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अन्तर्राष्ट्रीय

क्या भगवा कपड़े पहनकर पीएम मोदी से मिले अबु धाबी के प्रिंस? सच्चाई जानें यहां

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नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की एक तस्वीर खूब वायरल हो रही है।

तस्वीर को लेकर दावा किया जा रहा है कि क्राउन प्रिंस ने “जय श्रीराम” लिखा हुआ रामनामी गमछा पहनकर पीएम मोदी से मुलाकात की। आज की खबर की टीम ने जब इस तस्वीर की पड़ताल की तो पाया कि तस्वीर में किया जा रहा दावा पूरी तरह गलत है।

फेसबुक यूजर “रवि गुप्ता” ने भी यह तस्वीर पोस्ट करते हुए कैप्शन में लिखा “बंदा खुद टोपी नहीं पहनता, लेकिन शेखों को भगवा पहनाकर आता है” खबर लिखे जाने तक इस तस्वीर को 2600 से ज्यादा बार तक शेयर किया जा चुका था।

बंदा खुद टोपी नही पहनता,लेकिन 👉शेखों को भगवा 🔥पहनाकर आता है👌👌😹😍

Ravi Gupta ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಮಂಗಳವಾರ, ಆಗಸ್ಟ್ 27, 2019

तस्वीर का सच जानने के लिए जब हमने गूगल को खंगाला तो पता चला कि तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की गई है। हाल ही में अबू धाबी के शेख नाहयान ने प्रधानमंत्री मोदी को संयुक्त अरब के सर्वोच्च सम्मान “ऑर्डर ऑफ जायद” से सम्मानित किया था। यह तस्वीर उसी समय ली गई थी। लेकिन सोशल मीडिया पर इसे फोटोशॉप की मदद से कपड़ों का रंग बदल दिया गया। आज की खबर की पड़ताल में यह खबर पूरी तरह गलत साबित होती है।

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करतारपुर पर पाक सेना ने पलटा इमरान खान का फैसला, चली ये चाल

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नई दिल्ली। करतारपुर कॉरिडोर को लेकर पाकिस्तान का दोहरा चरित्र एक बार फिर सामने आया है। पाकिस्तानी सेना ने पाक पीएम इमरान खान के उस फैसले को बदल दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय श्रद्धालुओं को पवित्र गुरुद्वारा दरबार साहिब आने के लिए महज एक वैध पहचान-पत्र की जरूरत होगी। पाक सेना ने प्रवक्ता आसिफ गफूर ने कहा कि अब सिख तीर्थयात्रियों को करतारपुर कॉरिडोर का प्रयोग करने के लिए भारतीय पासपोर्ट की आवश्यक्ता होगी।

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर की इस टिप्पणी से एक दिन पहले ही भारत ने पाकिस्तान से यह स्पष्ट करने को कहा था कि करतारपुर स्थित गलियारा जाने के लिए सिख श्रद्धालुओं को पासपोर्ट की जरूरत होगी या नहीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मेजर जनरल गफूर ने बुधवार को कहा कि भारतीय सिख श्रद्धालुओं को करतारपुर गलियारे का प्रयोग करने के लिए पासपोर्ट दिखाना जरूरी होगा।

गफूर ने कहा कि सुरक्षा कारणों से, प्रवेश पासपोर्ट आधारित पहचान पर मिली अनुमति के तहत कानूनी तरीके से दिया जाएगा। एक नवंबर को, प्रधानमंत्री खान ने करतापुर गलियारे का निर्माण पूरा होने की ट्विटर पर घोषणा करते हुए कहा था कि उन्होंने दो शर्तों को माफ कर दिया है। इनमें से एक पासपोर्ट से जुड़ी शर्त थी जबकि दूसरी शर्त भारत से करतारपुर तीर्थयात्रा पर आने वाले सिखों द्वारा 10 दिन पहले पंजीकरण कराने से जुड़ी थी।

उन्होंने कहा था कि भारत के सिख श्रद्धालुओं को करतारपुर आने के लिए पासपोर्ट की नहीं बल्कि एक वैध पहचान-पत्र की जरूरत होगी। इसके अलावा उद्घाटन समारोह के लिए आने वाले और 12 नवंबर को सिख गुरु की 550वीं जयंती के मौके पर आने वाले श्रद्धालुओं से 20 डॉलर का सेवा शुल्क भी नहीं वसूला जाएगा।

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