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उत्तराखंड

अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड में तेजी से हुआ विकास- त्रिवेंद्र सिंह रावत

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देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को मुंबई में आयोजित एक समारोह में प्रतिभाग किया। उन्होंने कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में उत्तराखंड के सौंदर्य, योग व आध्यात्म वेलनेस तथा निवेश की संभावनाओं पर अपने विचार रखे।

उन्होंने अपने सम्बोधन में विशेषकर निवेशकों को उत्तराखण्ड में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने निवेशकों से अपील करते हुए कहा कि आप यहां निवेश के लिए आएंगे तो आपको आध्यात्मिक शांति की अनुभूति होगी, आप स्वस्थ मुस्कराहट के साथ वापस लौटेंगे। शान्ति और मुस्कुराहट हमारे राज्य के सबसे बड़े USP हैं।

रेल कनेक्टीविटी के काम आई तेज़ी

कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि सन् 2000 में झारखण्ड, छत्तीसगढ़ सहित उत्तराखण्ड राज्य भी अस्तित्व में आया। इन 19 वर्षों के सफर में अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखण्ड ने तेजी से विकास किया है।

प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 1,98,738 रूपए हो गयी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में समुद्र और रेगिस्तान को छोड़कर प्रकृति अपने हर रूप में मौजूद है। यहां झील, झरना, बर्फीली चोटियां, नीला साफ आकाश, जंगल, बाघ, एडवेंचर योग व आध्यात्म सब कुछ मौजूद है।

उत्तराखण्ड को न केवल प्रकृति ने खूबसूरत बनाया है बल्कि यहां का परिश्रमी मानव संसाधन जो देवभूमि और वीरभूमि के साथ ही अपनी ईमानदारी के लिए विशेष पहचान रखता है। वो राज्य आज सम्भावनाओं का राज्य है।

 

उत्तराखंड

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में लिया हिस्सा

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देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में प्रतिभाग करते हुए नमामि गंगे परियोजना में गंगा की सहायक नदियों पर स्थित प्रमुख नगरों में भी सीवेज प्रबंधन की योजनाओं की स्वीकृति देने व ठोस अपशिष्ठ निस्तारण की व्यवस्था किए जाने का सुझाव दिया है।

निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए वेस्ट टू एनर्जी नीति

मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा नदी के तट पर 15 प्राथमिकता के नगरों के सभी 196 वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा उठाया जा रहा है। इसमें से 83 वार्डों में सोर्स सेगरीगेशन भी प्रारम्भ हो चुका है। प्रदेश में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया गया है। प्लास्टिक अपशिष्ठ के निस्तारण के लिए 10 नगरों में प्लास्टिक कम्पैक्टर लगाए गए हैं। 04 अन्य नगरों में भी कम्पैक्टर लगाए जाने की प्रक्रिया गतिमान है। निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए वेस्ट टू एनर्जी नीति बनाई गई है।

गंगा नदी के तटवर्ती 22 ग्रामों को चिन्हित कर वहां जैविक कृषि को क्लस्टर एप्रोच के माध्यम से प्रोत्साहित करने की कार्ययोजना बनाई गई है। प्रथम चरण में जनपद चमोली, उत्तरकाशी, पौड़ी, रूद्रप्रयाग व टिहरी के कुल 42 ग्रामों में जैविक खेती का कार्य प्रारम्भ हो चुका है।

 

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