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प्रादेशिक

शिव सेना ने फिर दोहराई 50-50 फॉर्मूले की बात, लिखित में मांगा आश्वासन

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नई दिल्ली। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद शिव सेना ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को 50-50 फॉर्मूले की याद दिलाई है।

शनिवार को मुंबई मुख्यालय में पार्टी के नए विधायकों की बैठक में इस फॉर्मूले को लेकर एक बार फिर चर्चा हुई। इस बार शिवसेना ने सीएम पद को लेकर लिखित आश्वासन मांगा है।

शिव सेना के टिकट पर सिल्लोड से जीतने वाले मुस्लिम विधायक अब्दुल सत्तार ने कहा कि वे आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं।

उन्होंने दावा किया कि बीजेपी और शिवसेना ने गठबंधन के दौरान तय किया था कि राज्य में पहले 2.5 साल शिवसेना का मुख्यमंत्री होगा, इसके बाद अगले ढाई साल बीजेपी का सीएम होगा।

अब्दुल सत्तार की ही तरह शिवसेना विधायक प्रताप सरनाइक ने भी शिवसेना से मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग की। सरनाइक ने कहा कि सभी शिवसैनिक शिवसेना से ही मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं।

चुनाव से पहले 50-50 फार्मूले पर बात हुई थी। अब इस बारे में उद्धव ठाकरे निर्णय करेंगे। हम बैठक में उनसे मांग करेंगे कि शिवसेना से ही मुख्यमंत्री बनाया जाए। हम आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं।

उत्तराखंड

आध्यात्म : भगवान श्रीराम का देवभूमि उत्तराखण्ड से है गहरा नाता

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भगवान श्रीराम का मंदिर भव्य मंदिर भले ही अयोध्या में बनाने जा रहा है, लेकिन भगवान श्रीराम का देवभूमि उत्तराखण्ड से गहरा नाता रहा है।

यहां श्रीराम भागीाथी और अलंकनंदा के संगम यानि गंगा के उदगम स्थल देवप्रयाग में भी बसते हैं, जहां उनका भव्य मंदिर भी है।

राम मंदिर भूमि पूजन के मुहूर्त को अब 48 घंटे बाकी, घट सकते हैं मेहमान

 

रामलला और रावण का बीच हुए युद्ध में जब राम ने रावण का वध किया तो उन पर ब्रहमा हत्या लग गयी, जिसके पाप से निवाराण पाने के लिये श्रीराम उस वक्त तप करने इस क्षेत्र में आये थे। जहां उन्होने सालो तक इस क्षेत्र में भी तपस्या की और तभी इस क्षेत्र को भगवान श्रीराम की तपस्थली भी कहा जाता है।

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