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उत्तर भारतीयों पर बयान देकर घिरे मोदी सरकार के मंत्री, मायावती ने ट्वीट कर साधा निशाना

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नई दिल्ली। बेरोजगारी के मुद्दे पर बयान देने के बाद केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार सुर्खियों में आ गए हैं। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के निशाना साधने के बाद अब बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने भी केंद्रीय मंत्री के बयान की आलोचना की है।

मायावती ने अपने ट्विटर हैंडल से गंगवार पर निशाना साधते हुए लिखा, देश में छाई आर्थिक मंदी आदि की गंभीर समस्या के संबंध में केंद्रीय मंत्रियों के अलग-अलग हास्यास्पद बयानों के बाद अब देश व खासकर उत्तर भारतीयों की बेरोजगारी दूर करने के बजाए यह कहना कि रोजगार की कमी नहीं बल्कि योग्यता की कमी है, अति-शर्मनाक है जिसके लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।

आपको बता दें कि इससे पहले बेरोजगारी के सवाल पर संतोष गंगवार ने कहा था कि हमारे उत्तर प्रदेश में जो रिक्रूटमेंट करने आते हैं, वो इस बात का सवाल करते हैं कि जिस पद के लिए हम रख रहे हैं उस क्वालिटी का व्यक्ति हमें नहीं मिल रहा है। कमी है तो योग्य लोगों की।

मंत्री ने कहा था कि हम इसी मंत्रालय को देखने का काम करते हैं। इसलिए मुझे जानकारी है कि देश में रोजगार की कोई कमी नहीं है। रोजगार बहुत है। रोजगार दफ्तर के आलावा हमारा मंत्रालय भी इसकी मॉनिटरिंग कर रहा है। रोजगार की कोई समस्या नहीं है बल्कि जो भी कंपनियां रोजगार देने आती हैं, उनका कहना होता है कि उन युवाओं में योग्यता नहीं है। मंदी की बात समझ में आ रही है, लेकिन रोजगार की कमी नहीं है।

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मोदी सरकार के फैसले पर भड़के बीजेपी सांसद, बोले-कोर्ट जाऊंगा

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नई दिल्ली। एअर इंडिया को बेचने की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को प्रारंभिक जानकारी वाला मेमोरंडम जारी करने के बाद स्वामी सरकार के खिलाफ खड़े हो गए।

बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट के जरिए फैसले का विरोध करते हुए कहा कि यह सौदा पूरी तरह से देश विरोधी है और मुझे कोर्ट जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। हम परिवार की बेशकीमती चीज को नहीं बेच सकते।

बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने एअर इंडिया को बेचने के फैसले पर नाराजगी जाहिर की है।

इससे पहले भी वह सरकार की इस पहल पर सवाल खड़े कर चुके हैं। माना जा रहा है कि केंद्र के इस फैसले को लेकर राजनीतिक और कानूनी अड़चन पैदा हो सकती है।

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