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SC में अयोध्या मामले पर 25वें दिन सुनवाई जारी, मुस्लिम पक्ष के वकील से जज ने पूछा ये सवाल

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या भूमि विवाद मामले को लेकर 25वें दिन सुनवाई जारी है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन से कई सवाल पूछे।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजीव धवन से पूछा कि भगवान का स्वयंभू होना क्या सामान्य प्रक्रिया है? ये कैसे साबित करेंगे कि राम का जन्म वहीं हुआ या नहीं?

इस पर राजीव धवन ने कहा कि यही तो मुश्किल है। रामजन्मस्थान का शिगूफा तो ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1855 में छोड़ा और हिंदुओं को वहां रामचबूतरा पर पूजा पाठ करने की इजाजत दी।

धवन ने इकबाल की शायरी का ज़िक्र कर राम को इमामे हिंद बताते हुए उन पर नाज़ की बात लेकिन फिर कहा कि बाद में वो बदल गए थे और पाकिस्तान के समर्थक बन गए थे।

जस्टिस अशोक भूषण ने धवन से वो पैरा पढ़ने को कहा जिसमें ये कहा गया था कि हिंदू जन्मस्थान सिद्ध कर दें तो मुस्लिम पक्ष दावा और ढांचा खुद ही ढहा देंगे। इस पर धवन ने पैरा पढ़ा। धवन ने कहा कि घंटियों के चित्र, मीनार और वजूखाना न होने से मस्जिद के अस्तित्व पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

जस्टिस बोबड़े ने एक मौलाना का स्टेटमेंट पढ़ने को कहा जिसका क्रॉस एक्जाम नहीं हुआ था। यानी उस मौलाना के हवाले से दी गई धवन की दलील शून्य हो गई क्योंकि क्रॉस एक्जाम से पहले ही मौलाना का इंतकाल हो गया था।

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हैदराबाद एनकांउटर केसः सीजेआई बोले-बदले की भावना से किया गया न्याय सही नहीं

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नई दिल्ली। हैदराबाद में गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया शरद अरविंद बोबडे की प्रतिक्रिया सामने आई है।उन्होंने गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर में मारे जाने की घटना की आलोचना की है।

उन्होंने कहा कि अगर न्याय बदले की भावना से किया जाए तो अपना मूल चरित्र खो देता है। जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट की नई इमारत के उद्घाटन समारोह में जस्टिस एस ए बोबड़े ने कहा, “मैं नहीं समझता हूं कि न्याय कभी भी जल्दबाजी में किया जाना चाहिए, मैं समझता हूं कि अगर न्याय बदले की भावना से किया जाए तो ये अपना मूल स्वरूप खो देता है।”

इस दौरान कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी वहीं मौजूद थे। जस्टिस जोधपुर में एक कार्यक्रम में जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने कहा कि न्याय कभी भी आनन-फानन में किया नहीं जाना चाहिए।

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