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उर्मिला मातोंडकर ने कांग्रेस को दिया झटका, पार्टी को कहा अलविदा

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नई दिल्ली। नॉर्थ मुंबई से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने वाली एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी है। उर्मिला को नॉर्थ मुंबई से चुनाव लड़ाया गया था।

उन्हें भाजपा के गोपाल शेट्टी ने 4.6 लाख वोटों ने हराया था। कांग्रेस छोड़ने के पीछे का कारण उर्मिला ने पार्टी हो रही अंदरूनी गुटबाजी को बताया है।

आपको बता दें कि उर्मिला ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस का दामन थामा था। फिल्मी दुनिया में लोकप्रिय होने के बावजूद उन्हें नॉर्थ कांग्रेस से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था।

इस फैसले के बाद उर्मिला ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि मुंबई कांग्रेस बड़े लक्ष्यों पर ध्यान देने की जगह उनका इस्तेमाल कर राजनीति कर रही है।

जारी बयान में उर्मिला मातोंडकर ने कहा कि मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफा दे चुकी हूं। मैं पहली तब इस्तीफा के बारे में सोचना शुरू कर दिया जब मेरे बार-बार के प्रयास के बावजूद कोई एक्शन नहीं लिया गया और बाद में तब के मुंबई कांग्रेस के प्रमुख मिलिंद देवड़ा को पत्र लिखा था। बाद में मेरे पत्र को लीक कर दिया गया जो कि गोपनीय था। यह मेरे साथ विश्वासघात था।

उन्होंने आगे कहा कि कहने की जरूरत नहीं है कि पार्टी में किसी भी व्यक्ति ने मेरे बार-बार के विरोध के बावजूद माफी नहीं मांगी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई उत्तर में कांग्रेस के घटिया प्रदर्शन के लिए विशेष रूप से जिन लोगों का मेरे पत्र जिक्र था, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई बल्कि उन्हें नए पदों से पुरस्कृत किया गया।

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रोजगार से जोड़ा जाना चाहिए पर्यटनः सीएम योगी

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लखनऊ। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को पर्यटन पर बात करते हुए कहा कि पर्यटन को अध्यात्मिक पर्यटन तक ही सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उसे हैरिटेज, वन्यजीवन तक बढ़ाया जाए और इसकी योजना बनाकर इसे रोजी-रोजगार से जोड़ा जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के सभागार में एक बहुभाषी समाचार एजेंसी द्वारा आयोजित उत्तर प्रदेश विकास संवाद-2 में तीर्थाटन, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास पर केन्द्रित समारोह में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।

उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। पर्यटन क्षेत्र को तीर्थाटन से आगे ले जाकर हम आíथक स्वावलम्बन की ²ष्टि से बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन इसे तीर्थाटन तक सीमित करना ठीक नहीं है। इसे रोजगार से भी जोड़ा जाना चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “यह सच है कि पर्यटन का स्वरूप तीर्थाटन के रूप में रहा है, लेकिन तीर्थयात्री को भी कुछ सुविधा चाहिए। अगर उसके पास भुगतान क्षमता है तो यह एक अच्छी शुरुआत हो सकती है। काशी विश्वनाथ और उसके आसपास के क्षेत्र के विकास के लिए जब हम योजना बना रहे थे तो गाइड रखने का सुझाव आया था। पहले चरण में 30 गाइड रखे गए और वे सरकार पर बोझ बने बिना हर माह 30 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक कमा रहे हैं।”

मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “हमारे पास अयोया, मथुरा, काशी, वृंदावन, नैमिष आदि कई प्रमुख तीर्थस्थल, बौद्घस्थल हैं, जो धाíमक पर्यटन का हिस्सा हैं। यहां तमाम अनेक ऐसे हिस्से हैं, जहां रोजगार उत्पन्न हो सकते हैं। बस इसमें सकारात्मक दृष्टि से कार्य करने की आवश्यकता है।”

उन्होंने कहा, “परिवर्तन के लिए हमें मानसिक तौर पर तैयार रहना होगा। कूप मंडूक रहकर हम परिवर्तन नहीं ला सकते। इस स्थिति से उबरना होगा और आगे जाना होगा।”

उन्होंने कहा, “अयोया में पहले दीपावली पर शस्त्र पूजन आदि कर लिया जाता था, लेकिन हमारी सरकार ने संतों से बात करके सामूहिक रूप से दीपोत्सव मनाने की परम्परा शुरू की। अयोध्या के साथ दीपोत्सव अब जुड़ चुका है। योजना और सहभागिता साथ-साथ चले तो पर्यटन को नई दिशा दी जा सकती है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “अध्यात्मिक, सांस्कृतिक काया के साथ अगर हम अपने पर्यटन स्थल को नए कलेवर में नहीं रखेंगे तो दुनिया आकíषत नहीं होगी। उत्तर प्रदेश में विकास की सम्भावनाएं पहले से ही मौजूद हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “1916 में महात्मा गांधी काशी आए थे और विश्वनाथ मंदिर दर्शन करने गए थे। तब उन्होंने वहां गलियों में मौजूद गंदगी और संकीर्णता पर तल्ख टिप्पणी की थी। उनकी टिप्पणी के 100 साल बाद भी न तो गलियां चौड़ी हुईं और न ही गंदगी हटी। हमारी सरकार ने इस दिशा में प्रयास किया है। अब काशी में पांच फुट संकरी गलियां नहीं, बल्कि सौ फुट चौड़ा रास्ता मिलेगा।” योगी ने ईको टूरिज्म के विकास पर भी जोर दिया।

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