्ट करने को कहा था कि करतारपुर स्थित गलियारा जाने के लिए सिख श्रद्धालुओं को पासपोर्ट की जरूरत होगी या नहीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मेजर जनरल गफूर ने बुधवार को कहा कि भारतीय सिख श्रद्धालुओं को करतारपुर गलियारे का प्रयोग करने के लिए पासपोर्ट दिखाना जरूरी होगा।

गफूर ने कहा कि सुरक्षा कारणों से, प्रवेश पासपोर्ट आधारित पहचान पर मिली अनुमति के तहत कानूनी तरीके से दिया जाएगा। एक नवंबर को, प्रधानमंत्री खान ने करतापुर गलियारे का निर्माण पूरा होने की ट्विटर पर घोषणा करते हुए कहा था कि उन्होंने दो शर्तों को माफ कर दिया है। इनमें से एक पासपोर्ट से जुड़ी शर्त थी जबकि दूसरी शर्त भारत से करतारपुर तीर्थयात्रा पर आने वाले सिखों द्वारा 10 दिन पहले पंजीकरण कराने से जुड़ी थी।

उन्होंने कहा था कि भारत के सिख श्रद्धालुओं को करतारपुर आने के लिए पासपोर्ट की नहीं बल्कि एक वैध पहचान-पत्र की जरूरत होगी। इसके अलावा उद्घाटन समारोह के लिए आने वाले और 12 नवंबर को सिख गुरु की 550वीं जयंती के मौके पर आने वाले श्रद्धालुओं से 20 डॉलर का सेवा शुल्क भी नहीं वसूला जाएगा।

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